होर्मुज से पायलट्स को Sea Drone से निकाल ले गया US! पहली बार किया इस्तेमाल – us navy first time use sea drone to rescue helicopter crew Saronic Corsair qualities ntc drmt


मिडिल ईस्ट के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना ने नया कारनामा अंजाम दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था. इसके बाद अमेरिकी नौसेना के एक एडवांस समुद्री ड्रोन ने मुस्तैदी दिखाते हुए थल सेना के दो हेलीकॉप्टर क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया.

अमेरिकी सेना के इतिहास में पहली बार किसी मानव रहित समुद्री जहाज का इस्तेमाल समुद्र में फंसे जवानों को बचाने के लिए किया गया है. अमेरिकी नौसेना ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया है, इसका नाम ‘सैरोनिक कॉर्सियर’ है.

ये ड्रोन लगभग 24 फीट (7.3 मीटर) लंबा एक ऑटोनॉमस समुद्री जहाज है. बता दें कि पेंटागन पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ मानव रहित ड्रोन के इस्तेमाल को लगातार बढ़ा रही है. ये ड्रोन उसी अमेरिकी मिशन का हिस्सा है.

‘टास्क फोर्स 59’ ने शुरू की थी तैनाती

अमेरिकी नौसेना ने साल 2021 में ‘टास्क फोर्स 59’ नाम की एक स्पेशल यूनिट बनाई थी. इसका मुख्यालय बहरीन में है. ये अमेरिकी नौसेना की पहली ऐसी यूनिट है जो पूरी तरह से मानव रहित प्रणालियों के लिए समर्पित है. इस टास्क फोर्स ने मार्च के आखिरी दिनों में मिडिल ईस्ट के समुद्री इलाके में इन कॉर्सियर ड्रोन्स को तैनात करना शुरू किया था.

अमेरिका समुद्र की सतह और पानी के भीतर, दोनों ही जगहों पर काम करने वाले ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है. इससे सैन्य कमांडरों को जरूरत के हिसाब से फैसले लेने की छूट मिलती है. पानी के अंदर काम करने वाले कई एडवांस ड्रोन सिस्टम को आज भी बेहद गुप्त रखा गया है. ये ड्रोन अमेरिकी सैनिकों के जोखिम को काफी कम कर देते हैं.

इन समुद्री ड्रोन्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से जासूसी, समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने और दुश्मन की हरकतों पर नजर रखने के लिए किया जाता है. अब इनमें से कुछ ड्रोन्स को युद्ध के लिए भी तैयार किया जा रहा है.

कम लागत और खतरों पर तुरंत एक्शन

पेंटागन इन ड्रोन्स पर इसलिए निवेश कर रहा है क्योंकि ये कम लागत में सेना की पहुंच को बढ़ाते हैं और खतरों पर तुरंत कार्रवाई करते हैं. नौसेना की योजना सैकड़ों और आने वाले समय में हजारों कॉर्सियर ड्रोन्स तैनात करने की है. हालांकि, ये तकनीक अभी विकसित हो रही है और इसे कई तकनीकी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है.

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यूक्रेन ने भी रूस के खिलाफ युद्ध में समुद्री ड्रोन्स का जबरदस्त इस्तेमाल करके इनकी ताकत को साबित किया है. यूक्रेन ने अमेरिकी सिस्टम न होने के बावजूद समुद्री ड्रोन से रूस के युद्धपोतों को डुबोया और यहां तक कि एक हेलीकॉप्टर को भी मार गिराया था.

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