200 से अधिक मेडलिस्ट खिलाड़ियों को जल्द मिल सकती है आउट ऑफ टर्न नियुक्ति, फाइल तैयार


Athletes await rewards

सौगात के इंतजार में खिलाड़ी (ETV Bharat File Photo)

जयपुर: आउट ऑफ टर्न नियमों के तहत प्रदेश के मेडलिस्ट खिलाड़ियों को लम्बे समय से नौकरी का इंतजार है. खासकर पैरा खिलाड़ियों का कहना है कि तीन साल बीत जाने के बाद भी उन्हें सरकारी नौकरी तो दूर, मेडल जीतने पर मिलने वाली प्राइज मनी तक नहीं मिली है. बीते कुछ दिन पहले ये खिलाडी स्पोर्ट्स काउंसिल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. लेकिन अब सरकार इन खिलाड़ियों को नौकरी देने की तैयारी कर रही है.

स्पोर्ट्स काउंसिल का कहना है कि तकरीबन 200 से अधिक खिलाड़ियों की लिस्ट तैयार की गई है और जैसे ही फाइल को मंजूरी मिलेगी, वैसे ही मेडलिस्ट खिलाड़ियों को नौकरी दे दी जाएगी. हालांकि पैरा खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया है कि आउट ऑफ टर्न नियुक्ति के तहत उन्हें सरकारी नौकरी नहीं दी जा रही, जबकि सामान्य वर्ग के पदक विजेता खिलाड़ियों को इस सुविधा का लाभ मिल चुका है. खिलाड़ियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन करने के बावजूद उन्हें वर्षों से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं.

पढ़ें: क्रिकेटर रवि बिश्नोई समेत चार को पुलिस महकमे में बनाया डिप्टी एसपी, राजस्थान में ऐसा पहली बार

200 से अधिक खिलाड़ियों की सूची तैयार: पूरे मामले पर स्पोर्ट्स काउंसिल के सचिव राजकेश मीणा का कहना है कि खिलाड़ियों से जुड़ी समस्या के लिए स्पोर्ट्स काउंसिल सुनवाई भी करता है और इसके लिए सप्ताह में एक दिन भी तय किया गया है. फिलहाल खिलाड़ियों की प्रमुख समस्या उनकी प्राइज मनी और आउट ऑफ टर्न नियमों से जुड़ी हुई है. हमने 200 से अधिक खिलाड़ियों को नौकरी देने की तैयारी कर ली है. इससे जुड़ी फाइल मुख्य सचिव के पास भेजी जाएगी और जैसे ही हमें हरी झंडी मिलेगी, हम खिलाड़ियों को नौकरी और प्राइज मनी दे देंगे.

पढ़ें: आउट ऑफ टर्न पॉलिसी में बदलाव की तैयारी, रजिस्टर्ड खेलों में मेडल जीतने पर ही मिलेगा पॉलिसी का लाभ

भेदभाव का आरोप: पैरालिम्पिक मेडलिस्ट मोना अग्रवाल ने कुछ समय पहले पैरा खिलाड़ियों के साथ भेदभाव का भी आरोप लगाया था. उनका कहना था कि सामान्य खिलाड़ियों को समय पर नौकरी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, लेकिन पैरा खिलाड़ियों को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि यदि दोनों वर्ग के खिलाड़ी देश और प्रदेश के लिए पदक जीतते हैं, तो सुविधाओं और सम्मान में भी समानता होनी चाहिए. इतना ही नहीं कई खिलाड़ियों को अब तक उनकी घोषित प्राइज मनी भी नहीं मिल सकी है. वर्षों बीत जाने के बाद भी पुरस्कार राशि का भुगतान नहीं होने से खिलाड़ियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि कई खिलाड़ी सीमित संसाधनों में प्रशिक्षण लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाला प्रोत्साहन समय पर नहीं मिल रहा.



Leave a Comment