SCVT प्रशिक्षितों का विरोध प्रदर्शन (ETV Bharat)
मंडी: हिमाचल प्रदेश में राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (SCVT) से प्रशिक्षित 5349 शारीरिक शिक्षकों (PET/PTI) का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. अपनी लंबित मांगों को लेकर ये पीटीआई प्रशिक्षित छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थियों ने सोमवार को सुंदरनगर स्थित पॉलीटेक्निक परिसर में चार दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू किया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा रहा है.
सीएम के आश्वासन के बाद भी बीच में लटकी फाइलें
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से कई बार मिल चुके हैं. उनका दावा है कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन इसके बावजूद संबंधित फाइलें आगे बढ़ने के बजाय विभागीय स्तर पर लंबित रह जाती हैं. उनका आरोप है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में ही उनकी फाइलें उलझ कर रह गई हैं, जिसके कारण हजारों प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.
“मैंने SCVT से 2005 में कोर्स किया है. उस समय कांग्रेस की सरकार थी. 2011 में भर्ती एवं पदोन्नति (R&P) नियमों में संशोधन करते हुए न्यूनतम योग्यता दो वर्षीय डिप्लोमा निर्धारित कर दी गई. इसके बाद एक वर्षीय डिप्लोमा धारक हजारों प्रशिक्षित अभ्यर्थी सरकारी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए. हम सीएम से भी इसको लेकर मिले, लेकिन हमें आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला है. हम चाहते हैं कि सरकार हमारे साथ न्याय करे.” – सनी, अभ्यर्थी
अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे SCVT प्रशिक्षित (ETV Bharat)
कर्ज लेकर-जमीन गिरवी रखकर ली ट्रेनिंग
पीटीआई प्रशिक्षित छात्रों के मुताबिक ये पूरा मामला साल 2005 से 2009 के बीच का है, जब हिमाचल प्रदेश सरकार और तकनीकी शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के जरिए मान्यता प्राप्त संस्थानों में एक वर्षीय पीईटी प्रशिक्षण कराया गया था. उस समय सरकार द्वारा जारी विवरणिका (Prospectus) और निर्धारित पात्रता के आधार पर हजारों युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया. इनमें अधिकांश अभ्यर्थी आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवारों से थे, जिन्होंने रोजगार की उम्मीद में कर्ज लेकर और कई मामलों में अपनी जमीन तक गिरवी रखकर प्रशिक्षण पूरा किया.
प्रदर्शनकारियों की सरकार को दो टूक चेतावनी
प्रदर्शनकारियों अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार के फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान उन युवाओं को हुआ है, जिन्होंने सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया था. अब कई अभ्यर्थी अधिकतम आयु सीमा के करीब पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ 45 आयु भी पार कर चुके हैं. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लिया और आर एंड पी नियमों में जरूरी संशोधन नहीं किया, तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभाग की होगी.
वहीं, प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी दीना देवी और विमला देवी ने कहा, “जब सरकार ने स्वयं हमें प्रशिक्षण दिलाया था, तो अब बदले हुए नियमों का हवाला देकर हमें रोजगार से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है. हम किसी तरह की रियायत नहीं, बल्कि अपने अधिकार और न्याय की मांग कर रहे हैं. शारीरिक शिक्षकों के 870 रिक्त पदों की भर्ती में आर एंड पी नियमों में जरूरी छूट प्रदान कर SCVT प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को भी शामिल किया जाए. इन पदों पर 50 प्रतिशत भर्ती आयोग के जरिए और 50 प्रतिशत बैचवाइज आधार पर SCVT अभ्यर्थियों को अवसर दिया जाए, ताकि सालों से लंबित हमारा भविष्य सुरक्षित हो सके.”