Success Story: 2 बच्चे प्रेरणा हैं, 11 साल की सरकारी नौकरी छोड़ SDM बनीं रुचि, खाना बनाते हुए की तैयारी – success story of sdm ruchi rani who got 260th rank in bpsc 70th result after 11 years govt job inspired by her two children


BPSC Success Story: पटना के बख्यितारपुर की रुचि रानी अब SDM मैडम कहलाएंगी। पति, ससुराल, बच्चों के सपोर्ट और लगभग साढ़े चार साल की लगातार मेहनत के बाद उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है। उनकी कहानी उन बहू-बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो परिवार की जिम्मेदारियों के आगे बढ़ने का सपना देख रही हैं।

Bihar SDM Ruchi Rani Success Story
BPSC 70वीं संयुक्त परीक्षा में 260वीं रैंक लाकर रुचि रानी एसडीएम बनी हैं। (फोटो सोर्स- यूट्यूब-स्पीड बिहार और इंस्टा- द स्टूडेंट्स टॉक)
Bihar SDM Ruchi Rani Success Story: ‘मोटिवेशन कहीं बाहर से नहीं आना चाहिए। आपको जिस भी चीज का जुनून हो, अगर जुनून सच्चा है तो अपने प्रति ईमानदार प्रयास कीजिए और वही ईमानदार प्रयास आपको सफलता तक ले जाता है।’ यह कहना है कि बिहार में SDM बनीं रुचि कुमारी का। उनकी सक्सेस स्टोरी सिखाती है कि अगर आपके पास हुनर और जज्बा है तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

2 बच्चे, 11 साल फुल टाइम नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करते हुए रुचि ने बिहार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास की है।

मां SDM नहीं बन पाई तो बेटी पूरा किया सपना

मां SDM नहीं बन पाई तो बेटी पूरा किया सपना

रुचि, बिहार की राजधानी पटना के बख्तियारपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने कई इंटरव्यू में अपनी जर्नी के बारे में बताया है। वे कहती हैं कि कभी उनकी मां बिहार प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनना चाहती थीं। उन्होंने परीक्षा भी दी थी, लेकिन चयन नहीं हुआ था। तब उन्होंने कहा था कि अगर वो यहां तक पहुंच सकती हैं तो तुम क्यों नहीं कर सकते? उस अधूरे सपने को पूरा करने के पक्के इरादे के साथ, रुचि ने उस सपने को अपना बना लिया और अपनी तैयारी के हर मुश्किल दौर में उससे हिम्मत जुटाई।(फोटो सोर्स- यूट्यूब- स्पीड बिहार)

दोनों बच्चे बने प्रेरणा, इनका फ्यूचर सोचकर उठाई किताबें

दोनों बच्चे बने प्रेरणा, इनका फ्यूचर सोचकर उठाई किताबें

अक्सर माना जाता है कि परिवार और फुल टाइम जॉब के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी नहीं हो पाती। खासकर बच्चे होने के बाद यह और भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन रुचि उन्हीं मुश्किलों को प्रेरणा मानती हैं। उनका कहना है कि दोनों बच्चे सबसे बड़ी प्रेरणा हैं, क्योंकि इन्हीं के फ्यूचर के बारे में सोचकर तैयारी शुरू की थी। उन्होंने कहा, ‘दोनों बच्चों का सहयोग रहा और मैं आज यहां तक पहुंच पाई हूं।

(फोटो सोर्स- बीपीएससी)

खाना बनाते-बनाते की तैयारी

खाना बनाते-बनाते की तैयारी

रुचि का मानना ​​है कि सही टाइम मैनेजमेंट उनकी सफलता का आधार था। उन्होंने हर मिनट का सही इस्तेमाल किया, जैसे-

  • खाना बनाते समय मोबाइल पर करंट अफेयर्स सुनना।
  • बच्चों को सुलाने के बाद देर रात तक पढ़ाई करना।
  • ऑफिस के समय में खाली टाइम का इस्तेमाल रिवीजन के लिए करना।

रुचि कहती हैं, ‘एक लक्ष्य खाली समय के छोटे-छोटे पलों को भी सीखने के मौकों में बदल सकता है। BPSC जैसी परीक्षाओं में सफलता कुछ महीनों की तैयारी से नहीं मिलती। धैर्य और लगातार कड़ी मेहनत सफलता के लिए सबसे जरूरी चीजें हैं।’

(फोटो सोर्स- यूट्यूब- स्पीड बिहार)

पति का सपोर्ट बनी सबसे बड़ी ताकत

पति का सपोर्ट बनी सबसे बड़ी ताकत

रुचि कहती हैं कि उनकी इस जर्नी में परिवार, खासकर पति प्रभाकर भारद्वाज का पूरा सपोर्ट मिला है, जो उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया। उन्होंने परिवारों से अपील भी की है कि वे अपनी बहू, बेटियों और माताओं को अपने सपने पूरे करने का हर मौका दें। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती हूं कि मेरी कहानी दूसरी महिलाओं को प्रेरित करे।'(फोटो सोर्स- यूट्यूब/स्पीड बिहार)

11 साल की सरकारी नौकरी छोड़ तीसरे बार में SDM बनीं रुचि

11 साल की सरकारी नौकरी छोड़ तीसरे बार में SDM बनीं रुचि

रुचि रानी ने अपनी सफलता से साबित किया है कि फुल टाइम नौकरी के साथ भी सपने पूरे किए जा सकते हैं। उन्होंने बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन समिति (BRLPS) में कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर (CC) से अपनी सरकारी नौकरी की शुरुआत की थी। अभी वे पंचायती राज विभाग में थीं। सरकारी नौकरी के बावजूद उन्होंने मां के सपने को पूरा करने के लिए बीपीएससी की तैयारी की और तीसरे प्रयास में एसडीएम बनीं।

उन्होंने बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल की। पहले अटेंप्ट में उनका पीटी क्लियर हो गया था और दूसरे अटेंप्ट में मेन्स में कुछ नंबर से सेलेक्शन नहीं हुआ था। रुचि रानी की कहानी अब लगन, अनुशासन और परिवार के सहयोग की एक प्रेरणादायक कहानी बन गई है।

(फोटो सोर्स- बीपीएससी)

अमन कुमार

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और ‘मानव को शांति कहां’ मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं… और पढ़ें