BPSC Success Story: पटना के बख्यितारपुर की रुचि रानी अब SDM मैडम कहलाएंगी। पति, ससुराल, बच्चों के सपोर्ट और लगभग साढ़े चार साल की लगातार मेहनत के बाद उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है। उनकी कहानी उन बहू-बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो परिवार की जिम्मेदारियों के आगे बढ़ने का सपना देख रही हैं।

2 बच्चे, 11 साल फुल टाइम नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करते हुए रुचि ने बिहार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास की है।
मां SDM नहीं बन पाई तो बेटी पूरा किया सपना
रुचि, बिहार की राजधानी पटना के बख्तियारपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने कई इंटरव्यू में अपनी जर्नी के बारे में बताया है। वे कहती हैं कि कभी उनकी मां बिहार प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनना चाहती थीं। उन्होंने परीक्षा भी दी थी, लेकिन चयन नहीं हुआ था। तब उन्होंने कहा था कि अगर वो यहां तक पहुंच सकती हैं तो तुम क्यों नहीं कर सकते? उस अधूरे सपने को पूरा करने के पक्के इरादे के साथ, रुचि ने उस सपने को अपना बना लिया और अपनी तैयारी के हर मुश्किल दौर में उससे हिम्मत जुटाई।(फोटो सोर्स- यूट्यूब- स्पीड बिहार)
दोनों बच्चे बने प्रेरणा, इनका फ्यूचर सोचकर उठाई किताबें
अक्सर माना जाता है कि परिवार और फुल टाइम जॉब के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी नहीं हो पाती। खासकर बच्चे होने के बाद यह और भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन रुचि उन्हीं मुश्किलों को प्रेरणा मानती हैं। उनका कहना है कि दोनों बच्चे सबसे बड़ी प्रेरणा हैं, क्योंकि इन्हीं के फ्यूचर के बारे में सोचकर तैयारी शुरू की थी। उन्होंने कहा, ‘दोनों बच्चों का सहयोग रहा और मैं आज यहां तक पहुंच पाई हूं।
(फोटो सोर्स- बीपीएससी)
खाना बनाते-बनाते की तैयारी
रुचि का मानना है कि सही टाइम मैनेजमेंट उनकी सफलता का आधार था। उन्होंने हर मिनट का सही इस्तेमाल किया, जैसे-
- खाना बनाते समय मोबाइल पर करंट अफेयर्स सुनना।
- बच्चों को सुलाने के बाद देर रात तक पढ़ाई करना।
- ऑफिस के समय में खाली टाइम का इस्तेमाल रिवीजन के लिए करना।
रुचि कहती हैं, ‘एक लक्ष्य खाली समय के छोटे-छोटे पलों को भी सीखने के मौकों में बदल सकता है। BPSC जैसी परीक्षाओं में सफलता कुछ महीनों की तैयारी से नहीं मिलती। धैर्य और लगातार कड़ी मेहनत सफलता के लिए सबसे जरूरी चीजें हैं।’
(फोटो सोर्स- यूट्यूब- स्पीड बिहार)
पति का सपोर्ट बनी सबसे बड़ी ताकत
रुचि कहती हैं कि उनकी इस जर्नी में परिवार, खासकर पति प्रभाकर भारद्वाज का पूरा सपोर्ट मिला है, जो उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया। उन्होंने परिवारों से अपील भी की है कि वे अपनी बहू, बेटियों और माताओं को अपने सपने पूरे करने का हर मौका दें। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती हूं कि मेरी कहानी दूसरी महिलाओं को प्रेरित करे।'(फोटो सोर्स- यूट्यूब/स्पीड बिहार)
11 साल की सरकारी नौकरी छोड़ तीसरे बार में SDM बनीं रुचि
रुचि रानी ने अपनी सफलता से साबित किया है कि फुल टाइम नौकरी के साथ भी सपने पूरे किए जा सकते हैं। उन्होंने बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन समिति (BRLPS) में कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर (CC) से अपनी सरकारी नौकरी की शुरुआत की थी। अभी वे पंचायती राज विभाग में थीं। सरकारी नौकरी के बावजूद उन्होंने मां के सपने को पूरा करने के लिए बीपीएससी की तैयारी की और तीसरे प्रयास में एसडीएम बनीं।
उन्होंने बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल की। पहले अटेंप्ट में उनका पीटी क्लियर हो गया था और दूसरे अटेंप्ट में मेन्स में कुछ नंबर से सेलेक्शन नहीं हुआ था। रुचि रानी की कहानी अब लगन, अनुशासन और परिवार के सहयोग की एक प्रेरणादायक कहानी बन गई है।
(फोटो सोर्स- बीपीएससी)
