शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर (ETV BHARAT)
नूरपुर: हिमाचल प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. प्रदेश के चयनित 150 सरकारी स्कूलों के लिए 3,500 से 4,000 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी. इन स्कूलों के लिए अलग शिक्षक कैडर बनाया जाएगा, ताकि अंग्रेजी माध्यम और सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके. शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने नूरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाना और छात्रों को निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
150 सरकारी स्कूलों के लिए होगा अलग शिक्षक कैडर
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन को देखते हुए पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू की है. इसके साथ ही चरणबद्ध तरीके से सीबीएसई पाठ्यक्रम भी लागू किया जा रहा है. पहले चरण में प्रदेश के 150 सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है. इन स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाने के लिए अलग शिक्षक कैडर बनाया जाएगा, जिसके तहत 3,500 से 4,000 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी. उन्होंने बताया कि पहले चरण में अंग्रेजी और गणित विषय के शिक्षकों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं, जबकि आगामी चरणों में टीजीटी, संस्कृत और कला अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर सरकार का फोकस
रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है. आजादी के समय प्रदेश की साक्षरता दर केवल 7 प्रतिशत थी, जबकि आज यह बढ़कर 99.30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि यह सभी सरकारों और शिक्षकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है. अब प्रदेश सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल साक्षरता बढ़ाना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है.
8,500 पद भरने का दावा
शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2021 के एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में शिक्षकों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश 21वें स्थान पर था. वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने के बाद टीजीटी, जेबीटी और सी एंड वी शिक्षकों के 4,000 से अधिक पद बैचवाइज आधार पर भरे हैं. इसके अलावा अब तक शिक्षा विभाग में लगभग 8,500 पदों पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं. उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों के कारण शिक्षा गुणवत्ता के मामले में हिमाचल अब देश में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है.
मेधावी छात्रों को मिलेगा विदेश जाने का अवसर
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार मेधावी विद्यार्थियों को विदेशों में एक्सपोजर विजिट पर भी भेज रही है. इसका उद्देश्य छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा व्यवस्था से परिचित कराना और उनके ज्ञान का दायरा बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों को नई तकनीकों और आधुनिक शिक्षण प्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा.
पेपर लीक पर जीरो टॉलरेंस की नीति
देशभर में सामने आए पेपर लीक मामलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल सरकार प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में शोषण, पक्षपात और अनियमितताओं के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए हाई पावर कमेटी बनाई है. उसकी सिफारिशों का अध्ययन करने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
वित्तीय चुनौतियों के बावजूद शिक्षा पर बड़ा निवेश
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आरडीजी ग्रांट और जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद होने तथा पुरानी पेंशन योजना लागू होने के कारण प्रदेश वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है. इसके बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शिक्षा विभाग के लिए 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है, जो राज्य के कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य पर कोई असर न पड़े.
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