रूस ने सेट कर दिया स्पेस में न्यूक्लियर हथियार, अमेरिका खोलेगा राज! – space nuclear weapon russia satellite detection technology


अंतरिक्ष में न्यूक्लियर हथियारों की मौजूदगी का पता लगाना अब तक बहुत मुश्किल रहा है. अब MIT के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक बताई है, जिससे छोटा सैटेलाइट अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे सैटेलाइट की जांच कर सकेगा. यह सैटेलाइट उन खास संकेतों को पकड़ सकेगा, जो परमाणु हथियार होने पर निकलते हैं.

यह तकनीक ऐसे समय में सामने आई है जब रूस के सैटेलाइट कॉसमॉस 2553 को लेकर सवाल उठाए गए हैं. अमेरिका ने आशंका जताई है कि यह सैटेलाइट फ्यूचर में अंतरिक्ष में न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े काम के लिए इस्तेमाल हो सकता है. हालांकि, रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है.

छोटा सैटेलाइट बताएगा अंतरिक्ष में छिपा हथियार

1967 में हुए आउटर स्पेस ट्रीटी समझौते के तहत अंतरिक्ष में परमाणु हथियार रखने पर रोक है. इस समझौते को रूस और अमेरिका समेत 118 देशों ने स्वीकार किया है. लेकिन अभी तक ऐसा कोई तरीका नहीं था, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कोई देश गुपचुप तरीके से अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तो नहीं रख रहा.

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एमआईटी – MIT के वैज्ञानिक अरेग डैनागोलियन ने एक ऐसा तरीका सुझाया है, जिसमें छोटा सैटेलाइट संदिग्ध सैटेलाइट के पास जाकर उसकी जांच कर सकेगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर किसी सैटेलाइट में न्यूक्लियर हथियार होगा तो उससे निकलने वाले न्यूट्रॉन संकेतों को पकड़ा जा सकता है.

4 किलोमीटर दूर से कर सकेगा पहचान

वैज्ञानिकों की स्टडी के अनुसार, यह छोटा सैटेलाइट करीब 4 किलोमीटर दूर से किसी थर्मोन्यूक्लियर हथियार का पता लगा सकता है. इसके लिए उसे संदिग्ध सैटेलाइट के पास लगभग एक हफ्ते तक रहना होगा.

Space nuclear weapon Russia

अगर जांच करने वाले सैटेलाइट को और करीब भेजा जाए या एक से ज्यादा सैटेलाइट इस्तेमाल किए जाएं तो यह काम कुछ घंटों में भी किया जा सकता है. इसमें लगे खास सेंसर न्यूट्रॉन संकेतों को पहचानेंगे और यह पता लगाने में मदद करेंगे कि वहां न्यूक्लियर हथियार मौजूद है या नहीं.

रूस के कॉसमॉस 2553 पर क्यों उठे सवाल

अंतरिक्ष में हथियारों को लेकर चिंता पिछले कुछ सालों में बढ़ी है. अमेरिका ने दावा किया है कि रूस अंतरिक्ष में न्यूक्लियर हथियारों की क्षमता विकसित कर रहा है. इसी वजह से रूस के कॉसमॉस 2553 सैटेलाइट पर भी नजर रखी जा रही है.

इस सैटेलाइट को फरवरी 2022 में लॉन्च किया गया था. यह पृथ्वी के चारों ओर मौजूद वैन एलन बेल्ट के पास से गुजरता है, जहां रेडिएशन काफी ज्यादा होता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यही रेडिएशन न्यूक्लियर हथियारों की पहचान में मदद कर सकता है.

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स्पेस में बढ़ते सैटेलाइट से बढ़ी चिंता

आज दुनिया में हजारों सैटेलाइट पृथ्वी की ऑर्बिट में मौजूद हैं. इनका इस्तेमाल इंटरनेट, मौसम की जानकारी, मैपिंग और नेविगेशन जैसी सेवाओं के लिए किया जाता है. अगर अंतरिक्ष में न्यूक्लियर विस्फोट होता है तो इससे कई सैटेलाइट को नुकसान पहुंच सकता है.

इस तकनीक को इस्तेमाल करने में कुछ चुनौतियां भी हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी दूसरे सैटेलाइट के बहुत करीब जाना सुरक्षा के लिहाज से सेंसेटिव हो सकता है. इसलिए इसे किसी अंतरराष्ट्रीय नियम और समझौते के तहत इस्तेमाल करना बेहतर होगा.

अंतरिक्ष में न्यूक्लियर हथियारों की निगरानी के लिए यह तकनीक एक नया तरीका दे सकती है. इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कोई देश अंतरिक्ष में नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रहा. हालांकि, इसे पूरी तरह लागू करने के लिए देशों के बीच सहयोग जरूरी होगा.

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