सूखा भी नहीं बिगाड़ पाएगा खेल… मात्र 90 दिनों में कंगनी की फसल से किसान कमाएं दोगुना लाभ, जानिए बुवाई की वैज्ञानिक विधि


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सूखा भी नहीं बिगाड़ पाएगा खेल, मात्र 90 दिनों में कंगनी की फसल से कमाएं लाभ

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Kangni Ki Kheti Kaise Kare: बदलते मौसम और घटते भूजल स्तर के बीच मोटे अनाज की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इसी कड़ी में ‘कंगनी’ एक ऐसी प्रमुख फसल बनकर उभरी है, जो कम पानी, न्यूनतम लागत और बेहद कम समय में किसानों को बंपर मुनाफा दे सकती है. सूखा सहन करने की अद्भुत क्षमता और पोषक तत्वों से भरपूर इस सुपरफूड की बुवाई का यह बिल्कुल सही समय है. आइए जानते हैं कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता से कि कैसे सही तकनीक अपनाकर किसान कंगनी से अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं.

Kangni Ki Kheti Kaise Kare: कंगनी कम पानी और कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली प्रमुख मोटे अनाज (मिलेट्स) की फसल है. यह सूखा सहन करने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर होती है. इसकी बुवाई जुलाई के बाद, मानसून की दूसरी बारिश के साथ शुरू की जाती है. प्रति एकड़ लगभग ढाई से तीन किलो बीज की आवश्यकता होती है. बीज को हल्की जुताई के बाद छिड़ककर बोया जाता है. यह फसल 80 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसमें कीट और बीमारियां भी बेहद कम लगती हैं. कंगनी की खेती से किसान कम खर्च में अधिक उत्पादन लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.

वैज्ञानिक तरीके से इस तरह करें खेती
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि कंगनी की खेती का समय खरीफ के मौसम में होता है और इसकी बुवाई जुलाई में भी आसानी से की जा सकती है. वर्षा आधारित क्षेत्रों में मानसून शुरू होने पर भी इसकी बुवाई की जा सकती है. इस मौसम में इसकी बुवाई काफी अच्छी रहती है. सीड ड्रिल से इसकी बुवाई करने पर किसानों को बहुत ज्यादा फायदा होता है, जिसमें हम लाइन से लाइन की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखते हैं और पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर रखी जाती है. इसके साथ ही बीज को बोते समय उसकी गहराई दो से तीन सेंटीमीटर रखी जाती है. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ही हमें इसकी बुवाई करनी चाहिए.

बीज की मात्रा, उपयुक्त मिट्टी और सिंचाई प्रबंधन
इसकी खेती के लिए हमें 2 से 3 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. यदि हम लाइन से लाइन और पौधे से पौधे की निश्चित दूरी रखते हुए इसकी बुवाई करते हैं, तो हमें बेहतरीन मुनाफा निकल कर आता है. इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है; विशेषकर वैसी भूमि जहां पानी जमा न होता हो, वहां पर हम इसकी खेती आसानी से कर सकते हैं. सामान्यतः यह बरसात के मौसम में पूरी तरह सफल रहती है.

यदि बारिश कम हो तो पहली सिंचाई 25 से 30 दिनों में और दूसरी सिंचाई बालियां निकलने पर की जा सकती है. बुवाई के 20 से 25 दिनों के अंदर इसकी निराई-गुड़ाई कर लेनी चाहिए. इसकी पैदावार 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ तक निकल आती है, जिससे किसानों को बहुत अच्छा मुनाफा मिल जाता है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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