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Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार का भर्ती एवं सेवा शर्त अधिनियम-2024 सुप्रीम कोर्ट ने भी रद्द किया. इससे शिक्षकों व कर्मचारियों को वित्तीय लाभ, वरिष्ठता मिलेगी. सरकार को 4 महीने में आदेश लागू करने को कहा गया है. सुक्खू सरकार यह कानून लाई थी.
पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून को निरस्त कर दिया है.
शिमला. हिमाचल प्रदेश सरकार के भर्ती एवं सेवा शर्त अधिनियम-2024 को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सामने आया है. पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून को निरस्त कर दिया है. इस फैसले का स्वागत करते हुए हिमाचल प्रदेश महाविद्यालय शैक्षिक संघ (एचपीएमसीटीए) के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र एटलस ने सरकार से सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को चार महीने के भीतर पूरी तरह लागू करने की मांग की है.
हिमाचल प्रदेश महाविद्यालय शैक्षिक संघ (एचपीएमसीटीए) के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र एटलस ने बताया कि राज्य सरकार ने दिसंबर 2024 में भर्ती एवं सेवा शर्त अधिनियम-2024 लागू किया था. इस अधिनियम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद इस कानून को निरस्त कर दिया और अनुबंध अवधि के दौरान शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मिलने वाले सभी वित्तीय लाभ, वरिष्ठता तथा अन्य सेवा लाभ बहाल करने के निर्देश दिए थे.
- सुक्खू सरकार ने दिसंबर 2024 में विधानसभा में कानून पारित किया था और अनुबंध कर्मचारियों को नियमितीकरण की तिथि से पहले के सेवा लाभ और वरिष्ठता देने से इंकार कर दिया था.
- हिमाचल हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 को इस अधिनियम को खारिज कर दिया था. जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया. अब हजारों कर्मचारियों को उनकी ज्वॉइनिंग (अनुबंध) तिथि से वरिष्ठता, वित्तीय लाभ और पदोन्नति का हक मिलेगा.
- गौर रहे कि हिमाचल में दो साल का कॉन्ट्रेक्ट परियड होता है और फिर सरकारी कर्मचारी रेगुलर होते हैं. इस कानून की वजह से कर्मचारियों को काफी नुकसान हो रहा था.
उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने भी सरकार की अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा. इससे प्रदेश के शिक्षकों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है. देवेंद्र एटलस ने कहा कि इस फैसले के लागू होने से अनुबंध अवधि के वित्तीय लाभ मिलेंगे, लंबित विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) का रास्ता साफ होगा और वरिष्ठता से जुड़े लाभ भी बहाल होंगे. इसका लाभ केवल कॉलेज कैडर ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों के पात्र कर्मचारियों को भी मिलेगा.
उन्होंने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले को लागू करने के लिए चार महीने का समय मांगा है. उन्हें उम्मीद है कि सरकार न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए निर्धारित अवधि के भीतर सभी लाभ प्रदान करेगी. उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय पर निर्णय लागू करती है तो शिक्षक एवं कर्मचारी वर्ग उसका स्वागत करेगा. साथ ही उन्होंने सरकार से बिना किसी अनावश्यक देरी के आदेशों को पूरी तरह लागू करने का आग्रह किया.
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Vivek Kumar is a Senior Journalist with over 10 years of experience in the media industry. He is currently associated with News18 Hindi, where he covers local news from Haryana, Uttar Pradesh and Uttarakhand. H…
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