जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा में हुए करीब 657 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव रिषी को मास्टरमाइंड बताया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपित बैंक अधिकारियों रिभव रिषी और रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार ने चार और लोगों के साथ मिलकर नकली डेबिट नोट और नकली साइन वाले चेक का इस्तेमाल किया।
साथ ही बिना किसी चेक के अनऑथराइज्ड डेबिट भी किए। ऐसे ट्रांजेक्शन बैंक के इंटरनल “मेकर-चेकर” वर्कफ्लो के जरिए मंजूरी दी गई।
बैंक अधिकारियों ने बैंकिंग सिस्टम को नकली इंस्ट्रूमेंट्स पर एक्शन लेने के लिए उकसाया। यहां तक कि सरकारी बैंक अकाउंट्स के ऑथराइज्ड साइनेटरीज के साथ कॉल कन्फर्मेशन भी एक मजाक निकला।
इसकी बैंकों ने कोई कॉल रिकॉर्डिंग नहीं की। फ्रॉड ट्रांजेक्शन को असली दिखाने के लिए आरोपित बैंक अधिकारियों ने नकली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें,बैंक अकाउंट स्टेटमेंट और इंटरेस्ट सर्टिफिकेट तैयार किए और उन्हें सरकारी डिपार्टमेंट्स को जमा कर दिया।
उन्होंने अकाउंट खोलने के फॉर्म और बैंकिंग रिकॉर्ड में बैंक अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल बदल दिए और बाद में उन्हें उन नंबरों से बदल दिया जिन्हें वे कंट्रोल और ऑपरेट करते थे।
सीबीआई के अनुसार 5 मई, 2025 को हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक अकाउंट से चेक नंबर 3 के जरिए 50 करोड़ रुपये डेबिट किए गए।
हालांकि, यह चेक एचपीजीसीएल ने कभी जारी नहीं किया था। मेकर अनुज कौशल और चेकर सीमा धीमान पर स्कैम का आरोप है, जबकि मास्टरमाइंड रिभव रिषी ने कॉल वेरिफिकेशन किया था। उन्होंने बिना चेक के फ्रॉड होने दिया। कॉल किसी और मकसद से की गई थी।
19 मई, 2025 को 5 करोड़ रुपये का एक और ट्रांसफर किया गया। बैंक वह चेक नंबर 9 नहीं दिखा सका जिसके आधार पर ट्रांजेक्शन किया गया था। चूंकि फंड बैंक के जनरल लेजर के ज़रिए ट्रांसफर किया गया था, इसलिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के सिस्टम में टेक्निकल खराबी के कारण ऑथराइज्ड सिग्नेटरी को कोई एसएमएस अलर्ट नहीं भेजा गया।
29 दिसंबर, 2025 को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट अकाउंट से चेक के जरिए 25 करोड़ रुपये डेबिट होने के मामले में बैंक के मोहाली ब्रांच मैनेजर, चरणजीत सिंह रंधावा ने कथित तौर पर घोटाले के एक और मास्टरमाइंड अभय कुमार के मोबाइल फोन से कॉल कन्फर्मेशन किया था। अभय कुमार ही चेक लाया था।
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रंधावा ने चेक की बॉडी भरी, जिसमें अमाउंट, तारीख और बेनिफिशियरी का नाम शामिल था। यह अमाउंट स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स को गया, जो आरोपियों द्वारा फंड निकालने के लिए बनाई गई एक फर्म थी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड में अभय कुमार और आईडीएफसी के सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर बलवंत सिंह, जिनका नंबर अकाउंट से लिंक था, के बीच किसी कॉल का कोई रिकॉर्ड नहीं था।
बलवंत सिंह ने बाद में आत्महत्या कर ली और एक सह-आरोपित पर आरोप लगाए। बैंक में हुए फ्राड का सीबीआई ने एक बड़ा उल्लेख करते हुए कहा कि 14 जनवरी 2026 को बैंक में हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के अकाउंट से 10 करोड़ रुपये का फ्रॉड डेबिट है।
इस मामले में आरोपित एरिया हेड शमीम डार ने कॉल कन्फर्म करने का दावा किया, लेकिन बैंक के एसओपी के अनुसार, ब्रांच ऑपरेशन स्टाफ मेंबर, जैसे ब्रांच मैनेजर, या मेकर या चेकर को कॉल करना चाहिए था। बैंक की टेक्निकल खराबी के कारण कोई एसएमएस अलर्ट नहीं आया। फिर इन फंडों को दो शेल एंटिटी में ट्रांसफर कर दिया गया।
हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अकाउंट के मामले में कई चेक-डेबिट नोट रिकॉर्ड में नहीं मिले। पंचकूला नगर निगम के बैंक अकाउंट से 22 फ्रॉड डेबिट ट्रांजेक्शन हुए थे। कोई एसएमएस नहीं आया न ही कोई कॉल कन्फर्मेशन हुआ।