सैलरी का सही निवेश: FD, SIP या लिक्विड फंड्स—अगस्त 2026 में कहां मिलेगा ज्यादा मुनाफा?
महीने के आखिरी दिनों में मिली सैलरी और शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव—दोनों इस हफ्ते एक साथ सामने हैं। NSE में मंथली F&O एक्सपायरी अब गुरुवार की जगह महीने के आखिरी मंगलवार को होती है, जो इस बार 25 अगस्त 2026 को थी। एक्सपायरी के बाद भी बाजार में हलचल बनी हुई है और अब 28 अगस्त यानी शुक्रवार को कई कंपनियों की डिविडेंड रिकॉर्ड डेट भी है। ऐसे में अगर आप अपनी नई सैलरी निवेश करने की सोच रहे हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और लिक्विड फंड्स के बीच सही चुनाव करने के लिए सही टाइमिंग और अनुशासन बेहद जरूरी है।
इस हफ्ते निवेश करते समय दो बातें ध्यान में रखना आपके काम आ सकता है। पहला, इक्विटी में सारा पैसा एक साथ लगाने के बजाय टुकड़ों में (staggered buying) निवेश करें, ताकि बाजार की अस्थिरता का फायदा उठाया जा सके। दूसरा, अगर आपकी नजर शुक्रवार को मिलने वाले डिविडेंड पर है, तो भारत के T+1 नियम को ध्यान रखें। इसके तहत एक्स-डेट (ex-date) और रिकॉर्ड डेट आमतौर पर एक ही दिन होती हैं। यानी डिविडेंड पाने के लिए आज ही (27 अगस्त को बाजार बंद होने से पहले) आपके पोर्टफोलियो में शेयर होने चाहिए। सिर्फ डिविडेंड हासिल करने के लिए तब तक शेयर न खरीदें, जब तक टैक्स और बिड-आस्क स्प्रेड का हिसाब लगाने के बाद भी आपको मुनाफा न मिल रहा हो।

FD, SIP या लिक्विड फंड्स: जानिए आज की दरें और रिटर्न
बैंकों ने इस हफ्ते अपनी एफडी दरों में कुछ बदलाव किए हैं। एक्सिस बैंक (Axis Bank) आम नागरिकों को 1 साल की एफडी पर 6.25% और 18 से 24 महीने की अवधि पर 6.50% सालाना ब्याज दे रहा है। वहीं आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) आम नागरिकों को अधिकतम 6.60% और सीनियर सिटीजन्स को 7.20% तक का ब्याज दे रहा है। दूसरी तरफ, लिक्विड फंड्स का 1 साल का पिछला रिटर्न 6 से 7% के आसपास रहा है, जबकि ओवरनाइट फंड्स का रिटर्न 5.2 से 5.8% के बीच घूम रहा है।
| प्रोडक्ट | संभावित दर / रिटर्न | लिक्विडिटी (निकासी) | एग्जिट कॉस्ट (समय से पहले निकासी का चार्ज) |
|---|---|---|---|
| एक्सिस बैंक एफडी (1 साल) | 6.25% सालाना | कम (लॉक-इन अवधि) | प्री-मैच्योर पेनल्टी |
| एक्सिस बैंक एफडी (18–24 महीने) | 6.50% सालाना | कम | प्री-मैच्योर पेनल्टी |
| आईसीआईसीआई बैंक एफडी (आम नागरिकों के लिए अधिकतम) | 6.60% सालाना | कम | प्री-मैच्योर पेनल्टी |
| लिक्विड फंड्स | ~6.0–7.0% (1 साल) | ज्यादा (T+1) | 7 दिनों तक चरणबद्ध एग्जिट लोड |
| ओवरनाइट फंड्स | ~5.2–5.8% | बहुत ज्यादा (T+0) | कोई नहीं |
यह आंकड़े बैंकों के ताजा रेट कार्ड और म्यूचुअल फंड्स की हालिया फैक्टशीट पर आधारित हैं। ध्यान दें कि लिक्विड फंड्स से 7 दिनों के भीतर पैसे निकालने पर चरणबद्ध (graded) एग्जिट लोड लगता है, जबकि ओवरनाइट फंड्स में कोई एग्जिट लोड नहीं होता।
28 अगस्त को डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट: एक्स-डेट, टैक्स और T+1 नियम का गणित
T+1 सेटलमेंट व्यवस्था में स्टॉक एक्सचेंज एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट दोनों एक ही कारोबारी दिन तय करते हैं। इसलिए 28 अगस्त (शुक्रवार) के डिविडेंड का फायदा उठाने के लिए जरूरी है कि शेयर की खरीदारी आज (27 अगस्त) ही पूरी हो चुकी हो। डिविडेंड से होने वाली आय पर निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसके अलावा, तय सीमा से ज्यादा डिविडेंड मिलने पर पैन नियमों के अनुसार कंपनियां आमतौर पर 10% की दर से TDS भी काटती हैं।
1 से 6 महीने के लक्ष्य के लिए क्या चुनें: लिक्विड/ओवरनाइट फंड्स या रेकरिंग डिपॉजिट (RD)?
अगले 1 से 6 महीनों के भीतर आने वाले खर्चों के लिए पैसे का सही चुनाव करें। जिस पैसे की जरूरत आपको कभी भी पड़ सकती है, उसे ओवरनाइट फंड में रखें। वहीं, जिस रकम को आप कम से कम एक हफ्ते तक बिना छुए रख सकते हैं, उसके लिए लिक्विड फंड बेहतर है। ये दोनों ही फंड ट्रेजरी बिल्स और मनी मार्केट पेपर्स में निवेश करते हैं, लेकिन 7 दिन वाला एग्जिट लोड केवल लिक्विड फंड पर ही लागू होता है। दूसरी ओर, रेकरिंग डिपॉजिट (RD) लिक्विडिटी की कीमत पर निश्चित रिटर्न की गारंटी देता है। इसलिए Total Expense Ratio (TER) को घटाने के बाद ही दोनों के नेट रिटर्न की तुलना करें।
27–31 अगस्त की सैलरी के लिए रिस्क लेडर: कहां और कितना लगाएं पैसा?
इस हफ्ते अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को आसान रखें। सैलरी का 40–60% हिस्सा ओवरनाइट या लिक्विड फंड्स में रखें, ताकि जल्द आने वाले बिलों का भुगतान आसानी से हो सके। 20–30% रकम को तय खर्चों के लिए शॉर्ट-टर्म एफडी या आरडी (RD) में जमा करें। बाकी बची रकम को वीकली सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) या लिक्विड फंड्स से शॉर्ट-टर्म STP (सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान) के जरिए इक्विटी इंडेक्स फंड्स में लगाएं। एफडी कराने से पहले टीडीएस की लिमिट (आम नागरिकों के लिए ₹40,000 और सीनियर सिटीजन्स के लिए ₹50,000) को जरूर चेक कर लें।