सऊदी अरब में पढ़ाई, मार्कशीट पर ‘Result Later’ और सुप्रीम कोर्ट का नोटिस… जानिए क्यों मचा है CBSE के इस रिजल्ट पर बवाल! – cbse class 12 result dispute supreme court notice gulf student edmm


एक तरफ जहां देश के भीतर सीबीएसई (CBSE) री-इवैल्युएशन पोर्टल को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है, वहीं अब यह विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने खाड़ी देशों में पढ़ने वाले सीबीएसई कक्षा 12वीं के एक छात्र का परिणाम रोकने यानी वेबसाइट पर ‘रिजल्ट लेटर’ (Result Later – R.L.) दिखाए जाने के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है.

अदालत ने इस लापरवाही पर सीबीएसई को कड़ा नोटिस जारी करते हुए शुक्रवार तक जवाब तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को मौखिक रूप से सख्त निर्देश दिया है कि इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान हर हाल में शुक्रवार तक निकाला जाए.

क्या है पूरा मामला? क्यों लटक गया छात्र का रिजल्ट?
यह पूरा विवाद पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा हुआ है. तनाव और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सीबीएसई ने पश्चिम एशियाई/खाड़ी देशों के परीक्षा केंद्रों पर कक्षा 12वीं की कई परीक्षाएं रद्द कर दी थीं. इसके बाद, 27 मार्च को बोर्ड ने प्रभावित छात्रों के नुकसान की भरपाई के लिए एक ‘विशेष मूल्यांकन योजना’ लागू करने की घोषणा की थी, जिसके तहत छात्रों को नंबर दिए जाने थे.

फिर जब 13 मई को सीबीएसई ने 12वीं के मुख्य नतीजे घोषित किए, तो सऊदी अरब के अल जुबैल में रहकर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र प्रांशु जिगर कुमार पटेल के पैरों तले जमीन खिसक गई. बोर्ड ने उसकी मार्कशीट पर नंबर देने के बजाय ‘रिजल्ट लेटर’ (R.L.) लिख दिया.

यूनिवर्सिटी एडमिशन पर मंडराया खतरा
छात्र प्रांशु ने फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए कक्षा 12वीं की ‘इंप्रूवमेंट’ (सुधार) परीक्षा दी थी. परिणाम घोषित न किए जाने के कारण छात्र का भविष्य अधर में लटक गया है और अलग-अलग विश्वविद्यालयों में उसकी उच्च शिक्षा की प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई है.

छात्र के भविष्य को बर्बाद होने से बचाने के लिए वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रभावित छात्र की ओर से यह याचिका दायर की. मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ कर रही है. कोर्ट ने छात्र के करियर और समय के नुकसान को देखते हुए सीबीएसई के इस लचर रवैये पर सख्त नाराजगी जताई. अदालत ने साफ किया कि असेसमेंट स्कीम लागू होने के बावजूद परिणाम को इस तरह लटका कर नहीं रखा जा सकता. इस पर कोर्ट ने सीबीएसई को नोटिस जारी कर लिखित जवाब मांगा गया है.अदालत ने मौखिक रूप से कहा है कि शुक्रवार (12 जून) तक छात्र की समस्या को सुलझाया जाए. इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 12 जून 2026 (शुक्रवार) को ही निर्धारित की गई है.

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