केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार (15 जुलाई 2026) को ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के दूसरे चरण 1.27 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी. इसके अलावा 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच छह लेन के नए एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी गई. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एनएच-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाले 43.218 किलोमीटर लंबे छह/चार लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी है, जिसकी लागत 10,998.32 करोड़ रुपये होगी.
काशी में इन परियोजनाओं को हरी झंडी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘काशी में हर साल करीब 15 करोड़ पर्यटक आ रहे हैं. यहां बुनियादी ढांचे के विकास का बहुत काम हुआ है और आज एक अगले स्तर के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दो बड़ी मंजूरियां दी गई हैं. वरुणा नदी के किनारे पूरा 6 लेन और 4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिली है. यह बहुत महत्वपूर्ण परियोजना है. इसके साथ ही काशी में गंगा के साथ-साथ एक पूरा छह-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा. वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर और गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर मिलकर शहर के ट्रैफिक को पूरी तरह से खत्म कर देंगे.’
मोबाइल उत्पादन के लिए 62,500 करोड़ की मंजूरी
मंत्रिमंडल ने मोबाइल विनिर्माण से जुड़ी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दूसरे चरण के लिए 62,500 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना और एक भारतीय फोन ब्रांड को विकसित करना है. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रोत्साहन आधारित इस नई योजना से लगभग 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात और 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. वैष्णव ने कहा, ‘मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन की दूसरी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी.’
‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के दूसरे चरण को मंजूरी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के दूसरे चरण के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे करीब चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा. सरकार के अनुसार इस योजना अवधि के दौरान दो लाख करोड़ रुपये मूल्य का सेमीकंडक्टर उत्पादन होगा.
आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण परिवेश के विकास के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी है. सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के इस नए चरण में चिप बनाने वाले उद्योग में खनिज और गैस जैसे कच्चे माल की आपूर्ति करने वालों को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान है. वैष्णव ने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने कुल 1.27 लाख करोड़ रुपये के व्यय के साथ ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 को मंजूरी दी है.’’
नई योजना में सेमीकंडक्टर परिवेश की पूरी वैल्यू चैन शामिल है. उन्होंने कहा, ‘सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ होंगे. पहला स्तंभ चिप डिजाइन का होगा.’ मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम स्वदेशी चिप के डिजाइन, विकास और उत्पादन पर ध्यान देगा. उन्होंने कहा, ‘इस कार्यक्रम के अंत तक हम स्वदेशी चिप के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएंगे.’ सरकार ने ‘इंडिया सेमीकॉन मिशन’ के पहले संस्करण के लिए 76,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे.
सेमीकॉन मिशन 1.0 के तहत, सरकार ने लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश वाली 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इस क्षेत्र में ज्यादातर निवेश घरेलू प्रौद्योगिकी कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी सेमीकंडक्टर इकाई से आया है. यह नई योजना ऐसे समय पर आई है जब दुनिया ‘मेमोरी’ चिप की कमी से जूझ रही है और कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं पर काम कर रही हैं. इस योजना से एआई उपकरण के लिए चिप की जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य चिप खंड से भी निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है.
यूरिया उत्पादन को लेकर सरकार का फैसला
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को बुधवार को मंजूरी दे दी. इसका उद्देश्य देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना और सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले इस उर्वरक के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूर नए निवेश ढांचे के तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे.
रेल परियोजना को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने रेल मंत्रालय के दो बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है. इन परियोजनाओं पर लगभग 3,907 करोड़ रुपये की लागत आएगी.
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सरकार ने कहा, ‘इन रूटों पर ट्रैक की संख्या बढ़ने से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, भीड़भाड़ कम होगी और भारतीय रेलवे की सर्विस पहले से बेहतर और समय की पाबंद होगी.’