लाडली बहना योजना से भी नाम काटने की तैयारी? तुरंत चेक करें ये 12 शर्तें और 1 जरूरी काम – cm ladli behna yojana re verficiation may start in madhya pradesh check eligibilities and ekyc status
Ladli Behna Yojana: क्या आपके खाते में भी मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के 1500 रुपये आ रहे हैं? माना जा रहा है कि जल्द ही इस योजना से अपात्र लाभार्थियों के नाम काटे जा सकते हैं।
लाडली बहना योजना से भी कट सकते हैं नाम। (Image: MP Govt)
महाराष्ट्र की लाडकी बहिण योजना से करीब 92 लाख नाम काटे जा चुके हैं। अब मध्य प्रदेश में भी ऐसी सुगबुगाहट आने लगी है। हाल ही में खबर आई कि इंदौर में 19 हजार से ज्यादा नाम लाडली बहना योजना से हटा दिए गए हैं। कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की तर्ज पर एमपी में भी बड़े पैमाने पर वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू होने वाली है। इस वेरिफिकेशन के बाद पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लिस्ट से हटाए जा सकते हैं।
वर्तमान में 1.25 करोड़ महिलाओं को मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के तहत हर महीने 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। साल 2023 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब पात्र लाभार्थियों की संख्या 1.31 करोड़ से ज्यादा थी। माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर सकती है। अगर आपको भी आशंका है कि आपका नाम कट सकता है तो हम आपको पात्रता की पूरी जानकारी दे रहे हैं। साथ ही वो चीजें भी बताएंगे, जिन्हें फटाफट करने से आपके खाते में पैसा आना लगभग सुनिश्चित हो जाएगा।
क्या आप लाडली बहना की इन शर्तों को करते हैं पूरा
मध्य प्रदेश की स्थायी निवासी
उम्र 21 साल या उससे ज्यादा और 60 साल से कम हो
विवाहित, तलाकशुदा या पति द्वारा छोड़ी गई महिला
आपकी या परिवार की कुल सालाना आय 2.5 लाख से ज्यादा नहीं है
परिवार में कोई भी इनकम टैक्स नहीं भरता है
आप या परिवार में से कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं है
न ही कोई सरकारी नौकरी से रिटायर हुआ है और न पेंशन मिल रही है
भारत सरकार या राज्य सरकार की ओर से 1500 रुपये से ज्यादा पेंशन नहीं मिलनी चाहिए।
खुद महिला या परिवार में से कोई भी वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक नहीं होना चाहिए।
स्वयं / परिवार का कोई सदस्य भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के द्वारा चयनित/ मनोनित, बोर्ड/ निगम/ मण्डल/ उपक्रम के अध्यक्ष/ संचालक/ सदस्य न हो।
महिला या परिवार का कोई सदस्य स्थानीय निकायों में निर्वाचित जनप्रतिनिधि (पंच एवं उपसरपंच को छोडकर) न हो।
महिला या परिवार के पास सयुक्त रूप से कुल पांच एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि न हो
eKYC नहीं कराया तो भी कट जाएगा नाम
अगर आप मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की ऊपर बताई गईं शर्तों को पूरा करती हैं तो भी आपका नाम लिस्ट से कट सकता है। इसका एक बड़ा कारण है-eKYC का ना होना। हालांकि यह काम बहुत ही आसान है। आपको बस समग्र पोर्टल पर जाकर इस काम को अपने मोबाइल से ही पूरा कर लेना है।
eKYC करने के लिए सबसे पहले समग्र पोर्टल samagra.gov.in पर जाएं
यहां आपको ‘e-KYC करें’ के विकल्प पर क्लिक करना होगा
अपन समग्र आईडी और कैप्चा कोड भरें
समग्र आईडी से जुड़ा मोबाइल नंबर स्क्रीन पर दिखाई देगा
इसी नंबर पर ओटीपी आएगा, उसे भरें
अब अपने आधार नंबर से e-KYC की प्रक्रिया को पूरा करें
ईकेवाईसी का STEP BY STEP प्रोसेस जानने के लिए यहां क्लिक करें
इस वजह से भी कट सकता है लाडली बहना योजना से नाम
मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के तहत लाभार्थी की उम्र 21 साल से 59 साल तक होनी चाहिए। अगर किसी महिला की उम्र 60 साल से ज्यादा है तो उन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा और लाडली बहना योजना से नाम कट जाएगा। अगर लाडली बहना योजना से जुड़ा आपका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक नहीं है तो भी आपका पैसा रुक सकता है। इसलिए तुरंत बैंक जाकर चेक कर लें कि आपका बैंक अकाउंट आधार कार्ड से लिंक है या नहीं।
