उन्होंने बताया कि कैसे बिल्डरों- पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स और पार्श्वनाथ डेवलपर्स- ने फ्लैट देने में देरी के लिए मुआवजा देने के हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के आदेशों की खुलेआम अनदेखी की और गिरफ्तारी से बचते रहे। हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल लोकेश सिन्हल से बेंच ने पूछा कि जब बिल्डर इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा है, तो सरकार उसका बिल्डर लाइसेंस क्यों बढ़ा रही है।
सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने लगाई फटकार
CJI की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह सबसे बड़े धोखेबाज डेवलपर्स में से एक है, जिसने एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया है और घर खरीदने वालों को मझधार में छोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर-खरीदार समझौते के अनुसार फरवरी 2013 में पूरी तरह तैयार फ्लैट का कब्जा दिया जाना था, लेकिन प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ है, जिससे याचिकाकर्ताओं को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
‘पार्श्वनाथ डेवलपर्स की संपत्ति बेचने पर पूरी तरह रोक का आदेश’
सर्वोच्च कोर्ट ने कहा कि HRERA के कड़े आदेशों के बावजूद बिल्डर का कार्रवाई से बच निकलना पहली नजर में यह दिखाता है कि कलेक्टर और स्थानीय पुलिस या तो बिल्डर के साथ मिली हुई है या अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रही है। कोर्ट ने कहा कि बिल्डर से 1.8 करोड़ रुपये वसूलने का HRERA का आदेश लागू नहीं हुआ है और दंपत्ति को एक पैसा भी वापस नहीं मिला है।
बिल्डर और उनके अधिकारी कोर्ट में हों पेश: SC
बिल्डर और उनके मैनेजिंग अधिकारियों के खिलाफ 25,000 रुपये का जमानती वारंट जारी करते हुए बेंच ने चेतावनी दी कि अगर बिल्डर और उनके अधिकारी 20 जुलाई को कोर्ट के सामने पेश नहीं होते हैं, तो कोर्ट को उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बेंच ने डेवलपर की प्रॉपर्टी और प्रोजेक्ट्स पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर रोक लगाते हुए पार्श्वनाथ डेवलपर्स की संपत्तियों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया।
‘कंपनी के खाते , MD-डायरेक्टरों के पर्सनल अकाउंट फ्रीज करने का निर्देश’
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव, DGP, पुलिस कमिश्नर और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, संबंधित बैंकों को कंपनी के खातों के साथ-साथ MD और डायरेक्टरों के पर्सनल खातों को भी फ्रीज करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका दो दशकों का दर्दनाक इंतजार कब खत्म होगा।
उन्होंने बताया कि जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की बेंच ने 20 फरवरी को इन्हीं दो डेवलपर्स को गुड़गांव में ‘पार्श्वनाथ एक्सोटिका’ प्रोजेक्ट के लिए जरूरी ‘ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट’ हासिल करने, छह महीने के भीतर घर खरीदारों को कब्जा सौंपने और नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन की ओर से तय किया गया मुआवजा घर खरीदारों को देने का निर्देश दिया था।