सरकारी नौकरी कौन छोड़ता है? NEET की तैयारी के लिए छोड़ी जॉब, लाई 603 मार्क्स, गांव में खोलना चाहती अस्पताल


Smritilekha NEET Success Story: आज के समय में सरकारी नौकरी को सबसे सुरक्षित करियर माना जाता है. देशभर में लाखों युवा एक सरकारी नौकरी पाने के लिए कई सालों तक मेहनत करते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने सपनों को किसी सरकारी नौकरी से भी बड़ा मानते हैं. पश्चिम बंगाल की रहने वाली स्मृतिलेखा ने भी एक ऐसा ही साहसी फैसला लिया. उन्होंने पोस्ट ऑफिस की सरकारी नौकरी छोड़ दी और डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए NEET की तैयारी शुरू कर दी. उनका यह फैसला चौंकाने वाला था, लेकिन अंतत: उनकी मेहनत रंग लाई और NEET UG 2026 में उन्होंने 720 में से 603 अंक हासिल किए.

छोटे से गांव से निकलकर पेश की बड़ी मिसाल

स्मृतिलेखा पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पाउशी गांव की रहने वाली हैं. वह एक साधारण से मिडिल क्लास परिवार से आती हैं. उनके पिता बिमल कुमार गिरी और मां रीता गिरी टीचर हैं. वहीं, उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई बंगाली मीडियम से की है. वह स्कूल के दिनों से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी थीं.

गांव की परेशानी देख डॉक्टर बनने की ठानी

दरअसल, स्मृतिलेखा जिस पाउशी गांव में रहती हैं, वह शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की काफी कमी है, जो एक बड़ी समस्या है. गांव में अस्पताल नहीं होने के कारण बीमार लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है. कई बार समय पर इलाज न मिलने से गंभीर स्थिति तक बन जाती है. गांव की यही परेशानी स्मृतिलेखा के मन में घर कर गई और यहीं से उन्हें डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली.

10वीं-12वीं में रही टॉप परफॉर्मर, फिर मिली सरकारी नौकरी

स्मृतिलेखा ने 10वीं में 94.4 प्रतिशत और 12वीं में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे. 12वीं में उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और बायोलॉजी जैसे कठिन विषय पढ़े. 12वीं के बाद पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें पोस्ट ऑफिस में केंद्रीय सरकारी नौकरी मिल गई. उनके परिवार के लिए यह काफी गर्व की बात थी, लेकिन उनका असली सपना डॉक्टर बनना था.

सिक्योर नौकरी छोड़कर चुना कठिन रास्ता

डॉक्टर बनने के लक्ष्य के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला किया. हालांकि, यह निर्णय आसान नहीं था. दो साल बाद फिर से पढ़ाई शुरू करना काफी चुनौतीपूर्ण था. कई लोगों ने उनके फैसले पर सवाल भी उठाए. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सिलीगुड़ी जाकर एक कोचिंग में NEET की तैयारी शुरू की.

दो बार क्रैक की NEET परीक्षा

लगातार मेहनत का असर उनके परिणाम में साफ दिखाई दिया. NEET 2025 में उनकी ऑल इंडिया रैंक 91,941 थी, लेकिन अगले ही साल उन्होंने शानदार सुधार किया. NEET UG 2026 में उन्हें 603 अंक मिले और AIR 9,065 हासिल हुई. यह सफलता उनकी लगन और आत्मविश्वास का प्रमाण है.

अब गांव में अस्पताल खोलने का है सपना

स्मृतिलेखा का लक्ष्य केवल डॉक्टर बनना नहीं है. वह अपने गांव में अस्पताल खोलकर लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना चाहती हैं. उनकी कहानी बताती है कि सच्चा सपना वही होता है जिसके लिए इंसान जोखिम उठाने को तैयार हो जाए. क्योंकि मेहनत, धैर्य और स्पष्ट लक्ष्य के साथ बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.



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