
धर्मशास्त्रों में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना गया है इसलिए विवाह से पहले शुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूलता देखने की परंपरा बनी. इसका उद्देश्य दांपत्य जीवन को अधिक सुखद और संतुलित बनाना माना जाता है. लेकिन सिख धर्म अलग परंपरा को फॉलो करता है.

हिंदू धर्म में विवाह के लिए लोग अनेकों जगह कुंडली दिखाते हैं उसके बाद गुण मिलने पर ही रिश्ता आगे बढ़ाने पर जोर देते हैं. सिख परंपरा मानती है कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा केवल दूसरों का ही नहीं, बल्कि स्वयं का भी कल्याण करती है.
Published at : 05 Jun 2026 06:33 AM (IST)