20 हजार रुपये में हत्या, वीजा का लालच व इंटरनेट मीडिया से भर्ती; FBI रिपोर्ट में गैंगस्टरों का खौफनाक खेल उजागर


रोहित कुमार, चंडीगढ़। कभी एक-दूसरे के करीबी रहे गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के संगठित अपराध नेटवर्क के कामकाज को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। अमेरिका के न्याय विभाग (यूएस डिपार्टमेंट आफ जस्टिस) और एफबीआई की जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार दोनों गैंग अपराधों को अंजाम देने के लिए नाबालिगों, आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं और महिलाओं का इस्तेमाल करते थे।

भर्ती के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा लिया जाता था और पैसे, पहचान व सुरक्षा का लालच देकर युवाओं को गैंग से जोड़ा जाता था। अमेरिका में FBI के आपरेशन हार्ड बाल के तहत लास एंजिलिस की संघीय अदालत में पेश 44 पन्नों के अभियोग पत्र में दावा किया गया है कि भगवानपुरिया गैंग भारत के कुछ हिस्सों में हत्या जैसी वारदात के लिए सदस्यों को महज 20 हजार रुपये तक का भुगतान करता था।

दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि गैंग के कुछ सदस्यों ने अमेरिका और कनाडा तक अपना नेटवर्क फैला रखा था।

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नाबालिगों की भर्ती और अंतरराष्ट्रीय तस्करी

रिपोर्ट के अनुसार गुजरात की साबरमती जेल में बंद लारेंस बिश्नोई का गिरोह पंजाब के गरीब इलाकों से नाबालिगों की भर्ती करता था। गैंग को पता था कि पकड़े जाने पर किशोरों को अपेक्षाकृत कम सजा मिलती है। भर्ती के बाद सदस्यों को अपराध करवाने के बदले बहुत कम रकम दी जाती थी, जबकि वफादार सदस्यों को कथित तौर पर फर्जी तरीके से छात्र या वर्क वीजा दिलाकर अमेरिका और कनाडा भेजा जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि बिश्नोई ने अपने नेटवर्क की जिम्मेदारी अलग-अलग देशों में सहयोगियों को सौंप रखी थी। उसका करीबी गोल्डी बराड़ उत्तरी अमेरिका में गतिविधियां संचालित करता था, जबकि रोहित गोदारा यूरोप में नेटवर्क संभालता था। अभियोग पत्र के मुताबिक गिरोह अमेरिका में कोकीन, मेथामफेटामाइन और हेरोइन की तस्करी, प्रतिद्वंद्वी तस्करों से खेप लूटने और उससे होने वाली कमाई भारत भेजने जैसे अपराधों में भी शामिल था।

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जेल से ड्रग्स और रंगदारी का खेल

दूसरी ओर, असम की सिलचर सेंट्रल जेल में बंद जग्गू भगवानपुरिया के नेटवर्क से जुड़े रिकार्ड में दावा किया गया है कि उसकी सहयोगी मंदीप कौर उर्फ चीमा का इस्तेमाल अमेरिका में मादक पदार्थों की ढुलाई के लिए किया गया।

जांच दस्तावेजों में होशियारपुर के तत्कालीन टांडा थाना प्रभारी गुरिंदरजीत सिंह नागरा का भी नाम सामने आया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने गैंगस्टरों के साथ मिलकर लॉस एंजिलिस के एक परिवार से चार लाख डॉलर की उगाही की साजिश रची और पंजाब में रिश्तेदारों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी। नागरा को पुलिस लाइन भेजा जा चुका है। इस मामले में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

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युवाओं को अपराध से बचाने का अभियान

इधर, कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी फिनट्रैक ने भी अप्रैल में चेतावनी जारी कर कहा था कि आर्थिक रूप से कमजोर भारतीय छात्रों को धमकाकर और लालच देकर हिंसक वारदातों में शामिल किया जा रहा है। एजेंसी ने बिश्नोई और बंबीहा गैंग को ऐसी गतिविधियों के प्रमुख नेटवर्क बताया था। कनाडा सरकार पहले ही 29 सितंबर 2025 को लारेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुकी है।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि विदेश में बैठे गैंगस्टर इंटरनेट मीडिया के जरिए 18 से 30 वर्ष के युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल रहे हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर संपर्क कर उन्हें पैसों का लालच दिया जाता है और हत्या, रंगदारी व अन्य वारदातों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

डीजीपी के मुताबिक मामूली रकम और नशे की लत के कारण कई युवा आसानी से इनके जाल में फंस रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या कम पढ़े-लिखे या स्कूल छोड़ चुके युवाओं की है, जिन्हें गैंगस्टर अपना मोहरा बनाकर अपराध करवा रहे हैं। युवाओं के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि युवा इस तरह की गतिविधियों में शामिल न हो।

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