लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शिवसेना शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दे दी है। टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय करने वाले 20 सांसदों के लिए लोकसभा में अलग सिटिंग को भी अनुमति दी है।
मॉनसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में पार्टी की टूट पर मुहर लग गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शिवसेना शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, स्पीकर ने टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय करने वाले 20 सांसदों के लिए लोकसभा में अलग सिटिंग को भी मंजूरी दी है। एनसीपीआई को एक अलग ग्रुप का स्टेटस दिया गया है।
पिछले दिनों, उद्धव ठाकरे को तब बड़ा झटका लगा था, जब उनकी शिवसेना यूबीटी में दूसरी बार बड़ी टूट हुई थी। इस बार उनके छह सांसदों ने पाला बदल लिया और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय कर लिया। यह उद्धव के कुल सांसदों की दो तिहाई संख्या थी। इससे कुछ साल पहले भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी टूट देखने को मिली थी और ज्यादातर विधायकों और सांसदों के साथ वह एनडीए में शामिल हो गए थे। उद्धव ठाकरे के अलावा, ममता बनर्जी को भी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब तक के सबसे बड़े संकट का सामना करना पड़ रहा है।
चुनाव में टीएमसी की हार के बाद ममता के ज्यादातर विधायक और सांसद अब उनसे दूर हो चुके हैं। एक बागी गुट के नेतृत्व में विधायक 60 से भी ज्यादा टूट गए, जबकि काकोली घोष के नेतृत्व में 20 सांसद ममता बनर्जी से अलग हो गए। लगभग रोजाना कोई न कोई टीएमसी का नेता बागी गुट में शामिल हो रहा है। इसके अलावा, चार राज्यसभा सांसद भी इस्तीफा दे चुके हैं। 20 सांसदों ने काकोली के नेतृत्व में पूर्वोत्तर की पार्टी एनसीपीआई में विलय करने का फैसला लिया था। साथ ही, उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अपील की थी कि संसद में उन्हें अलग बैठाया जाए। मॉनसून सत्र शुरू होने से चंद दिनों पहले स्पीकर ने इसे मंजूरी दे दी। हालांकि, उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी और ममता बनर्जी की टीएमसी, दोनों ने स्पीकर से ऐसा नहीं करने के लिए कहा था।
शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि उनकी पार्टी के किसी भी सांसद द्वारा अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल में विलय के दावे को तब तक स्वीकार न किया जाए, जब तक उसे पार्टी का आधिकारिक प्राधिकरण प्राप्त न हो। सावंत ने अपने लेटर में कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि कुछ सांसद अलग समूह बनाकर या किसी अन्य पार्टी में विलय का दावा कर सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, मूल राजनीतिक दल की मंजूरी के बिना केवल सांसदों के आधार पर ऐसे दावे को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। इसलिए उन्होंने स्पीकर से अनुरोध किया कि किसी भी विलय या अलग गुट के दावे पर विचार न किया जाए।
‘अलग गुट के तौर पर न दी जाए मान्यता’
वहीं, ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी ऐसा ही पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा था। इस पत्र में उनसे रिक्वेस्ट की गई थी कि टीएमसी को एक अकेली पार्टी माना जाए, जिसका रिप्रेजेंटेशन सिर्फ उसके ऑथराइज्ड नेता और व्हिप करें और पार्टी के किसी भी कथित अलग हुए गुट को मान्यता देने से मना कर दिया जाए। उन्होंने लिखा था कि उन्हें पता चला है कि AITC से जुड़े लोकसभा के कुछ सांसदों ने आपके ऑफिस में एक पत्र दिया है, या देने का प्रपोजल रखा है, जिसमें AITC के एक अलग ग्रुप या गुट के तौर पर मान्यता मांगी गई है, जो लेजिस्लेटिव पार्टी से अलग हो। बनर्जी ने लिखा, “कानून किसी पॉलिटिकल पार्टी के अलग-अलग ग्रुप में बंटने को सही घटना नहीं मानता।” उन्होंने आगे कहा कि इसके बजाय, यह ऐसे काम को डिसक्वालिफिकेशन के नजरिए से देखता है।