Mutual Fund Investment: बीते छह महीने शेयर बाजार के साथ-साथ बुलियन बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमश: 11% और 8.6% की गिरावट आई जबकि सोना करीब 20% और चांदी 43% टूट गया। ऐसे में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स ने उम्मीद से भी ज्यादा रिटर्न दिया है।

सब जगह से निराशा
शेयर बाजार से परेशान निवेशकों ने सोना और चांदी (Gold Silver) खरीदना शुरू कर दिया। देखा गया है कि सोना और इक्विटी के बीच उल्टा संबंध होता है। आम तौर पर, जब इक्विटी की कीमतें गिरती हैं, तो सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि कभी-कभी इसके उलट भी होता है। लेकिन इस बार इतिहास नहीं दोहराया गया। पिछले छह महीनों में सोने की कीमतों में लगभग 20% और चांदी की कीमतों में 43% की गिरावट आई है। इसी दौरान, सेंसेक्स में 11% और निफ्टी में 8.6% की गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर और US फ़ेडरल रिज़र्व के ब्याज दरें न घटाने के संकेतों ने सोने और चांदी पर दबाव डाला, जबकि ईरान युद्ध के कारण इक्विटी बाज़ार भी दबाव में रहे।
यहां 19.92% तक का रिटर्न
इक्विटी और बुलियन में गिरावट के बीच मल्टी एसेट एलोकेशन फंड (Multi Asset Allocation Fund) ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है। पिछले कुछ सालों में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दिया है और पिछले 6 महीनों में भी इनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। इस लिस्ट में सबसे आगे निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड है, जिसने पिछले 3 सालों में 19.92% का सालाना रिटर्न दिया है। SBI, मोतीलाल ओसवाल और आदित्य बिड़ला सन लाइफ के मल्टी एसेट फंड्स का पिछले 3 सालों में सालाना रिटर्न क्रमशः 17.50%, 13.90% और 17.40% रहा है।
सेबी का है सख्त नियम
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) का नियम है कि मल्टी एसेट फंड बनाते समय तीनों एसेट क्लास में से हर एक में कम से कम 10% का एलोकेशन होना चाहिए। उदाहरण के लिए निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड को ही लें, जिसके पास इस कैटेगरी में सबसे ज़्यादा एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) हैं। मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड का फायदा यह है कि इनमें पैसा अलग-अलग एसेट क्लास में लगाया जाता है। इससे सारा पैसा सिर्फ उन एसेट में लगने का जोखिम कम हो जाता है जिन्होंने पहले अच्छा प्रदर्शन किया है, और उन एसेट में निवेश न करने की गलती से भी बचा जा सकता है जो फिलहाल कम पसंद किए जा रहे हैं। ये फंड निवेशकों के लिए बहुत अच्छे हैं क्योंकि इनमें कई फंड को मैनेज करने या समय-समय पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने की जरूरत के बिना ही डाइवर्सिफिकेशन का लाभ मिल जाता है।
सही समय कब?
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि अगर अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने (अलग-अलग तरह के निवेश करने) का कोई सही समय है, तो वह अभी है। यहीं पर मल्टी-एसेट एलोकेशन म्यूचुअल फंड काम आते हैं। ये फंड हाइब्रिड म्यूचुअल फंड होते हैं जिन्हें कम से कम तीन तरह की एसेट क्लास (निवेश के साधनों) में निवेश करना होता है, जिनमें इक्विटी, डेट और कमोडिटी शामिल हैं। मल्टी एसेट एलोकेशन फंड की स्ट्रैटेजी के आधार पर, पोर्टफोलियो में इक्विटी, फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज़, सोना या दूसरी कमोडिटीज़ और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) शामिल हो सकते हैं। मल्टी-एसेट फंड का एक बड़ा फायदा डाइवर्सिफिकेशन है। चूंकि अलग-अलग एसेट क्लास समय के साथ अलग-अलग तरह से परफॉर्म करते हैं, इसलिए उनमें निवेश करने से रिस्क और रिटर्न को बैलेंस करने में यह सहायता करता है।
(डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, एनबीटी के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें। क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।)
