हैदराबाद का वह ऐतिहासिक मैदान, जहां सचिन और द्रविड़ ने रचा था क्रिकेट इतिहास! आज भी हर भारतीय को है इस पर गर्व


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हैदराबाद का वह ऐतिहासिक मैदान, जहां सचिन और द्रविड़ ने रचा था क्रिकेट इतिहास!

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Fateh Maidan Hyderabad: हैदराबाद का ऐतिहासिक फ़तेह मैदान, जिसे आज लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम के नाम से जाना जाता है, भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय समेटे हुए है. इसी मैदान पर क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ ने अपनी यादगार पारियों और ऐतिहासिक साझेदारियों से प्रशंसकों का दिल जीता था. यह मैदान कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों, रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शनों और भारतीय क्रिकेट की सुनहरी यादों का साक्षी रहा है. वर्षों तक यह दक्षिण भारत के प्रमुख क्रिकेट केंद्रों में शामिल रहा और देश-विदेश के महान खिलाड़ियों ने यहां अपने खेल का जादू बिखेरा. आज भी यह मैदान केवल एक स्टेडियम नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की समृद्ध विरासत और गौरव का प्रतीक माना जाता है.

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हैदराबाद: हैदराबाद के केंद्र में स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम सिर्फ एक खेल का मैदान नहीं है बल्कि यह इस शहर की साढ़े तीन सौ साल पुरानी जीती-जागती विरासत का प्रतीक है. आज भले ही आधुनिक सुविधाओं से लैस उप्पल स्टेडियम में बड़े मैच होते हों, लेकिन हैदराबाद की ऐतिहासिक और खेल संस्कृति की जो बुनियाद इस मैदान ने रखी है उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.

इस मैदान का इतिहास लगभग 339 साल पुराना है और इसका सीधा संबंध मुग़ल काल से है. साल 1687 में जब मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने गोलकुंडा क़िले पर कब्ज़ा करने के लिए अपनी फौज भेजी, तब मुग़ल सेना ने इसी विशाल खुले मैदान में अपना मुख्य सैन्य शिविर स्थापित किया था. महीनों की घेराबंदी के बाद जब मुग़लों ने गोलकुंडा पर विजय प्राप्त की, तो इसी मैदान पर जीत का भव्य जश्न मनाया गया. इसी ऐतिहासिक घटना के कारण इस जगह का नाम फ़तेह मैदान पड़ा, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है जीत का मैदान.

घुड़सवारी और पोलो जैसे खेलों का लुत्फ उठाएं
मुग़लों के बाद जब हैदराबाद में आसफ़ जाही राजवंश यानी निज़ामों का दौर आया, तब इस मैदान का स्वरूप बदला. निज़ामों के शासनकाल में यह मैदान एक शाही पोलो ग्राउंड में तब्दील हो गया, जहाँ शाही परिवार और ऊंचे ओहदों के लोग घुड़सवारी और पोलो जैसे खेलों का लुत्फ उठाते थे.

1967 में इस ऐतिहासिक मैदान को एक नया नाम मिला
देश की आज़ादी के बाद, साल 1967 में इस ऐतिहासिक मैदान को एक नया नाम मिला. भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद उनके सम्मान में इस स्टेडियम का नाम बदलकर लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम कर दिया गया। यह स्टेडियम भारतीय क्रिकेट के सुनहरे दौर का गवाह रहा है। यहाँ 3 टेस्ट और 14 एक दिवसीय (ODI) अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले जा चुके हैं. इस मैदान के नाम एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है जो आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है. साल 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए एक वनडे मैच में सचिन तेंदुलकर नाबाद 186 रन और राहुल द्रविड़ ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 331 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की थी, जो उस समय विश्व रिकॉर्ड थी.

फ़तेह मैदान से लेकर एलबी शास्त्री स्टेडियम बनने का यह सफर हैदराबाद के बदलते इतिहास और खेल के प्रति उसकी दीवानगी की एक मुकम्मल कहानी बयां करता है.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें



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