13 जुलाई 2002 को लॉर्ड्स में सौरव गांगुली की कप्तानी में मिली ऐतिहासिक जीत के ठीक 24 साल बाद, इसी तारीख को भारतीय महिला टीम ने उसी मैदान पर इंग्लैंड को 270 रनों से करारी शिकस्त दी।

सौरव गांगुली ने लहरा दी थी टी शर्ट
13 जुलाई की यह तारीख भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में एक खास जज्बा जगाती है। आज से ठीक 24 साल पहले, इसी तारीख को साल 2002 में सौरव गांगुली की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में इंग्लैंड को शिकस्त दी थी। उस जीत के बाद दादा ने लॉर्ड्स की बालकनी में अपनी टी शर्ट लहराकर गोरे साहबों के घमंड को चकनाचूर किया था और भारतीय क्रिकेट को एक नया आक्रामक तेवर दिया था। अब 24 साल बाद, उसी ऐतिहासिक मैदान और उसी तारीख को भारतीय महिला टीम ने इंग्लैंड को 270 रनों के विशाल अंतर से रौंदकर गांगुली के उस ऐतिहासिक पल को एक बार फिर जी उठा दिया है।
टीम इंडिया ने बनाया दबदबा
क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए इतिहास के इस पहले महिला टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने शुरू से ही अपना दबदबा बनाए रखा। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 285 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। टीम को इस मजबूत स्थिति में पहुंचाने का श्रेय स्टार ओपनर स्मृति मंधाना को गया जिन्होंने 83 रनों की शानदार और संयमित पारी खेलकर भारतीय पारी की ठोस बुनियाद रखी।
क्रांति गौड़ ने मचाया तहलका
इसके बाद भारतीय गेंदबाजों, खासकर तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने अपनी कातिलाना गेंदबाजी से तहलका मचा दिया। इंग्लैंड का मजबूत बैटिंग ऑर्डर भारतीय आक्रमण के सामने ताश के पत्तों की तरह ढह गया और पूरी मेजबान टीम पहली पारी में महज 170 रनों पर ढेर हो गई। इस शानदार गेंदबाजी के दम पर भारत को पहली पारी के आधार पर 115 रनों की बेहद महत्वपूर्ण और मजबूत बढ़त हासिल हुई जिसने मैच का रुख भारत की तरफ मोड़ दिया।
186 रन पर इंग्लैंड की टीम ऑलआउट
दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड की मुश्किलों को और बढ़ा दिया। विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के मैदान पर एक यादगार शतक जड़ा, जबकि स्मृति मंधाना ने एक बार फिर बल्ले का दम दिखाते हुए शानदार 70 रन बनाए। इन पारियों की बदौलत भारत ने इंग्लैंड के सामने चौथी पारी में जीत के लिए एक असंभव सा लक्ष्य रखा। जवाब में रनों का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम भारतीय स्पिन और पेस के चक्रव्यूह में पूरी तरह फंस गई और पूरी टीम दूसरी पारी में सिर्फ 186 रन पर सिमट गई।
क्रांति गौड़ और यस्तिका का कमाल
इस मुकाबले में जीत के साथ ही भारत की यास्तिका भाटिया और क्रांति गौड़ ने वो मुकाम हासिल कर लिया जो आज तक कोई महिला क्रिकेटर नहीं कर पाई थी। यास्तिका ने बल्ले से शतक ठोककर और क्रांति ने गेंद से कमाल दिखाकर लॉर्ड्स के ऐतिहासिक ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराया।
