गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आर.वी.एस. मणि ने दावा किया है कि भारत आने वाले पाकिस्तानी क्रिकेटर और डेलिगेशन खुफिया तरीके से ड्रग्स की तस्करी करते थे। उन्होंने शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे नाम लेते हुए कहा कि कोच बॉब वूल्मर की संदिग्ध मौत इसी ड्रग्स सिंडिकेट का विरोध करने के कारण हुई थी।

भारत में ड्रग्स धकेलने का था गंदा धंधा
ANI के पॉडकास्ट में आर.वी.एस. मणि ने आरोप लगाया कि भारत दौरे पर आने वाले पाकिस्तानी डेलिगेशन, जिनमें पत्रकार और हाई-प्रोफाइल क्रिकेटर्स भी शामिल थे, भारत में ड्रग्स की तस्करी करते थे। उन्होंने साल 2006 के आसपास भारत आए SAFMA डेलिगेशन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में ड्रग्स धकेलना हमेशा से पाकिस्तान की आधिकारिक और सोची-समझी नीति का हिस्सा रहा है। क्रिकेट फैंस के लिए यह काफी हैरान करने वाला जरूर है, लेकिन चंद पैसों के लिए पाकिस्तान के खिलाड़ी पहले भी ऐसा करते रहे हैं।
शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ भी थे इस काले धंधे में शामिल
बातचीत के दौरान आरवीएस मणि ने सीधे तौर पर शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे मशहूर पाकिस्तानी तेज गेंदबाजों का नाम लिया। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामले सामने आए थे जहां इन क्रिकेटरों को खुद यह कबूल करने के बाद कि वे ड्रग्स ले जा रहे थे, जिसके बाद उन्हें पाकिस्तानी हाई कमिशन द्वारा वापस भेज दिया गया था। हालांकि, उस समय इसे निजी इस्तेमाल का नाम देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई थी, लेकिन मणि के अनुसार यह केवल एक बहाना था। उन्होंने आगे कहा कि सलीम मलिक और शाहिद अफरीदी जैसे अन्य हाई-प्रोफाइल खिलाड़ी भी इस तरह की गतिविधियों से जुड़े थे।
कोच बॉब वूल्मर की हत्या के पीछे भी था ड्रग तस्करी का एंगल
इस बातचीत में सबसे हैरान करने वाला दावा पाकिस्तान टीम के तत्कालीन कोच बॉब वूल्मर की मौत को लेकर किया गया। पूर्व सरकारी अधिकारी ने संकेत दिया कि इंग्लिश कोच बॉब वूल्मर ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों द्वारा की जा रही इस ड्रग तस्करी का कड़ा विरोध किया था, जिसके ठीक बाद मार्च 2007 में वेस्टइंडीज में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी। मणि ने कहा कि यदि इन सभी कड़ियों को आपस में जोड़ा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि ड्रग रैकेट का विरोध करने के कारण ही वूल्मर को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
ड्रग्स के पैसे से भारत में फैलाया जाता था आतंकवाद
आरवीएस मणि ने रक्षा खुफिया एजेंसी के तत्कालीन अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि उस दौर में भारत में होने वाले लगभग 30 प्रतिशत आतंकी हमलों की फंडिंग सीधे तौर पर इसी ड्रग ट्रैफिकिंग के जरिए होती थी। उन्होंने खुफिया अधिकारियों के काम करने के तरीके को साझा करते हुए बताया कि वे अफगानिस्तान के जलालबाद में अफीम की बंपर पैदावार के आंकड़ों को देखकर भारत में होने वाले संभावित आतंकी हमलों का पूर्वानुमान लगाते थे। उनके अनुसार, ड्रग्स के जरिए भारतीय युवाओं को बर्बाद करना और उसी पैसे से भारत में आतंकवाद फैलाना पाकिस्तान की घिनौनी और तय रणनीति रही है।
