नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में लोअर डिवीजन क्लर्क के पदों पर हुई भर्ती परीक्षा में हाई-टेक तरीके से नकल कराने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मास्टरमाइंड समेत कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. दिलचस्प बात यह है कि इस हाई-टेक नकल सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि चंडीगढ़ में तैनात एक सरकारी फायरमैन है, जो साल 2022 से इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहा था.
छह रिक्तियों के लिए हुई थी परीक्षा, 200 से अधिक अभ्यर्थी थे शामिल
पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त हरेश्वर वी. स्वामी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गत 26 जुलाई को पुलिस को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित एलडीसी परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की शिकायत मिली थी. इस परीक्षा में महज छह रिक्त पदों के लिए 200 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे. परीक्षा के दौरान चौकस निगरानी के चलते परीक्षा केंद्र पर दो अभ्यर्थियों को नकल करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर स्थानीय थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर तुरंत जांच शुरू कर दी गई.
एसीपी राजौरी गार्डन के नेतृत्व में हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी राजौरी गार्डन की देखरेख में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया. तकनीकी सर्विलांस और जमीनी सुरागकशी के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाकर एक के बाद एक सात आरोपियों को धर दबोचा. जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंच गई और हरियाणा के चरखी दादरी से गिरोह के सरगना ‘सोनू’ को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की.
ऐसे काम करता था हाई-टेक नकल का यह जाल
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि मास्टरमाइंड सोनू ने नकल कराने का एक बेहद आधुनिक और शातिर तरीका निकाला था. वह परीक्षा हॉल में बैठने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने से पहले कस्टमाइज्ड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस उपलब्ध कराता था. इन गुप्त उपकरणों के जरिए परीक्षा हॉल से प्रश्न पत्र बाहर स्कैन होकर मास्टरमाइंड तक पहुंच जाता था. इसके बाद, बाहर बैठा गिरोह प्रश्नों को हल करता था और नैनो-इयरबड्स के माध्यम से उम्मीदवारों को कान के अंदर छिपे उपकरणों पर जवाबों की आंसर प्रसारित कर देता था. ये इयरबड्स जीएसएम आधारित छोटे उपकरणों और सिम कार्ड से जुड़े होते थे, जिससे पकड़े जाने की गुंजाइश बेहद कम हो जाती थी.
चंडीगढ़ में फायरमैन के पद पर है मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार मुख्य आरोपी सोनू खुद सरकारी सेवा में है. वह वर्ष 2022 से चंडीगढ़ में फायरमैन के पद पर कार्यरत है. सरकारी नौकरी में होने के बावजूद वह इस गैरकानूनी और आपराधिक गतिविधि में लिप्त था और बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ठग रहा था.
नौकरी के नाम पर वसूलता था 10 से 12 लाख रुपये
यह गिरोह बेहद महंगे दामों पर अपनी सेवाएं देता था. पुलिस के अनुसार, मास्टरमाइंड सोनू प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने और सरकारी नौकरी दिलाने के एवज में 10 लाख से 12 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूलता था. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने अभ्यर्थियों को इस तरह से पास कराया है और इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा 10 और 11 के तहत मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की शुचिता और पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. मामले में आगे की गहन छानबीन जारी है और अन्य संभावित गिरफ्तारियां भी जल्द हो सकती हैं.
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