शेयर बाजार में पहली बार गैस का खेल, निवेशकों को मिलेगा कमाई का नया मौका


नई दिल्ली. भारत का गैस बाजार अब एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है. इंडियन गैस एक्सचेंज यानी आईजीएक्स आईपीओ लाने की तैयारी में है. अगर यह योजना तय समय पर पूरी होती है, तो आईजीएक्स देश का पहला लिस्टेड गैस एक्सचेंज बन जाएगा. इससे भारत के ऊर्जा बाजार को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इंडियन गैस एक्सचेंज भारत का संगठित गैस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है. यहां नेचुरल गैस की खरीद बिक्री पारदर्शी तरीके से होती है. कंपनी का बिजनेस सिर्फ कागजी सौदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां वास्तविक गैस की डिलीवरी भी होती है. यही वजह है कि इसे फिजिकल डिलीवरी आधारित एक्सचेंज कहा जाता है.

जिस तरह इंडियन एनर्जी एक्सचेंज यानी आईईएक्स ने बिजली ट्रेडिंग में अपनी अलग पहचान बनाई, उसी तरह आईजीएक्स गैस ट्रेडिंग के क्षेत्र में अपनी जगह बना चुका है. अब शेयर बाजार में लिस्ट होकर यह अपनी यात्रा का नया अध्याय शुरू करना चाहता है.

आईपीओ में नहीं आएगा नया पैसा

आईजीएक्स का आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस पर आधारित होगा. इसका मतलब है कि कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी और न ही इस इश्यू के जरिए नया फंड जुटाएगी. इस आईपीओ में कुल 1.67 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे. ये शेयर कंपनी की प्रमोटर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज यानी आईईएक्स बेचेगी. ऐसे में आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम आईईएक्स को जाएगी, जबकि आईजीएक्स के पास सीधे कोई नया पूंजी निवेश नहीं पहुंचेगा.

कौन किसके पास है कितनी हिस्सेदारी

आईजीएक्स की शेयरहोल्डिंग भी इसकी मजबूती दिखाती है. कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी प्रमोटर आईईएक्स के पास 47.28 फीसदी है. इसके अलावा एनएसई इन्वेस्टमेंट्स के पास 24.75 फीसदी हिस्सेदारी है. अन्य बड़े निवेशकों में ओएनजीसी, गेल इंडिया, टॉरेंट गैस, अडानी टोटल गैस, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और आईजीएक्स आईएसओएस ट्रस्ट शामिल हैं. यानी देश की कई बड़ी ऊर्जा कंपनियां इस प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं.

तेजी से बढ़ रहा है कारोबार

आईजीएक्स का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का ट्रेडिंग वॉल्यूम 40.84 मिलियन एमएमबीटीयू था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 76.79 मिलियन एमएमबीटीयू पहुंच गया. दो साल में यह लगभग 37.12 फीसदी की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट को दिखाता है. कंपनी की कमाई भी लगातार बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2025 में आईजीएक्स का रेवेन्यू 48.8 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 61 करोड़ रुपये हो गया. यानी एक साल में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इसी अवधि में नेट प्रॉफिट 30.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 42 करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी मुनाफे में करीब 36.5 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई.

कैसे काम करता है गैस एक्सचेंज

आईजीएक्स पर अलग-अलग अवधि के गैस कॉन्ट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग होती है. इसमें इंट्राडे, डे अहेड और डेली कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ साथ छह महीने तक के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स भी उपलब्ध हैं. इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां खरीदी गई गैस की वास्तविक डिलीवरी सुनिश्चित की जाती है. इससे खरीदार और विक्रेता दोनों को पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था मिलती है.

सरकार के बड़े लक्ष्य में भी अहम भूमिका

भारत सरकार लंबे समय से देश के एनर्जी मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है. फिलहाल देश की कुल एनर्जी खपत में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी करीब 6 फीसदी है. सरकार इसे बढ़ाकर 15 फीसदी तक ले जाना चाहती है. इस लक्ष्य को हासिल करने में आईजीएक्स जैसे प्लेटफॉर्म की अहम भूमिका मानी जा रही है, क्योंकि संगठित गैस ट्रेडिंग से कीमतों में पारदर्शिता आती है और बाजार का दायरा बढ़ता है.

क्यों रहेगा आईपीओ पर बाजार की नजर

आईजीएक्स देश का एकमात्र राष्ट्रीय गैस एक्सचेंज है और इसके पीछे आईईएक्स समेत कई बड़ी ऊर्जा कंपनियों का समर्थन है. मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, बढ़ता ट्रेडिंग वॉल्यूम और गैस बाजार की लंबी अवधि की संभावनाएं इस आईपीओ को निवेशकों के लिए खास बनाती हैं. इस इश्यू के मर्चेंट बैंकर एक्सिस कैपिटल और मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स हैं. बाजार की नजर अब इस बात पर रहेगी कि देश का पहला लिस्टेड गैस एक्सचेंज निवेशकों से कैसी प्रतिक्रिया हासिल करता है और भारत के ऊर्जा बाजार की इस नई कहानी को कितना समर्थन मिलता है.



Leave a Comment