Petrol-Diesel Price: तीन सरकारी कंपनियां, तीन महीने और ₹47,700 करोड़ की चपत! कौन-कौन हैं लिस्ट में? – iocl, bpcl and hpcl may may report 47700 crore loss in first quarter


ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी। इससे देश की टॉप तीन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पहली तिमाही में भारी चपत लग सकती है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमत में बढ़ोतरी की थी। लेकिन इसके बावजूद तेल कंपनियों को 47,700 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

हाइलाइट्स

  • पश्चिम एशिया में संकट गहराने से कच्चे तेल की कीमत में फिर आई उछाल
  • सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को लग सकती है 47,700 करोड़ की चपत
  • पेट्रोल, डीजल और LPG की रिटेल बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है
  • पहली तिमाही में LPG अंडर-रिकवरी लगभग 25,000 करोड़ रुपये का अनुमान
Iran War Impact on India
ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में संकट एक बार फिर गहरा गया है। इससे कच्चे तेल की कीमत में बुधवार को करीब 6 फीसदी तेजी आई और आज भी यह तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे। यह संघर्ष करीब 100 दिन से अधिक समय तक चला और इस दौरान कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई। इसका सबसे बुरा असर भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि जून तिमाही में एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल को कुल मिलाकर ₹47,700 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।

जापानी ब्रोकरेज नोमुरा का अनुमान है कि एचपीसीएल को 13,900 करोड़ रुपये, बीपीसीएल को 15,800 करोड़ रुपये और आईओसीएल ₹17,300 करोड़ का एबिटा लॉस होगा। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की रिटेल बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि कंपनियों ने कीमतों में कुछ बढ़ोतरी की थी लेकिन वे कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं।

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एलपीजी सिलेंडर पर घाटा

घरेलू ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल का अनुमान है कि पहली तिमाही में तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग ₹47,700 करोड़ का नुकसान हो सकता है। उसके मुताबिक एचपीसीएल को ₹17,300 करोड़, आईओसीएल को ₹17,200 करोड़ और बीपीसीएल को ₹13,200 करोड़ का नुकसान होने की आशंका है। मोतीलाल ओसवाल ने तीनों कंपनियों को कुल मिलाकर 36,400 करोड़ रुपये का का नुकसान होने का अनुमान जताया है।
नोमुरा का अनुमान है कि पहली तिमाही में एलपीजी से अंडर-रिकवरी 560 रुपये प्रति सिलेंडर होगी, जो पिछले साल की चौथी तिमाही में 77 रुपये प्रति सिलेंडर थी। जेएम फाइनेंशियल के मुताबिक पहली तिमाही में एलपीजी अंडर-रिकवरी लगभग 25,000 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी जो पिछली तिमाही में 5,000 करोड़ रुपये थी। पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों को अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है।

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रोजाना कितना नुकसान

एनालिस्ट्स का अनुमान है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना 1,380 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्हें मार्केटिंग मार्जिन को बराबर करने के लिए ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत होगी। नोमुरा का मानना है कि तीन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में से एचपीसीएल पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि उसका मार्केटिंग एक्सपोजर ज्यादा है।

दिल प्रकाश

लेखक के बारे मेंदिल प्रकाशदिल प्रकाश, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर है। वह 20 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने खेल, राजनीति, संसद, विदेश, विज्ञान, रक्षा और बिजनेस जैसे कई विषयों पर रिपोर्टिंग की है। दिल प्रकाश पांच साल से भी अधिक समय से एनबीटी डिजिटल के साथ जुड़े हैं। इससे पहले वह देश की प्रमुख न्यूज एजेंसी यूनीवार्ता और बिजनेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने बीबीसी हिंदी में भी आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के रूप में कई साल काम किया है। यूनीवार्ता में कई साल तक स्पोर्ट्स डेस्क पर काम करने के बाद नेशनल ब्यूरो में कई विषयों पर रिपोर्टिंग की। इस दौरान उन्हें हॉकी वर्ल्ड कप, क्रिकेट वर्ल्ड कप और कॉमनवेल्थ गेम्स को कवर करने का मौका मिला। साथ ही उन्होंने डिफेंस करेंसपोंडेंट कोर्स भी किया है। इस दौरान उन्हें रक्षा बलों के काम करने के तरीके को करीब से देखने का मौका मिला। दिल प्रकाश ने नई दिल्ली के भारतीय विद्या भवन संस्थान से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।और पढ़ें