शेयर बाजार में 3:30 बजे का खेल: सेबी ने पकड़ी क्लोजिंग ऑक्शन में गड़बड़ी, निवेशकों के लिए क्या है खतरा? | SEBI Closing Auction Session CAS Irregularities: Impact On Sensex Expiry And Mutual Fund NAV Explained


शेयर बाजार में 3:30 बजे का खेल: सेबी ने पकड़ी क्लोजिंग ऑक्शन में गड़बड़ी, निवेशकों के लिए क्या है खतरा?

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने 19 अगस्त 2026 को नए शुरू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अपना पहला अंतरिम आदेश जारी किया है। यह मामला 13 अगस्त को सेंसक्स की वीकली एक्सपायरी से जुड़ा है। यह मुद्दा इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इसी ऑक्शन के जरिए शेयरों का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय होता है, जिसका इस्तेमाल म्यूचुअल फंड्स की NAV और ऑप्शंस सेटलमेंट में किया जाता है। दोपहर 3:15 से 3:35 बजे के बीच बाजार में क्या होता है, इसे समझना अब रिटेल निवेशकों के लिए सीधे काम की बात है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत दोपहर 3:15 बजे होती है, जब F&O में शामिल शेयरों की नियमित ट्रेडिंग रोक दी जाती है। 3:15 से 3:20 बजे के बीच एक रेफरेंस प्राइस बनता है, जिसके बाद करीब 3:30 बजे तक रैंडम क्लोज्ड कॉल ऑक्शन चलता है। इसके बाद तय होने वाला सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस ही शेयर का ऑफिशियल क्लोजिंग भाव माना जाता है, जिसने पिछले 30 मिनट के VWAP तरीके को बदल दिया है। वहीं, इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग अब दोपहर 3:40 बजे तक चलती रहती है।

SEBI Closing Auction Session CAS Irregularities: Impact on Sensex Expiry and Mutual Fund NAV Explained

सेबी का अंतरिम आदेश और क्लोजिंग ऑक्शन में गड़बड़ी का आरोप

सेबी के आदेश के मुताबिक, दो संस्थाओं ने सेंसक्स की कई कंपनियों में एक्सट्रीम प्राइस बैंड पर आक्रामक बाय और सेल ऑर्डर डाले। इसके चलते ऑक्शन के दौरान इंडेक्स में तीन बार बड़ा उछाल देखने को मिला और कुछ ही सेकंड के भीतर ज्यादातर ऑर्डर्स कैंसिल कर दिए गए। सेबी ने इन कैश ऑर्डर्स को एक्सपायरी के दिन की डेरिवेटिव्स पोजीशन से जोड़ा है, जिससे करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाने का अनुमान है। फिलहाल ये निर्देश अंतरिम हैं और आगे की कार्रवाई के अधीन हैं।

CAS टाइमिंग, NAV और इंडेक्स एक्सपायरी: जानिए 3:30 बजे क्या-क्या सेटल होता है

म्यूचुअल फंड्स दिन के अंत में नेट एसेट वैल्यू (NAV) निकालने के लिए अपने पोर्टफोलियो को क्लोजिंग प्राइस पर मार्क करते हैं, इसलिए ऑक्शन से तय क्लोजिंग भाव ही NAV का आधार बनता है। इसी तरह, इंडेक्स ऑप्शंस का सेटलमेंट भी इंडेक्स के ऑफिशियल क्लोजिंग लेवल पर होता है। BSE पर सेंसक्स वीकली ऑप्शंस की एक्सपायरी फिलहाल गुरुवार को होती है, जिससे एक्सपायरी के दिन ऑक्शन से निकला क्लोजिंग प्राइस बेहद निर्णायक हो जाता है। अपने इंडेक्स से जुड़े सेटलमेंट नियमों पर नजर रखें।

कॉर्पस ग्रोथ (₹1 लाख, सालाना कंपाउंडिंग) 5 साल 10 साल 15 साल
सामान्य बैंक FD ~6.5% ₹1.37 लाख ₹1.87 लाख ₹2.56 लाख
निफ्टी 50 TRI (उदाहरण) ~12% ₹1.76 लाख ₹3.11 लाख ₹5.47 लाख

दोपहर 3:15–3:35 बजे के बीच क्या करें और क्या न करें, और SIP/STP पर असर

CAS वाले शेयरों में ट्रेड करते समय मार्केट ऑर्डर के बजाय लिमिट ऑर्डर का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि चौड़े प्राइस बैंड और कम लिक्विडिटी से आपका एग्जीक्यूशन बिगड़ सकता है। ऑर्डर डालने या तेजी का पीछा करने से पहले अपने ऐप में इंडिकेटिव प्राइस, ऑर्डर इमबैलेंस और संभावित मैच क्वांटिटी जैसे ऑक्शन इंडिकेटर्स जरूर देखें। इंट्राडे प्रोडक्ट्स के बदले हुए ऑटो स्क्वायर-ऑफ टाइमिंग पर भी ध्यान दें। हालांकि, नियमित SIP, STP और SWP इंस्ट्रक्शंस पहले की तरह चलते रहेंगे और NAV क्लोजिंग प्राइस को ही दर्शाती रहेगी।



Leave a Comment