जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये, मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक लेने के आरोप में आइआरबी-03, पिपरवार (चतरा) में तैनात हवलदार सुशील कुमार को चौका थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मामला सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर सुनियोजित ठगी का प्रतीत होता है। अतक की जांच में जेएसएससी या उसके किसी अधिकारी-कर्मचारी की संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला है।
चौका थाना क्षेत्र निवासी गुरु चरण साव की लिखित शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति स्वयं को जेएसएससी की पीजीटी भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बताते हुए उनकी भांजी की नौकरी पक्की कराने के एवज में मोटी रकम मांग रहा था। संदेह होने पर ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस जांच में आरोपित की पहचान हजारीबाग जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र के बनागढ़ा निवासी सुशील कुमार (40) के रूप में हुई। वह वर्तमान में आइआरबी-03, पिपरवार (चतरा) में हवलदार के पद पर प्रतिनियुक्त है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वह स्वयं जेएसएससी पीजीटी परीक्षा का अभ्यर्थी रह चुका है।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपित चयन सूची से अभ्यर्थियों का विवरण जुटाता था और आर्थिक रूप से सक्षम उम्मीदवारों से संपर्क करता था। वह जेएसएससी में बड़े लोगों तक पहुंच और प्रभाव का दावा कर नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। पहले अभ्यर्थियों का विश्वास जीतकर उनसे मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक अपने कब्जे में लेता, फिर नौकरी पक्की कराने के नाम पर लाखों रुपये की मांग करता था।
पुलिस ने आरोपित के पास से दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, जेएसएससी पीजीटी परीक्षा का एडमिट कार्ड, दो अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अभ्यर्थियों का कंप्यूटरीकृत डाटा, हाई कोर्ट के आदेश की प्रति, छह ब्लैंक चेक तथा एक बैग बरामद किया है। मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
निकाला जा रहा मोबाइल पर बातचीत का ब्यौरा
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपित संपर्क के प्रभाव के दम पर सरकारी नौकरी दिलाने का दावा करता था। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य संपर्कों की गहन जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह अकेले ठगी कर रहा था या किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।
बरामद मूल प्रमाणपत्र, ब्लैंक चेक और अन्य दस्तावेज इस आशंका को भी मजबूत करते हैं कि लंबे समय से बेरोजगार युवाओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो जाएगी।
अभ्यर्थियों से पुलिस की अपील
सरायकेला-खरसावां पुलिस ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये, मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र या ब्लैंक चेक मांगने वाले किसी भी व्यक्ति के झांसे में न आएं। सभी सरकारी नियुक्तियां निर्धारित और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत ही होती हैं। यदि कोई व्यक्ति नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे या दस्तावेज मांगता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें।