‘संस्कारी बाबूजी’ आलोक नाथ ने टीना अंबानी के साथ दिए थे रोमांटिक सीन, जितेंद्र का पिता बनने से किया था इनकार – sanskari babuji alok nath once did steamy scenes with tina ambani and denied being jeetendra father in film


बॉलीवुड में ‘संस्कारी बाबूजी’ के नाम से फेमस रहे आलोक नाथ ने अपने शुरुआती दौर में रोमांटिक हीरो की भूमिका भी निभाई थी। सादगी भरी और संस्कारी छवि के लिए मशहूर आलोक नाथ ने साल 1987 में आई फिल्म ‘कामाग्नि’ में आज अंबानी परिवार की छोटी बहू रहीं टीना अंबानी के साथ स्टीमी सीन दिए थे।

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आलोक नाथ टीना अंबानी के साथ दिए थे स्टीमी सीन
जब भी बॉलीवुड में संस्कारी पिता, प्यार करने वाले परिवार के मुखिया और आदर्शवादी ‘बाबूजी’ की बात होती है, तो सबसे पहले एक्टर आलोक नाथ का नाम याद आता है। बड़े पर्दे से लेकर छोटे पर्दे तक आलोक नाथ ने अपनी एक ऐसी छवि बनाई, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘विवाह’ जैसी फिल्मों में उनके पिता के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। आज जिन आलोक नाथ को दर्शक एक आदर्श पिता के रूप में देखते हैं, उन्होंने अपने शुरुआती दौर में रोमांटिक हीरो की भूमिका भी निभाई थी।

अपनी शांत, सादगी भरी और संस्कारी छवि के लिए मशहूर आलोक नाथ ने साल 1987 में आई फिल्म ‘कामाग्नि’ में एक अलग अंदाज दिखाया था। इस फिल्म में उन्होंने रोमांटिक किरदार निभाया था और अंबानी परिवार की छोटी बहू एक्ट्रेस टीना मुनीम के साथ नजर आए थे। फिल्म में उनके कुछ स्टीमी और रोमांटिक सीन की उस समय काफी चर्चा हुई थी।

आलोक नाथ के पिता चाहते थे, वो डॉक्टर बनें

आलोक नाथ का जन्म 10 जुलाई 1956 को देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर थे और मां हाउसवाइफ थीं। उनके पिता चाहते थे कि आलोक भी उनकी तरह डॉक्टर बनें लेकिन किस्मत ने उन्हें अभिनय की दुनिया में पहुंचा दिया। उन्होंने दिल्ली से अपनी पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में उनका झुकाव थिएटर की तरफ बढ़ा और वह रुचिका थिएटर ग्रुप से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से तीन साल तक अभिनय की बारीकियां सीखीं।

‘गांधी’ के लिए उन्हें करीब 20 हजार रुपये मिले थे

कहा जाता है कि साल 1980 में फिल्म ‘गांधी’ के लिए कास्टिंग डायरेक्टर डॉली ठाकुर नए कलाकारों की तलाश में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंची थीं। कई कलाकारों के ऑडिशन के बाद उन्होंने आलोक नाथ को चुना। इस फिल्म के लिए उन्हें करीब 20 हजार रुपये मिले थे और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई।

दूसरी फिल्म के लिए करीब पांच साल तक इंतजार

‘गांधी’ के बाद आलोक नाथ मुंबई पहुंचे, लेकिन यहां से आगे का रास्ता इतना आसान नहीं था। उन्हें अपनी दूसरी फिल्म के लिए करीब पांच साल तक इंतजार और संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने थिएटर में भी काम किया। संघर्ष के इसी दौर में उन्हें फिल्म ‘मशाल’ में छोटा सा किरदार मिला। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में काम मिलने लगा।

‘कयामत से कयामत तक’ के बाद आलोक नाथ की पहचान बढ़ने लगी

साल 1988 में आई आमिर खान और जूही चावला की फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के बाद आलोक नाथ की पहचान बढ़ने लगी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में पिता और परिवार के बड़े सदस्य की भूमिकाएं निभाईं। आलोक नाथ ने अपने करियर में करीब 140 फिल्मों और 15 से ज्यादा टीवी सीरियल्स में काम किया है। उनकी ज्यादातर भूमिकाएं ‘बाबूजी’ के किरदार की रहीं। हालांकि, आलोक नाथ को एक समय जितेंद्र के पिता का किरदार निभाने का ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने मना कर दिया था।

आलोक नाथ की पत्नी कौन हैं

आलोक नाथ की पर्सनल लाइफ की बात करें तो ‘कयामत से कयामत तक’ की रिलीज से ठीक एक साल पहले साल 1987 में उन्होंने आशु सिंह से शादी की। बता दें कि उनकी पत्नी तब दूरदर्शन पर आनेवाले फेमस शो ‘बुनियाद’ धारावाहिक के सेट पर एक प्रोडक्शन असिस्टेंट हुआ करती थी। दोनों को दो बच्चे हैं, बेटे का नाम शिवांग नाथ और बेटी जुनाई नाथ हैं।

अर्चना सिंह

लेखक के बारे मेंअर्चना सिंहअर्चना सिंह नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर हैं। पत्रकारिता की दुनिया में उनका सफर मुंबई से शुरू हुआ, जहां उन्होंने नवभारत टाइम्स अखबार के बाद न्यूज18 के साथ काम किया। साल 2008 से वह दिल्ली में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ी हुई हैं। अपने करियर के दौरान उन्हें विविध भारती के साथ भी काम करने का अवसर मिला, जिसने उनके अनुभवों को तराशा। पत्रकारिता के सफर में उन्होंने क्राइम बीट से लेकर बीएमसी और लोकल न्यूज़ रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां संभालीं। इसके साथ ही फिल्मी पार्टियों, इवेंट्स और फिल्मी कलाकारों के इंटरव्यूज़ कवर किए। मुंबई में आयोजित काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल, सेंट जेवियर्स कॉलेज का ‘मल्हार फेस्टिवल’ जैसे इवेंट्स की रिपोर्टिंग भी इनके अनुभव का हिस्सा रही हैं। मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अबू सलेम को जब भारत लाया गया था, उस अहम घटना पर रिपोर्टिंग करने का मौका भी इन्हें मिला।

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अर्चना सिंह ने मुंबई के सोमैया कॉलेज से साइंस विद्याविहार से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद इन्होंने केसी कॉलेज ऑफ आर्ट्स, मुंबई से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया।… और पढ़ें