बांकीपुर उपचुनाव: PK-अभिषेक; वीणा और रेखा के बीच महासंग्राम, किसकी उड़ेगी नींद और कौन बिगाड़ेगा खेल?


डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर के उपचुनाव का राजनीतिक रण पूरी तरह सज चुका है। सत्तापक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने दांव चल दिए हैं।

इस चुनावी महासंग्राम में चार चेहरे हैं, जो एक-दूसरे से मुकाबले के लिए तैयार हैं। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन किसकी नींद उड़ाएगा और कौन खेल बिगाड़ेगा?

किस पार्टी का कौन उम्मीदवार

भाजपा ने संगठन के युवा चेहरे अभिषेक कुमार बंटी पर भरोसा जताया है, जबकि महागठबंधन की ओर से राजद ने एक बार फिर रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। हालांकि, सियासी गलियारों में अटकलें हैं कि कांग्रेस भी अपना उम्मीदवार उतार सकती है।

बहरहाल, इस उपचुनाव को सबसे दिलचस्प बनाने के लिए जन सुराज पार्टी के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर भी मैदान में हैं, जो पहली बार खुद चुनाव लड़ रहे हैं।

वहीं, तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) ने सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाकर इस चुनावी रण में उतारा है।

बांकीपुर सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि पटना शहर की राजनीतिक दिशा तय करने वाली सीट मानी जाती है। यही वजह है कि इस चुनाव पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं।

अब बात उम्मीदरों की: भाजपा का दांव और अभिषेक कुमार बंटी पर भरोसा

बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार अभिषेक कुमार बंटी लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं। पटना में बोरिंग रोड निवासी अभिषेक को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का करीबी माना जाता है।

करीब 26 साल से पार्टी संगठन में सक्रिय अभिषेक ने 1999 में बूथ अध्यक्ष के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।

इसके बाद पाटलिपुत्र मंडल में मंत्री, 2006 से 2012 तक मंडल अध्यक्ष और 2020 से 2023 तक पटना भाजयुमो के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई। उनका नामांकन 9 जुलाई को प्रस्तावित है।

राजद की रेखा

साल 2025 के विधानसभा चुनाव में बांकीपुर से मुकाबला कर चुकी रेखा गुप्ता पर राजद ने एक बार फिर विश्वास जताया है। वैश्य समाज से आने वाली रेखा गुप्ता को पार्टी शहरी मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने वाले चेहरे के रूप में देख रही है।

राजद इस चुनाव में सामाजिक समीकरण और विपक्षी वोटों के ध्रुवीकरण पर दांव लगा रही है। हालांकि, वह 2025 के चुनाव में करीब 51 हजार मतों से हारी थीं।

जनसुराज: पहली बार खुद मैदान में प्रशांत किशोर

चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव कई मायनों में अहम है। जन सुराज अभियान से राजनीतिक दल बनाने तक की यात्रा पूरी करने के बाद वह पहली बार स्वयं चुनाव लड़ रहे हैं।

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साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी थी, लेकिन बांकीपुर से उनकी उम्मीदवारी ने इस उपचुनाव को त्रिकोणीय नहीं, बल्कि बहुकोणीय बना दिया है।

जेजेडी की वीणा मानवी

जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) ने सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है। महिला विकास मंच की राष्ट्रीय संरक्षक रहीं वीणा लंबे समय से महिला सशक्तीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं।

वह पहले भी सक्रिय राजनीति में रही हैं और जदयू से भी जुड़ी रही हैं। पार्टी उन्हें सामाजिक सरोकारों का चेहरा बनाकर चुनावी मुकाबले में उतार रही है।

भाजपा का गढ़ रही है बांकीपुर सीट

बता दें कि बांकीपुर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह पटना वेस्ट विधानसभा के नाम से जानी जाती थी।

पटना वेस्ट सीट पर हुए पिछले 14 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने तीन बार जीत दर्ज की है। वाम दलों को दो बार सफलता मिली, जबकि जनक्रांति और जनता दल ने एक-एक बार जीत हासिल की।

दो बार निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे और भाजपा ने पांच बार यह सीट जीती। साल 1995 के बाद से यह सीट लगातार भाजपा के कब्जे में है। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने 1995, 2000 और 2005 (फरवरी व अक्टूबर) के चुनाव जीते थे।

साल 2006 में उनके निधन के बाद उनके पुत्र नितिन नवीन लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे। उनके राज्यसभा जाने के बाद ही यह सीट खाली हुई है, जिस पर अब उपचुनाव हो रहा है।

क्या कहते हैं बांकीपुर के जातीय समीकरण?

बांकीपुर शहरी सीट होने के बावजूद यहां जातीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो करीब 15 प्रतिशत कायस्थ मतदाता यहां निर्णायक माने जाते हैं।

सामान्य वर्ग के मतदाता लगभग 20 प्रतिशत हैं, जबकि यादव और मुस्लिम मतदाता करीब 10-10 प्रतिशत के आसपास बताए जाते हैं।

इन्हीं सामाजिक समीकरणों और पिछले तीन दशकों के चुनावी इतिहास के कारण बांकीपुर को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

हालांकि, इस बार प्रशांत किशोर की मौजूदगी और विपक्ष के बहुकोणीय मुकाबले ने चुनाव को पहले की तुलना में अधिक रोचक बना दिया है।

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