10 रुपये का दान… ऐसे ‘डार्क पैटर्न’ से कमाई कर रहा था फिजिक्सवाला, CCPA ने ठोका 5 लाख का जुर्माना! – ccpa takes action against dark patterns physicswala mcafee fined consumer protection edmm


क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप ऑनलाइन कोई सामान खरीद रहे हों और चेकआउट करते वक्त अचानक बिल में कुछ एक्स्ट्रा पैसे जुड़ जाएं? या फिर ‘फ्री’ कोर्स के नाम पर आपसे आपकी निजी जानकारियां जबरन मांग ली जाएं? डिजिटल दुनिया के इस धोखे और चालाकी को तकनीकी भाषा में ‘डार्क पैटर्न’ कहा जाता है.

अब देश के करोड़ों उपभोक्ताओं, खासकर छात्रों के हितों की रक्षा के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने इस चालाकी के खिलाफ एक बहुत बड़ा हंटर चलाया है. मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अगुवाई में CCPA ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने और उनके फैसलों को प्रभावित करने के आरोप में फिजिक्सवाला और मैकेफी (McAfee) पर भारी जुर्माना ठोक दिया है.

इस कार्रवाई के तहत ‘फिजिक्सवाला’ पर 5 लाख रुपये और ‘मैकेफी’ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इसके साथ ही दोनों कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत अपने प्लेटफॉर्म से इन भ्रामक तौर-तरीकों को हटाएं और यह सुनिश्चित करें कि उपभोक्ता बिना किसी दबाव या हेरफेर के अपनी मर्जी से सही फैसला ले सकें.

आपको बता दें कि यह सख्त कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 और ‘डार्क पैटर्न्स की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश, 2023’ के तहत की गई है.

फिजिक्सवाला: पहले से सिलेक्टेड ‘डोनेशन’ और ‘फ्री’ कोर्स का भ्रामक खेल
CCPA ने खुद (Suo Motu) संज्ञान लेते हुए फिजिक्सवाला के प्लेटफॉर्म की जांच की थी. जांच में सामने आया कि ऐप और वेबसाइट के इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया था कि छात्र अपनी मर्जी से स्वतंत्र फैसला ही न ले पाएं.

जांच में क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं?

बास्केट स्नीकिंग: जब छात्र कोई कोर्स खरीदने के बाद पेमेंट (चेकआउट) करने जाते थे, तो पीडब्लू फाउंडेशन (PW Foundation) के नाम पर ₹10 का डोनेशन पहले से ही अपने आप सिलेक्ट (Pre-selected) होकर कुल बिल में जुड़ जाता था. इसके लिए छात्र की कोई स्पष्ट सहमति नहीं ली जाती थी. अगर कोई छात्र उस ₹10 के डोनेशन को हटाना चाहता था, तो स्क्रीन पर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और शादी से जुड़े बेहद इमोशनल (भावुक) मैसेज दिखाए जाते थे, ताकि छात्र पर दबाव बने और वह डोनेशन को सिलेक्ट रहने दे.

वहीं जिन कोर्सेज को ‘फ्री’ (मुफ्त) कहकर प्रमोट किया जा रहा था, उन्हें देखने के लिए यूजर्स से उनका मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी निजी जानकारियां साझा करना अनिवार्य कर दिया गया था. CCPA की बारीक जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग यूजर अकाउंट्स पर कंटेंट बिल्कुल एक जैसा ही था. इसका मतलब यह है कि उन कोर्सेज को एक्सेस करने के लिए छात्रों का पर्सनल डेटा इकट्ठा करना कतई जरूरी नहीं था.

CCPA की दो टूक टिप्पणी
प्राधिकरण ने साफ कहा कि पहले से टिक किए गए विकल्पों के जरिए उपभोक्ता की सहमति नहीं मानी जा सकती. सहमति हमेशा साफ और स्पष्ट होनी चाहिए. इसके अलावा, बिना पूरी जानकारी दिए कोर्सेज को ‘फ्री’ बताना और फिर डेटा मांगना सरासर भ्रामक विज्ञापन है. चूंकि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर यूजर्स स्कूल-कॉलेज के छात्र और नाबालिग हैं, इसलिए यह मामला और भी गंभीर हो जाता है.

मैकेफी पर भी लगा 1 लाख का जुर्माना
प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर कंपनी मैकेफी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को भी अपने प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या ऐप पर किसी भी तरह के डार्क पैटर्न का इस्तेमाल न करने की सख्त हिदायत दी गई है और कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

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