सेबी का बड़ा फैसला: PMS और म्यूचुअल फंड नियमों में बदलाव, निवेशकों को क्या होगा फायदा?
24 सितंबर, 2026 को हुई सेबी (SEBI) बोर्ड की बैठक में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS), अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF), एक समान विज्ञापन कोड, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में विदेशी निवेशकों की एंट्री और REIT/InvIT फंड जुटाने को लेकर कई बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह समझना है कि कौन से नियम तुरंत लागू हो रहे हैं और कौन से विस्तृत सर्कुलर आने के बाद प्रभावी होंगे। आइए, बोर्ड के इन फैसलों को आसान भाषा में समझते हैं।
फिलहाल आपकी मौजूदा म्यूचुअल फंड SIP, NAV या पैसे निकालने (रिडेम्पशन) की समयसीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हाई-नेट-वर्थ (HNI) निवेशकों के लिए काम की बात यह है कि PMS का दायरा जरूर बढ़ाया जा रहा है, लेकिन क्लाइंट्स की ऑनबोर्डिंग, फीस और डिस्क्लोजर से जुड़े नए नियम औपचारिक नोटिफिकेशन के बाद ही लागू होंगे। किसी भी तरह का नया समझौता करने या एसेट एलोकेशन में बदलाव से पहले सेबी की प्रेस रिलीज 59/2026 और आने वाले सर्कुलर्स पर नजर जरूर रखें।

सेबी बोर्ड के फैसले: अभी क्या बदला और आगे क्या बदलेगा?
| क्षेत्र | अभी क्या स्थिति है | आगे क्या बदलेगा (सर्कुलर के बाद) |
|---|---|---|
| म्यूचुअल फंड/SIP | आम निवेशकों के लिए कामकाज में फिलहाल कोई बदलाव नहीं। | कॉमन ऐडवर्टाइजमेंट कोड आने से जोखिम की चेतावनी (रिस्क वॉर्निंग), क्रिएटिव्स और डिस्क्लोजर के नियम बदल सकते हैं। |
| PMS | मौजूदा पोर्टफोलियो में तुरंत कोई बदलाव नहीं। | PRIM रूट के तहत न्यूनतम ₹25 लाख का निवेश; IPO, विदेशी सिक्योरिटीज और सहमति के साथ चुनिंदा अनलिस्टेड डेट में निवेश के नए मौके। |
| कमोडिटीज, REITs/InvITs, AIFs | ट्रेडिंग और यूनिट्स में फिलहाल कोई बदलाव नहीं। | सुरक्षा मानकों के साथ नॉन-एग्री कमोडिटी डेरिवेटिव्स में FPI की एंट्री; REIT/InvIT यूनिट्स के लिए डिपॉजिटरी रिसीट्स (DR); AIF स्ट्रक्चर में निवेशक सुरक्षा से जुड़े नए बदलाव। |
PMS नियमों में सुधार, AIF में बदलाव और म्यूचुअल फंड ऐड कोड: निवेशकों के लिए खास बातें
सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के नियमों को काफी बेहतर बनाया है। म्यूचुअल फंड यूनिट्स में निवेश के लिए एक नया ‘PRIM’ (पोर्टफोलियो मैनेजर्स रूट) शुरू किया जाएगा। इसके जरिए PMS मैनेजर डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान में पैसा लगा सकेंगे, जिसके लिए न्यूनतम टिकट साइज ₹25 लाख तय किया गया है। इसके अलावा, PMS को IPO, प्राइमरी डेट और चुनिंदा विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत मिलेगी। साथ ही, क्लाइंट की सहमति से निवेश-ग्रेड वाले गैर-सूचीबद्ध कर्ज (इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट) में 10 प्रतिशत तक निवेश किया जा सकेगा।
बाजार में संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सेबी बोर्ड ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में कारोबार की अनुमति दे दी है, बशर्ते उन्हें डिलीवरी से पहले अपनी पोजीशन से बाहर निकलना होगा। इसके अलावा, सेबी से जुड़े सभी संस्थानों के लिए एक कॉमन ऐडवर्टाइजमेंट कोड लागू होगा। वहीं, इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स के साथ काम करने वाले रिसर्च एनालिस्टों के लिए कॉल रिकॉर्डिंग के नियमों में ढील दी गई है। फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने के मकसद से REITs और InvITs को डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी करने और कुछ मामलों में मतदान के लिए 75 प्रतिशत बहुमत का नियम लागू करने की अनुमति दी गई है।
अब आगे क्या करें: नियमों के लागू होने की तारीखों, खाके और सुरक्षा दिशा-निर्देशों वाले विस्तृत सर्कुलर का इंतजार करें। अगर आप PMS निवेशक हैं, तो जब आपका मैनेजर डॉक्युमेंट्स अपडेट करे, तब नए एग्रीमेंट और डिस्क्लोजर क्लॉज को ध्यान से पढ़ें। बाकी सभी निवेशक अपने AMC या ब्रोकर ऐप पर विज्ञापनों और प्रॉडक्ट नोट्स में होने वाले बदलावों पर नजर रखें। कोई भी फैसला लेने से पहले सेबी के आधिकारिक सर्कुलर की पुष्टि जरूर करें और जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं।