नई दिल्ली. क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी कहानियाँ हैं जो रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज तो हैं, लेकिन समय के साथ लोग उन्हें भूल जाते हैं. ऐसी ही एक अविश्वसनीय और दिलचस्प कहानी पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर आफताब बलोच की है. साल 1973 में खेली गई उनकी एक पारी ने न सिर्फ क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया, बल्कि किस्मत ने भी उनके साथ एक ऐसा अनोखा इत्तेफाक रचा जिसे कोई चाहकर भी नहीं भूल सकता.
428 रनों की पारी खेलने वाले आफताब बलोच खेल पाए सिर्फ 2 टेस्ट मैच
70 के दशक में आफताब बलोच पाकिस्तान के धुरंधर बल्लेबाजों में शुमार थे और दुनिया में इनकी चर्चा भी होने लगी था. पर आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस बल्लेबाज ने क्रिकेट इतिहास की छठी सबसे बड़ी पारी खेली उसे सिर्फ 2 टेस्ट खेलने का मौका मिला .
कराची का ऐतिहासिक दिन और 428 रनों का महा-रिकॉर्ड
साल 1973 में सिंध के लिए खेलते हुए आफताब बलोच ने बलूचिस्तान के खिलाफ कराची के मैदान पर इतिहास रच दिया. उन्होंने एक ही प्रथम श्रेणी पारी में 428 रनों का विशाल स्कोर बनाया. यह क्रिकेट इतिहास का सातवां सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है. यह सिर्फ रनों का अंबार नहीं था, बल्कि पिच पर टिके रहने की उनकी अद्भुत क्षमता का प्रमाण था. बलोच ने 10 घंटे बैटिंग की और 25 चौके लगाए. क्रिकेट के पूरे इतिहास में केवल छह बल्लेबाज ही ऐसे हुए हैं जिन्होंने एक पारी में उनसे ज्यादा समय तक बल्लेबाजी की हो. बलोच की इस मैराथन पारी ने उन्हें रातों-रात एक लीजेंड बना दिया था.
मजबूत बैटिंग लाइन-अप की चुनौती
इतने बड़े रिकॉर्ड के बावजूद, आफताब बलोच पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर सके और अपने पूरे करियर में केवल दो टेस्ट मैच ही खेल पाए. इसका सबसे बड़ा कारण उस दौर में पाकिस्तान की टीम का बेहद मजबूत होना था. उस समय पाकिस्तानी टीम में सादिक मोहम्मद, माजिद खान, जहीर अब्बास, आसिफ इकबाल और मुश्ताक मोहम्मद जैसे दिग्गज और विश्व प्रसिद्ध बल्लेबाज शामिल थे. इस तगड़े बैटिंग ऑर्डर के कारण बलोच जैसे महान प्रतिभाशाली खिलाड़ी को भी टीम से बाहर बैठना पड़ा.
होटल का कमरा नंबर, 428 एक जादुई इत्तेफाक
आफताब बलोच के करियर से जुड़ा सबसे दिलचस्प और हैरान कर देने वाला किस्सा साल 1974 का है जब पाकिस्तानी टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई, तो बलोच भी उस टीम का हिस्सा थे हालाँकि उन्हें इस दौरे पर एक भी टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिला. जब वह इंग्लैंड पहुंचे, तो होटल प्रशासन ने उन्हें ठहरने के लिए जो कमरा अलॉट किया, उसका नंबर था 428. यह बिल्कुल वही नंबर था जो उन्होंने एक साल पहले कराची के मैदान पर रनों के रूप में बनाया था. यह संयोग इतना सटीक और जादुई था कि कोई भी कहानीकार ऐसी कल्पना नहीं कर सकता.
इसे देखकर ऐसा लगता था मानो किस्मत खुद उनके उस महान रिकॉर्ड को सलाम कर रही हो. आफताब बलोच भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत लंबा करियर न बना पाए हों, लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके 428 रन और इंग्लैंड के होटल का वह कमरा नंबर 428 हमेशा क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेगा. यह कहानी हमें याद दिलाती है कि क्रिकेट सिर्फ रनों और विकेटों का खेल नहीं है, बल्कि यह अनपेक्षित संयोगों और कभी न भूलने वाले लम्हों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है.