सेबी का बड़ा फैसला: एंजेल फंड्स के लिए डेडलाइन बढ़ी, अब 31 मार्च 2027 तक का मिला समय
मुंबई, 8 सितंबर 2026: बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एंजेल फंड्स के लिए एक्रिडिटेड इन्वेस्टर नियमों का पालन करने की समय सीमा बढ़ा दी है। अब नई डेडलाइन 31 मार्च 2027 तय की गई है। यह राहत उन एंजेल फंड्स को मिलेगी, जो 10 सितंबर 2025 या उससे पहले रजिस्टर्ड हुए थे। नए नियमों में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर इंडस्ट्री से मिले फीडबैक के बाद सेबी ने यह फैसला लिया है। इससे मौजूदा तिमाही में स्टार्टअप्स की फंडिंग और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के निवेश प्लान पर सीधा असर पड़ेगा। सेबी ने इस संबंध में 7 सितंबर 2026 को सर्कुलर जारी किया, जिससे मार्केट में अब आगे की स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।
हालांकि, सेबी ने मूल नियम में कोई ढील नहीं दी है। 10 सितंबर 2025 के बाद रजिस्टर्ड होने वाले एंजेल फंड्स में सिर्फ एक्रिडिटेड इन्वेस्टर ही पैसा लगा सकेंगे। वहीं, पुराने फंड्स को इस बदलाव के दौर में अधिकतम 200 नॉन-एक्रिडिटेड इन्वेस्टर्स को जोड़ने की छूट रहेगी। यह लिमिट और ढांचा सेबी के 2025 फ्रेमवर्क के तहत ही लागू रहेगा। डेडलाइन बढ़ने से सिर्फ समय मिला है, पात्रता की शर्तें या जरूरी डॉक्यूमेंटेशन की जिम्मेदारी नहीं बदली है। बता दें कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) फ्रेमवर्क और संबंधित सर्कुलर्स के जरिए ही एक्रिडिटेड इन्वेस्टर्स तय किए जाते हैं।

एंजेल फंड्स के लिए सेबी की डेडलाइन बढ़ी: जानें अब क्या-क्या बदलेगा
फंड मैनेजरों को बिना देर किए काम शुरू कर देना चाहिए। हर निवेशक के एक्रिडिटेशन की जांच करें और उसके प्रमाण अपने रिकॉर्ड में रखें। प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPM) को अपडेट करके दोबारा जमा करें। अपनी डील से जुड़ी जानकारियों को 200 निवेशकों की तय सीमा के हिसाब से सेट करें। जहां भी मुमकिन हो, PPM सीधे जमा करने के लिए ‘गरुड़’ (GARUDA) ग्रीन-चैनल का इस्तेमाल करें। इससे मर्चेंट बैंकर्स पर निर्भरता खत्म होगी और काम में तेजी आएगी। इसके साथ ही, निवेशकों की पात्रता से लेकर उनके फंड कमिटमेंट तक का पूरा सर्च-योग्य ऑडिट ट्रेल तैयार रखें।
| विवरण (Item) | दायरा / जरूरी कदम (Coverage / Action) |
|---|---|
| राहत के लिए पात्रता | 10 सितंबर 2025 या उससे पहले रजिस्टर्ड एंजेल फंड्स। |
| नई अनुपालन (कंप्लायंस) डेडलाइन | 31 मार्च 2027। |
| ट्रांजिशन की सीमा | बदलाव के दौरान अधिकतम 200 नॉन-एक्रिडिटेड निवेशकों को ही ऑफर दे सकते हैं। |
| तुरंत करने वाले काम | एक्रिडिटेशन प्रूफ जुटाना, PPM अपडेट/री-फाइल करना, निवेशक लिस्ट सही करना और सॉलिसिटेशन कंट्रोल। |
| बिना बदलाव वाले नियम | 10 सितंबर 2025 के बाद के रजिस्ट्रेशन सिर्फ AI के लिए हैं; बाकी एंजेल फंड नियम पहले जैसे ही रहेंगे। |
सेबी के इस फैसले का स्टार्टअप्स और HNIs पर क्या पड़ेगा असर
स्टार्टअप्स के लिए इस अतिरिक्त समय का मतलब है कि उन्हें तुरंत फंड का स्ट्रक्चर बदलने की हड़बड़ी नहीं होगी और तीसरी तिमाही (Q3) में डील्स की रफ्तार बनी रहेगी। नए कागजात तैयार करने के दबाव के बिना ज्यादा सिंडिकेट डील्स क्लोज हो सकेंगी। वहीं, बड़े निवेशकों (HNIs) के लिए एक्रिडिटेशन ही एंट्री पास रहेगा, लेकिन उन्हें ऑनबोर्ड करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी। फंड मैनेजर्स अब पहले नियमों के दायरे में आने वाले फॉलो-ऑन राउंड्स को प्राथमिकता देंगे और फिर बड़े फर्स्ट क्लोज की तैयारी करेंगे। पात्र स्कीम्स के लिए ‘गरुड़’ से कागजी कार्रवाई कम होगी, जिससे फंडिंग जुटाने में तेजी आएगी।
आगे की पूरी योजना अब दो तारीखों पर निर्भर करेगी। 10 सितंबर 2025 से यह तय होगा कि किसे राहत मिल रही है, जबकि 31 मार्च 2027 कंप्लायंस पूरा करने की आखिरी तारीख है। मैनेजर्स को निवेशकों के प्रूफ, PPM के नए वर्जन और इन्वेस्टर लिस्ट की हर तिमाही समीक्षा (क्वार्टरली चेक) का प्लान बनाना चाहिए। ध्यान दें कि यह जानकारी केवल रेगुलेटरी अपडेट के लिए है, इसे निवेश की सलाह न माना जाए।