संसद के मॉनसून सत्र में सरकार फिर पेश कर सकती है डिलिमिटेशन बिल, NDA जुटा रहा नंबर, विपक्ष अलर्ट – delimitation bill parliament monsoon session government may bring constitution amendment


संसद के मॉनसून सत्र के एजेंडे में डिलिमिटेशन बिल भले शामिल नहीं है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे पेश करने की तैयारी में है और एनडीए जरूरी समर्थन जुटाने में लगा है। वहीं, संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत को देखते हुए विपक्ष भी पूरी तरह सतर्क है।

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संसद के मॉनसून सत्र में सरकार फिर से डिलिमिटेशन बिल पेश कर सकती है
नई दिल्ली: सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र के लिए सरकार ने जो टेंटेटिव अजेंडा जारी किया है उसमें भले ही डिलिमिटेशन बिल नहीं है लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार मॉनसून सत्र में डिलिमिटेशन बिल ला सकती है। इसके लिए एनडीए के बड़े नेता नंबर जुटाने की कोशिश में लगे हैं। दूसरी तरफ विपक्ष भी पूरी तरह सतर्क है। सरकार के पास अभी बिल को पास कराने के लिए जरूरी नंबर नहीं हैं। डिलिमिटेशन से जुड़ा प्रस्ताव संविधान संशोधन का मामला है। ऐसे किसी भी बिल को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों की जरूरत होती है।

अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया था लेकिन उसे जरूरी दो तिहाई समर्थन नहीं मिल पाया। इसके बाद सरकार ने उससे जुड़े डिलिमिटेशन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया। अब मॉनसून सत्र में बदले राजनीतिक हालात के बीच सरकार नए सिरे से कोशिश कर सकती है।

  • सरकार इस बिल को लेकर कितना गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब एक महीने पहले एक सीनियर नेता ने ये कहा था कि अगर हमारे पास आज नंबर हो जाते हैं तो हम अगले हफ्ते ही स्पेशल सत्र बुलाकर बिल पास करवा लेंगे।
  • वैसे संसद में नंबर गेम कुछ बदला है। पिछले कुछ महीनों में विपक्षी दलों में लगातार टूट हुई। तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद एनडीए के साथ आ गए। इससे लोकसभा में सरकार का संख्या बल पहले से ज्यादा मजबूत हो गया। बीजेपी इंडिया गठबंधन के दलों से भी संपर्क बढ़ा रही है।

बदले समीकरणों पर बीजेपी की नजर

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक हालिया विधानसभा चुनावों के बाद जो राजनीतिक समीकरण बदले हैं उससे बीजेपी के लिए कई और दलों से भी बातचीत का रास्ता खुला है। एनसीपी (एसपी) के साथ ही डीएमके पर भी बीजेपी की नजर है। डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। डीएमके और कांग्रेस के बीच की दूरी के बीच बीजेपी को अपने लिए कुछ मौका दिख सकता है। बीजेपी के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पक्ष में वोट करने के अलावा वोटिंग से बाहर रहना भी समर्थन का एक तरीका हो सकता है।

पूनम पाण्डे

लेखक के बारे मेंपूनम पाण्डेपूनम पाण्डे नवभारत टाइम्स के नेशनल ब्यूरो में ब्यूरो चीफ हैं। बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राष्ट्रीय राजनीति के साथ ही इंडियन आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और रक्षा मामले कवर करती हैं। साल 2014 से देश की संसद भी कवर कर रही हैं। नवभारत टाइम्स से पहले सीएनबीसी आवाज और आजतक न्यूज चैनल में काम कर चुकी हैं। कुमांऊ यूनिवर्सिटी, नैनीताल से ऑर्गेनिक केमेस्ट्री में M.Sc करने के बाद IIMC (New Delhi Campus) से रेडियो-टीवी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में एमए किया। चेवनिंग फेलो (Chevening Fellow) हैं, जो यूके (United Kingdom) के फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डिवेलपमेंट ऑफिस (FCDO) की फेलोशिप है।और पढ़ें