लेखक के बारे मेंअमित कुमारअमित कुमार, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर/सीनियर जर्नलिस्ट हैं। वर्तमान में सरकारी योजना सेक्शन के जरिए आम जनता तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचा रहे हैं। अमित कुमार की प्राथमिकता भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हर सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर रीडर्स तक पहुंचाना है। अमित कुमार जनवरी, 2025 से नवभारत टाइम्स डिजिटल से जुड़े हैं। इसके साथ बिहार-झारखंड और राजस्थान टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वह NBT Digital में सरकारी योजनाओं, बिहार-झारखंड और राजस्थान से संबंधित सेक्शन की प्लानिंग से लेकर तथ्यों पर आधारित ऐसे लेख तैयार कर रहे हैं, जो रीडर्स तक काम की जानकारी बिना बढ़ा-चढ़ाकर आसान भाषा में पहुंचा सकें।खबरें बिना सनसनी फैलाए पाठकों तक पहुंचाने पर उनका फोकस है। इन राज्यों की सियासी नब्ज को टटोलने के साथ-साथ आम लोगों की जरूरत की खबरों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने 20 साल के करियर में अमित कुमार को पत्रकारिता जगत के अलग-अलग क्षेत्र में रिपोर्टिंग करने और आमजन के लिए उपयोगी खबरें लिखने का मौका मिला।अमित कुमार ने सितंबर, 2006 में खेल जगत में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत की। फिर देश के प्रमुख अखबारों से डिजिटल की दुनिया तक कई पड़ाव आए। इस दौरान नेशनल, इंटरनेशनल, देश के विभिन्न राज्यों की खबरों को लेकर न्यूज प्लानिंग, वैल्यू एडेड आर्टिकल्स, इन्फ्रोग्राफिक्स और स्पेशल दिनों के लिए कंटेंट तैयार करने का काम किया। अमित कुमार के करियर में भूमिकाएं तो कई बदलीं, लेकिन एक चीज स्थिर रही। आमजन के लिए उपयोगी खबरों को आसान से आसान भाषा में रीडर्स तक पहुंचाना।अपने करियर के दो दशक लंबे सफर के दौरान सटीक खबर, फैक्ट पर आधारित, इन-डेप्थ और नॉलेज से भरपूर कंटेंट रीडर्स तक पहुंचाना ही प्राथमिकता रही। उनका मानना है कि कोई भी जानकारी यूजर तक बिना वेरिफाई किए नहीं जानी चाहिए। इसलिए खबरों के लिए वह हमेशा ऑथेंटिक सोर्स पर भी भरोसा करते हैं।देश की राजधानी दिल्ली में ही जन्मे और पले-बढ़े अमित कुमार ने CBSE Board से 10वीं और 12वीं पास की। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही हिंदी भाषा में M.A. किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर संवारने की ख्वाहिश के चलते माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। अमित कुमार शुरू से ही कुछ नया सीखने को लेकर आतुर रहे हैं। यही चीज उनके 2 दशक लंबे करियर में भी झलकती है।पत्रकारिता जगत में 20 साल का अनुभवअमित कुमार नवभारतटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले 20 साल में अमित कुमार को अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नई दुनिया, जनसत्ता और हरिभूमि जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अपनी स्किल को संवारने का मौका मिला। 2019 में अमर उजाला के साथ डिजिटल का सफर शुरू किया। यहां नेशनल-इंटनेशनल खबरों पर इन-डेप्थ काम करते हुए सफर के अगले पड़ाव टीवी9 भारतवर्ष और न्यूज-24 बने। यहां न्यूज टीम को लीड किया।करियर के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2010, क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 और बैडमिंटन ओपन जैसे कई बड़े इवेंट्स में रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। देश-विदेश की बड़ी खबरों पर काम करते हुए अयोध्या राम मंदिर फैसला, लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव, बिहार और झारखंड विधानसभा चुनाव, बजट, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स कवर किए। अमित कुमार को पॉजिटिव इम्पैक्ट वाली स्टोरीज लिखना पसंद है। उनकी प्राथमिकता ऐसा कंटेंट लिखने की रहती है, जो लोगों के लिए मददगार साबित हों। अमित कुमार को लिखने और पढ़ने के साथ घूमने का शौक है। देश के छोटे-छोटे गांवों तक जाना वहां की जीवनशैली से रूबरू होना खासतौर से पसंद है।… और पढ़ें