शेयर बाजार का नया नियम: 3:15 बजे के बाद कैसे करें ट्रेड? CAS सेशन में मुनाफे का सही तरीका | Closing Auction Session (CAS) Trading Guide 2026: How To Trade Stocks After 3:15 PM In India


शेयर बाजार का नया नियम: 3:15 बजे के बाद कैसे करें ट्रेड? CAS सेशन में मुनाफे का सही तरीका

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को भारत के नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) का पहला नॉन-एक्सपायरी दिन है। गुरुवार को एक्सपायरी के दौरान बाजार में रही हलचल के बाद, आज ट्रेडर्स को मार्केट की चाल समझने का एकदम साफ मौका मिलेगा। सेबी (SEBI) के 16 जनवरी वाले सर्कुलर के तहत 3 अगस्त से F&O में शामिल कैश स्टॉक्स के लिए CAS लागू किया गया था। वहीं क्लोजिंग टाइम को सिंक में लाने के लिए एनएसई (NSE) ने इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का समय बढ़ाकर दोपहर 3:40 बजे तक कर दिया था।

अब सारा खेल टाइमिंग और सही एग्जीक्यूशन का है। जिन कैश शेयर्स में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग होती है, उनमें नॉर्मल यानी कंटीन्यूअस ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे रुक जाती है। 3:15 से 3:20 के बीच एक्सचेंज एक रेफरेंस प्राइस जारी करता है। फिर 3:20 से 3:25 के बीच मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर दिए जा सकते हैं। इसके बाद 3:25 से लेकर किसी भी रैंडम टाइम (3:28 से 3:30) तक सिर्फ लिमिट ऑर्डर ही मान्य रहते हैं। ऑर्डर्स की मैचिंग और जानकारी 3:35 तक चलती है, जबकि डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग दोपहर 3:40 बजे तक जारी रहती है।

Closing Auction Session (CAS) Trading Guide 2026: How to Trade Stocks After 3:15 PM in India

CAS: आखिरी 30 मिनट में कैसे करें ट्रेड

चरण समय ऑर्डर की एंट्री
ट्रांजिशन 3:15–3:20 कोई नया ऑर्डर नहीं लिया जाएगा; ऑर्डर रिजेक्ट हो जाएंगे
ओपन एंट्री 3:20–3:25 मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर मान्य हैं
लिमिट‑ओनली 3:25–रैंडम 3:28–3:30 सिर्फ लिमिट ऑर्डर लागू होंगे; मार्केट ऑर्डर में बदलाव बंद
मैचिंग/प्रिंट 3:35 तक कोई नया ऑर्डर नहीं; ऑक्शन प्रोसेस पूरा होता है
फ्यूचर्स/ऑप्शंस 3:15–3:40 ट्रेडिंग जारी रहेगी; स्टॉक फ्यूचर्स ±3% स्टैटिक बैंड में रहेंगे

समय की प्राथमिकता (टाइम प्रायोरिटी) पाने के लिए दोपहर 3:15 बजे से पहले ही अपने सही लिमिट ऑर्डर लगा लें। मार्केट ऑर्डर का इस्तेमाल केवल 3:20 से 3:25 के बीच करें और उसके बाद पैसिव लिमिट ऑर्डर पर आ जाएं। ध्यान रखें कि स्टॉप-लॉस और आइसबर्ग ऑर्डर CAS सेशन में आगे कैरी फॉरवर्ड नहीं होते। इसके अलावा Market-on-Close और Limit-on-Close ऑर्डर भी मान्य नहीं हैं। स्टॉक फ्यूचर्स दोपहर 3:40 बजे तक ±3% के स्टैटिक बैंड में ट्रेड करते हैं, इसलिए अपने ऑर्डर का साइज इसी दायरे में रखें ताकि स्लिपेज से बचा जा सके।

ज्यादा लिक्विडिटी वाले F&O शेयर्स: Reliance, HDFC Bank, ICICI Bank, Infosys, TCS

इंडेक्स में इन पांचों शेयरों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। इनमें भारी इंस्टीट्यूशनल फ्लो रहता है और स्प्रेड भी काफी कम होता है। जब CAS रैंडम तरीके से बंद होकर कोई एक फाइनल क्लोजिंग प्राइस तय करता है, तो इस गहराई का बहुत बड़ा फायदा मिलता है। लिक्विडिटी वाले बड़े शेयरों पर फोकस करने से लिमिट-ओनली विंडो के दौरान ऑर्डर रिजेक्ट होने या नुकसान वाले सौदे का जोखिम कम हो जाता है। खासतौर पर उन छोटे ट्रेडर्स के लिए यह रणनीति बेहद काम की है, जो अनुशासन के साथ पैसिव एंट्री करते हैं। बता दें कि CAS का यह नियम F&O वाले सभी कैश शेयरों पर लागू होता है।

दोपहर 3:10 और 3:40 बजे के खास अपडेट्स

दोपहर 3:10 बजे (IST): डेरिवेटिव क्लोजिंग प्राइस के लिए VWAP विंडो शुरू हो जाती है। ऐसे में कैश रेफरेंस प्राइस के मुकाबले फ्यूचर्स को समझें और कम वॉल्यूम वाले टिक्स के पीछे भागने से बचें। दोपहर 3:40 बजे (IST): डेरिवेटिव मार्केट बंद हो जाता है; इसके बाद CAS क्लोजिंग प्राइस को फ्यूचर्स सेटलमेंट और ब्रोकर के ऑटो स्क्वायर-ऑफ मैसेज के साथ रिकॉन्साइल (मिला) लें। एनएसई के मुताबिक, क्लोजिंग VWAP अब दोपहर 3:10 से 3:40 के बीच आंका जाता है, यानी आपके ट्रेड का पूरा एग्जीक्यूशन इसी आधे घंटे पर निर्भर करता है।

आज के इस पहले नॉन-एक्सपायरी CAS को एक प्रैक्टिस ड्रिल की तरह ही देखें। लिमिट ऑर्डर्स को पहली प्राथमिकता दें, सही टाइम-विंडो का ध्यान रखें और अपनी पोजीशन का साइज सीमित रखें। क्लोजिंग प्रिंट के आधार पर तुरंत कोई कॉल या टारगेट न तय करें। ब्रोकर की ओर से मिलने वाले समय और कटऑफ के निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहता है, इसलिए केवल उन्हीं चीजों में ट्रेड करें जिन्हें आप अच्छी तरह समझते हैं। शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग जोखिमों के अधीन है; सभी दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें।



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