₹100000 करोड़ का बजट, न अग्नि-5 और न ब्रह्मोस, फिर भी भारत बनेगा महाबली – indian navy rupees 100000 Project 15C destroyer 17B stealth frigates


Last Updated:

Indian Navy Defence Project: भारत मौजूदा सामरिक हालात को देखते हुए जमीन और आसमान से लेकर समंदर तक में अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने में जुटा है. पिछले कुछ सालों में इंडियन नेवी ने कई वॉरशिप को अपने बेड़े में शामिल किया है. अब नौसेना तकरीबन ₹100000 करोड़ की लागत वाली तीन परियोजनाओं को लॉन्‍च करने की तैयारी में जुटी है. इन डिफेंस प्रोजेक्‍ट के पूरा होने पर हिन्‍द महासागर से लेकर अरब सागर तक में भारत का इकबाल बुलंद होगा.

₹100000 करोड़ का बजट, न अग्नि-5 और न ब्रह्मोस, फिर भी भारत बनेगा महाबलीZoom

इंडियन नेवी 100000 करोड़ रुपये के वॉरशिप प्रोजेक्‍ट पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है. (इंडियन नेवी के फेसबुक अकाउंट से साभार)

Indian Navy Defence Project: ईरान जंग से पैदा हुए होर्मुज स्‍ट्रेट क्राइसिस के सामरिक और आर्थिक परिणामों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. इसके बाद दुनिया के तमाम देश समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने में जुट गए हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. इंडियन नेवी के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ हिन्‍द महासागर में चीन की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ अरब सागर में पाकिस्‍तान की मौजूदगी है. बांग्‍लादेश में सत्‍ता परिवर्तन के बाद अब बंगाल की खाड़ी भी केंद्र में आ गया है. लगातार बदलते सामरिक हालात में भारत के लिए समंदर में अपनी ताकत को बढ़ाना और समुद्री सीमाओं को अभेद्य किला बनाना जरूरी हो गया है. इसी को ध्‍यान में रखते हुए हजारों-लाखों करोड़ मूल्‍य की नौसैनिक परियोजनाओं को जमीन पर उतारा जा रहा है. इंडियन नेवी ने इसी क्रम में ₹100000 मूल्‍य के 3 डिफेंस प्रोजेक्‍ट को लॉन्‍च करने की योजना बना रही है. इन परियोजनाओं के तहत विभिन्‍न श्रेणियों के युद्धपोत डेवलप किए जाएंगे, जिससे मैरीटाइम सिक्‍योरिटी को मजबूती मिलेगी.

भारतीय नौसेना ने करीब एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली तीन बड़ी स्वदेशी युद्धपोत परियोजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है. इन योजनाओं के तहत प्रोजेक्ट 15C, प्रोजेक्ट 17B और प्रोजेक्ट 18A को आगे बढ़ाया जाएगा. यदि इन परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय नौसेना को 16 कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी वाले वॉरशिप मिलेंगे, जिससे हिन्‍द महासागर क्षेत्र (IOR) और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 3 परियोजनाएं फिलहाल रक्षा मंत्रालय और नौसेना के बीच प्रारंभिक विचार-विमर्श के चरण में हैं. इनके डिजाइन, लागत और तकनीकी आवश्यकताओं पर काम किया जा रहा है. इन परियोजनाओं को भारतीय नौसेना के लॉन्‍ग टर्म मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे पहले प्रोजेक्ट 15B डिस्‍ट्रॉयर और प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट को मंजूरी दी गई थी.

प्रोजेक्‍ट 15C: ₹50000 करोड़ लागत

सबसे बड़ी योजना प्रोजेक्ट 15C की है, जिसके तहत चार अगली पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर बनाए जाएंगे. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 50,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. रक्षा मंत्रालय अगले एक वर्ष के भीतर इसके लिए अनुरोध प्रस्ताव (RFP) जारी कर सकता है. इसके बाद डिजाइन को अंतिम रूप देने, अनुबंध प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं के पूरा होने के लगभग तीन वर्ष बाद निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है. प्रोजेक्ट 15C के युद्धपोत मौजूदा कोलकाता श्रेणी (प्रोजेक्ट 15A) और विशाखापत्तनम श्रेणी (प्रोजेक्ट 15B) के डिस्‍ट्रॉयर की तुलना में अधिक एडवांस होंगे. इनमें नई पीढ़ी के सेंसर, अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कॉम्‍बैट सिस्‍टम, आधुनिक एयर डिफेंस सिस्‍टम और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार शामिल किए जाने की संभावना है. साथ ही नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध क्षमता, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन और युद्ध के दौरान बेहतर परफॉर्मेंस पर विशेष ध्‍यान दिया जाएगा.

प्रोजेक्ट 17B: ₹40000 अनुमानित खर्च

दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना प्रोजेक्ट 17B है, जिसके तहत छह नई स्टील्थ फ्रिगेट तैयार की जाएंगी. इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत लगभग 40,000 करोड़ रुपये होगी. नौसेना की योजना इन जहाजों का निर्माण दो प्रमुख सरकारी शिपयार्डों के बीच बांटने की है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) को तीन-तीन युद्धपोत बनाने की जिम्मेदारी मिल सकती है. प्रोजेक्ट 17B के लिए अगले करीब 18 महीनों में RFP जारी होने की संभावना है. सभी सरकारी स्वीकृतियां और खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग चार वर्ष में निर्माण शुरू हो सकता है. यह परियोजना मौजूदा प्रोजेक्ट 17A नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट की अगली कड़ी होगी, जिसमें और बेहतर स्टील्थ डिजाइन, अधिक आधुनिक सेंसर और अगली पीढ़ी के हथियारों को शामिल किया जाएगा.

प्रोजेक्ट 18A सबसे अहम क्‍यों?

तीसरी और सबसे महत्वाकांक्षी योजना प्रोजेक्ट 18A है, जिसे नौसेना का अगली पीढ़ी का लार्ज सरफेस कॉम्बैटेंट (LSC) प्रोग्राम माना जा रहा है. इसके तहत 14,000 से 15,000 टन क्षमता वाले 6 विशाल युद्धपोत विकसित करने की योजना है. आकार और क्षमता के लिहाज से ये भारत में अब तक निर्मित सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली सरफेस वॉरशिप में शामिल होंगे. इन युद्धपोतों में लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता, अत्याधुनिक वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली, एडवांस कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लंबे समय तक लगातार तैनाती की क्षमता होगी. हालांकि, यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है. इसके लिए अगले तीन वर्षों के भीतर आरएफपी जारी होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि जटिल डिजाइन और अत्याधुनिक तकनीक के कारण निर्माण कार्य शुरू होने में करीब आठ वर्ष लग सकते हैं.

About the Author

authorimg

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



Leave a Comment