जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। आयरलैंड में 0-2 और इंग्लैंड से 0-4 से सूपड़ा साफ होने के बाद भारत के टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि हम परिस्थितियों में सही ढंग से ढल नहीं पाए, इसलिए हम हारे, लेकिन इस शर्मनाक हार के लिए अय्यर के इस बयान को पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।
चार महीने पहले टी-20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीम मानी जा रही थी। गौतम गंभीर के मार्गदर्शन और नए कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में एक नए युग की शुरुआत की बातें हो रही थीं, लेकिन ब्रिटेन दौरे पर लगातार छह हार ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है।
यह सिर्फ सीरीज हार नहीं, बल्कि भारतीय टी-20 क्रिकेट की रणनीति, चयन और तैयारी की खामियों को उजागर करने वाला दौरा साबित हुआ।सबसे बड़ा सवाल टीम प्रबंधन के फैसलों पर खड़ा हुआ। विश्व कप जीतने वाली टीम की मजबूत नींव को अचानक हिला दिया गया। टी-20 विश्व कप जिताने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव और विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे संजू सैमसन को बाहर कर दिया गया।
लगातार बदलते टीम संयोजन ने खिलाड़ियों में असमंजस पैदा किया। न बल्लेबाज अपनी भूमिका समझ सके और न गेंदबाज अपनी जिम्मेदारी।आइपीएल में गेंदबाजों पर कहर बरपाने वाले बल्लेबाज इंग्लैंड की स्विंग और उछाल के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए। ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टी-20 मुकाबले में केवल 76 रन पर पूरी टीम का सिमटना भारतीय टी-20 इतिहास की सबसे शर्मनाक हार में दर्ज हो गया।
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पूरी सीरीज के दौरान बल्लेबाजों में धैर्य, तकनीक और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की समझ का पूरी तरह अभाव दिखा। ऐसा लगा जैसे आईपीएल की सपाट पिचों पर खेलने वाली यह टीम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की असली परीक्षा के लिए तैयार ही नहीं थी।
बल्लेबाजों ने तो नाक कटाई ही, साथ ही पूरी दौरे पर भारतीय गेंदबाज सही लेंथ खोजने के लिए संघर्ष करते रहे और बीच के ओवरों में लगातार रन लुटाते रहे। जोस बटलर जैसे बल्लेबाजों ने भारतीय आक्रमण को पूरी तरह बिखेर दिया। पावरप्ले में शुरुआती विकेट लेने में विफल ने हर मैच में इंग्लैंड को मजबूत शुरुआत दी, जिसके बाद भारत कभी मुकाबले में लौट ही नहीं पाया।
क्षेत्ररक्षण भी इस दौरे की सबसे बड़ी कमजोरियों में रहा। इंग्लैंड-आयरलैंड के विरुद्ध 11 आसान कैच छूटे, रन आउट के मौके गंवाए गए और 19 मिसफील्ड हुई। मैदान पर खिलाड़ियों की शारीरिक भाषा तक निराशाजनक रही। आधुनिक टी-20 क्रिकेट में जहां एक कैच या एक रन बचाना मैच का रुख बदल सकता है, वहीं भारत ने इस विभाग में लगातार रन लीक किए।
खली अनुभव की कमी
टीम को जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की कमी भी साफ खली। डेथ ओवरों में गेंदबाजी बिखरी हुई दिखी और कोई ऐसा खिलाड़ी नजर नहीं आया जो दबाव में मैच का रुख बदल सके। अर्शदीप सिंह डेथ ओवर में लगातार वाइड फेंककर बल्लेबाजों से दबाव हटाते दिखे। अनुभव और सामरिक अनुशासन की कमी हर मुकाबले में दिखाई दी।
भारत के लिए बड़ा सबक
यह दौरा भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा सबक है। आईपीएल में प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की सफलता दो अलग-अलग चीजें हैं। इंग्लैंड की परिस्थितियों ने बता दिया कि सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी या तेज स्कोरिंग से सफलता नहीं मिलती। तकनीक, धैर्य, परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता और स्पष्ट रणनीति भी उतनी ही जरूरी है।
एक गंभीर चेतावनी है
अब बीसीसीआई की समीक्षा बैठक में सिर्फ हार के कारण नहीं तलाशे जाएंगे, बल्कि यह भी तय करना होगा कि क्या भारतीय टी-20 टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है या फिर लगातार प्रयोगों और गलत फैसलों ने उसे उसकी मंजिल से भटका दिया है। इंग्लैंड में 0-4 की यह हार भारतीय क्रिकेट के लिए सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है।