विदेशी पैसे से पहचान बदलने का खेल! घुसपैठियों के ‘सीक्रेट सिंडिकेट’ पर ED का देशव्यापी प्रहार – rohingya-bangladeshi infiltrators identity change game with foreign funding eds nationwide action fake document syndicate exposed


प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली, बंगाल, यूपी और हरियाणा सहित कई राज्यों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेज और रोजगार दिलाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।

ED Raids
ईडी की दिल्ली समेत कई जगहों पर छापेमारी
नई दिल्ली: भारत में अवैध रूप से दाखिल हुए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को सिर्फ सीमा पार कराने तक ही मदद मिल रही थी, या उनके लिए देश के भीतर स्थायी ठिकाने, रोजगार और नई पहचान भी तैयार की जा रही थी? ED की गुरुवार सुबह से ताबड़तोड़ रेड ऐसे कई सवालों की पड़ताल और साक्ष्य जुटाने के लिए शुरू हुई।

कई राज्यों में ED की छापेमारी

ईडी अधिकारी के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग के तहत पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी शुरू की गई। यह कार्रवाई रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ, उनके पुनर्वास और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले नेटवर्क की जांच से जुड़ी है। जांच एजेंसी के मुताबिक शुरुआती पड़ताल में एक बेहद ऑर्गनाइज्ड और बहुस्तरीय सिंडिकेट का खुलासा हुआ है।

क्या है आरोप

आरोप है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में एंट्री दिलाने के बाद उन्हें देश के अलग अलग हिस्सों में बसाने का इंतजाम करता था। इसके लिए कथित तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और यहां तक कि पासपोर्ट जैसे भारतीय दस्तावेज भी फर्जी तरीके से तैयार कराए जाते थे, ताकि उनकी वास्तविक पहचान पूरी तरह बदल जाए।

जांच में आया सामने

ईडी अधिकारी के मुताबिक कोलकाता, उत्तर 24 परगना, साउथ 24 परगना, मुर्शिदाबाद, फरीदाबाद के बल्लभगढ़, सहारनपुर के देवबंद, दिल्ली और अन्य स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ईडी ने कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं, जिनकी जांच जारी है। प्रमुख संदिग्धों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच में एक और हैरान करने वाला पहलू सामने आया है।

ईडी का दावा

ईडी का दावा है कि कुछ सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट, जो विदेशी फंड विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत रजिस्टर्ड हैं, इस पूरे नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। ईडी के मुताबिक इन ट्रस्टों को ब्रिटेन स्थित संस्थाओं से पैसा मिलता था। बाद में यह रकम 6 हजार, 8 हजार या 10 हजार रुपये जैसी छोटी-छोटी किश्तों में संदिग्ध लोगों तक पहुंचाई जाती थी, जिससे उन लोगों को भारत में बसने और आर्थिक रूप से स्थापित होने में मदद मिल सके।

जांच में बड़ा खुलासा

ईडी सूत्रों के मुताबिक नेटवर्क का एक हिस्सा पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय था, जो कथित रूप से अवैध घुसपैठ का इंतजाम करता था। इसके बाद दूसरा ग्रुप उन लोगों के लिए भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार करता था। दस्तावेज मिलने के बाद उन्हें रोजगार या अन्य कारणों से देश के अलग-अलग राज्यों में भेज दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि घुसपैठियों को स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराने के लिए कैश मदद, नौकरी दिलाने या ई-रिक्शा जैसी व्यवस्थाएं भी कराई जा रही हैं।

मामले में क्या अधिकारियों का मानना

ईडी देवबंद स्थित कुछ परिसरों और पश्चिम बंगाल के कुछ संस्थानों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ईडी अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल अवैध घुसपैठ का नहीं, बल्कि पहचान बदलने, विदेशी फंडिंग और मनी लॉड्रिंग के जरिए भारत में स्थायी नेटवर्क खड़ा करने से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

क्या कहना है ईडी का

ईडी की छापेमारी रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की कथित अवैध घुसपैठ को लेकर यह कार्रवाई यूपी एटीएस की एफआईआर के आधार पर पीएमएलए के तहत की गई है। जांच में कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं रडार पर हैं, जिन पर विदेशों से धन प्राप्त कर उसे कई बैंक खातों, म्यूल अकाउंट्स और लेयर्ड ट्रांजैक्शनों के जरिए आगे पहुंचाने का आरोप है। एजेंसियों को छोटे-छोटे बैंक ट्रांसफर, भारी नकद निकासी और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के संकेत मिले हैं। छापों के दौरान दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच होगी। ED यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क को आर्थिक मदद कहां से मिली, धन किन रास्तों से पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। जांच अभी जारी है।

ED की इन जगहों पर रेड

दिल्ली एनसीआर में रेड

  • अब्दुल गफ्फार बाटला हाउस, ओखला दिल्ल
  • अब्दुल गफ्फार फतेहपुर तागा, धौज बल्लभगढ़ रोड हरियाणा
  • अब्दुल अब्दुल, बाटला हाउस
  • शेख नजीबुल हक देवबंद सहारनपुर
  • सनशाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी – मदनपुर खादर
  • अब्दुल गफ्फार – बाटला हाउस

वेस्ट बंगाल में रेड

  • कबीरबाग मिल्लत एकेडमी- 24 परगना, वेस्ट बंगाल
  • हरोरा अल जमीअतुल इस्लामिया दारू- हरोरा नॉर्थ वेस्ट बंगाल
  • अबू सालेह मंडल -स्वरूप नगर, वेस्ट बंगाल
  • अब्दुल्लाह गाजी- 24 परगना वेस्ट बंगाल
  • शेख नजीबुल हक- वेस्ट बंगाल
  • ताहिर वेलफेयर ट्रस्ट 24 परगना वेस्ट बंगाल
  • विक्रम रॉय 24 परगना वेस्ट बंगाल
  • टीके दास सोनारपुर कोलकाता
  • आदिल उर रहमान जीतपुर मुर्शिदाबाद वेस्ट बंगाल
विशाल आनंद शर्मा

लेखक के बारे मेंविशाल आनंद शर्माविशाल आनंद शर्मा, नवभारत टाइम्स में वर्ष 2010 से साइबर क्राइम, टेररिज्म और क्राइम इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट हैं। मौजूदा समय में नवभारत टाइम्स दिल्ली में ‘असिस्टेंट एडिटर’ हैं। साल 2018 के ‘बहुचर्चित बुराड़ी – 11 डैथ केस’ में ‘इनवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग’ की वजह से इनके ऊपर Netflix वेबसीरिज- (House of Secrets: The Burari deaths) बन चुकी है। उस वेबसीरिज के ‘रिसर्चर’ रहे हैं। साल 2021 में इन्होंने पहली बार देश में फैले ‘इंस्टेंट लोन ऐप’ के मकड़जाल पर 26 दिन नॉन स्टॉप साइबर क्राइम इनवेस्टिगेटिव सीरिज प्रकाशित कर ‘चाइनीज लिंक’ का खुलासा किया था। ‘कारगिल योद्धा’ पर लिखी इनकी बहुचर्चित खबर का मुद्दा संसद में उठ चुका है। इसके अलावा साइबर क्राइम के हर नए ट्रेंड/मॉडसऑपरेंडी और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी काफी रोचक स्टोरीज चर्चा में रही हैं। इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2000 में दैनिक जागरण में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर की। इसके बाद वर्ष 2002 से दिल्ली में पंजाब केसरी व दूसरे दैनिक समाचार पत्रों के अलावा वीकली मैग्जीन में क्राइम कवर किया। माया मैग्जीन के लिए भी लिखा है। इन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।और पढ़ें