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शिक्षक रवि कुमार ने लोकल 18 से कहा कि मेरा सपना बचपन से ही शिक्षक बनने का था. मैने बहुत ही विकट परिस्थितियों में अपनी शिक्षा पूरी की है. एक ही कमरे में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई को पूरा किया. मैं शिक्षक बनना चाहता था. मैने रेलवे में आवेदन किया. मेरा वहां पर सिलेक्शन हो गया. 4 साल मैंने वहां पर नौकरी की उसके बाद मैं शिक्षक बनने के लिए आवेदन किया.परीक्षा में पास हो गया.
जोश जज्बा और जुनून और संघर्ष सफलता दिलाता है इस बात बात को मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में रहने वाले रवि कुमार ने सार्थक कर दिखाया है. रवि कुमार कि जब माता की बचपन में मृत्यु हो गई पिता हवाई थे 2013 में उनका भी देहांत हो गया रवि केले हो गए उन्होंने एक ही किराए के कमरे में रहकर 7 साल तक पढ़ाई कंप्लीट की उसके बाद रेलवे की वैकेंसी भरी उनकी नौकरी लग गई. 4 साल तक उन्होंने नौकरी की उसके बाद उनको शिक्षक बनने का जुनून था. उन्होंने शिक्षक बनने के लिए भी एग्जाम दिया पहली ही बार में उनको सफलता मिली.
वह सरकारी शिक्षक बन गए 2023 में उन्होंने रेलवे की सरकारी नौकरी छोड़कर शिक्षक की नौकरी को अपनाया आज वह 4 साल से विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. उनका लक्ष्य विद्यार्थियों को ऊंचाइयों तक ले जाना है. उन्होंने इसके लिए एक ऐसी स्कूल का चयन किया है जहां का रिजल्ट जिले में सबसे कम होता था. उनके पद स्थापना के बाद से इस स्कूल का रिजल्ट हंड्रेड प्रतिशत हो गया है जिले में यह स्कूल टॉप पर आती है.
शिक्षक ने दी जानकारी
शिक्षक रवि कुमार ने लोकल 18 से कहा कि मेरा सपना बचपन से ही शिक्षक बनने का था. मैने बहुत ही विकट परिस्थितियों में अपनी शिक्षा पूरी की है. एक ही कमरे में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई को पूरा किया. मैं शिक्षक बनना चाहता था. मैने रेलवे में आवेदन किया. मेरा वहां पर सिलेक्शन हो गया. 4 साल मैंने वहां पर नौकरी की उसके बाद मैं शिक्षक बनने के लिए आवेदन किया.परीक्षा में पास हो गया. मैंने रेलवे की नौकरी छोड़कर शिक्षक की नौकरी को अपनाया. मैं 4 सालों से शिक्षक बनकर विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करवा रहा हूं. मेरा लक्ष्य विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा ग्रहण कराना है.
कमजोर स्कूलों का करता हूं चयन
शिक्षक का कहना है कि मेरी सबसे पहले पोस्टिंग मैने ऐसी जिले की कमजोरी स्कूल को चुना जहां का रिजल्ट जीरो था. वहां पर मैंने जैसे ही पदस्थ हुआ मैंने विद्यार्थियों से संपर्क करना शुरू किया. परिवार का हिस्सा बनकर उनको शिक्षा ग्रहण कराई आज उस स्कूल का रिजल्ट हंड्रेड प्रतिशत जिले में रहा है. इस काम के लिए मुझे जिला प्रशासन भी सम्मानित कर चुका है शिक्षा विभाग ने भी मेरी प्रशंसा की है.