लखनऊ: KGMU में 10 लाख का बिल अचानक पहुंचा 45 लाख! यूरोलॉजी विभाग प्रमुख की छुट्टी, तीन नौकरी से बर्खास्त – Lucknow KGMU rs 10 Lakh Bill Suddenly Soars to 45 Lakh rupees Urology Department action taken by vc l


लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में असाध्य योजना के तहत करोड़ों रुपये के दवा खरीद घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है. केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. अपुल गोयल को उनके पद से हटा दिया गया है. इसके साथ ही एक रेगुलर फार्मासिस्ट को सस्पेंड और आउटसोर्सिंग के 3 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है. 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर आपराधिक मामला चलाने की मांग की है. साथ ही, रकम को आउटसोर्सिंग एजेंसी से वसूलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

केजीएमयू के अधिकारियों के मुताबिक, यूरोलॉजी विभाग में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए चलाई जा रही असाध्य योजना के तहत हर महीने करीब 10 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती थीं. लेकिन इस साल की शुरुआत में अचानक दवाओं का खर्च सामान्य से 3 से 4 गुना बढ़ गया. पिछले महीने तो हद ही हो गई, जब दवा खरीद का बिल अचानक 45 लाख रुपये पहुंच गया. इतनी बड़ी रकम देखकर प्रशासन के कान खड़े हो गए. जब रिकॉर्ड खंगाले गए तो चौंकाने वाला सच सामने आया. लगभग 40 मरीजों के नाम पर कैंसर की महंगी दवाएं, प्रोटीन और आयरन सप्लीमेंट्स बार-बार खरीदे दिखाए गए थे. 

जांच में पता चला कि कागजों पर इन मरीजों को कई-कई बार भर्ती दिखाकर सरकारी फंड का अंधाधुंध दुरुपयोग किया जा रहा था. दवा खरीद में इस बड़ी हेराफेरी के सामने आने के बाद केजीएमयू की वाइस चांसलर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने तुरंत एक्शन लिया. उन्होंने मामले की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया. कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद केजीएमयू में ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई. 

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. अपुल गोयल को योजना की निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप में प्रशासनिक पद से हटा दिया गया है. निष्पक्ष जांच पूरी होने तक वह इस पद से दूर रहेंगे. उनकी जगह जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. एचएस पाहवा को यूरोलॉजी विभाग का कार्यवाहक हेड नियुक्त किया गया है. इसके अलावा, घोटाले में सीधे तौर पर शामिल आउटसोर्सिंग कर्मचारी पी. सिंह, एच. श्रीवास्तव और एस. तिवारी की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं. वहीं यूरोलॉजी विभाग के लोकल परचेज काउंटर पर तैनात रेगुलर फार्मासिस्ट अरशद वासी को सस्पेंड कर दिया गया है. प्रशासन का कहना है कि पुलिस जांच के बाद इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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