केरल हाईकोर्ट ने एक मामले में IAS अधिकारी की बिना शर्त माफी खारिज कर दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में माफीनामा वाला हलफनामा फिर से लिखकर लाने को कहा है।

IAS अधिकारी के बीजू ने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, IAS अधिकारी के बीजू ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में खुद खड़े होकर बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने एक मंजूरी आदेश में कथित तौर पर ‘अदालत की अवमानना करने वाली टिप्पणी’ की थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। यह माफी जस्टिस ए बदरुद्दीन के सामने मांगी गई, जो कडाकम्पल्ली मनोज की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं।
सोचने-समझने के बाद मुझे सचमुच अफसोस है कि आदेश की भाषा ऐसी थी जिससे यह लग सकता था कि इस माननीय कोर्ट के अधिकार पर बुरा असर पड़ रहा है। मैं उस आदेश में लिखी हर उस बात को बिना किसी शर्त के वापस लेता हूं।
के बीजू, IAS
IAS के बीजू ने कोर्ट में अपने माफीनामे में क्या कहा
IAS अधिकारी के बीजू खुद कोर्ट में पेश हुए और बिना शर्त माफी मांगी। अपने हलफनामे में उन्होंने कहा-‘सोचने-समझने के बाद मुझे सचमुच अफसोस है कि आदेश की भाषा ऐसी थी जिससे यह लग सकता था कि इस माननीय कोर्ट के अधिकार पर बुरा असर पड़ रहा है। मैं उस आदेश में लिखी हर उस बात को बिना किसी शर्त के वापस लेता हूं, जिसका मतलब यह निकाला जा सकता था कि मैं कोर्ट की सही बात, अधिकार और न्यायिक समझ पर सवाल उठा रहा हूं। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब किसी मंजूर सरकारी आदेश में कोई गलती मिलती है या उसकी भाषा ठीक नहीं होती, तो कई मामलों में सरकार उसे रद्द कर देती है और नया आदेश जारी करती है। इस मामले में, एडवोकेट जनरल ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया और अब वह आदेश वापस ले लिया गया है।’
जब किसी मंजूर सरकारी आदेश में कोई गलती मिलती है या उसकी भाषा ठीक नहीं होती, तो कई मामलों में सरकार उसे रद्द कर देती है और नया आदेश जारी करती है। एडवोकेट जनरल ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया और अब वह आदेश वापस ले लिया गया है।
के बीजू, IAS
अफसरों को सरकार का हथियार नहीं बनना चाहिए: कोर्ट
कोर्ट में यह कार्यवाही तब शुरू हुई जब उद्योग विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद हनीश, राज्य काजू विकास निगम (KSCDC) के पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फिर से विचार करने के हाईकोर्ट के आदेश का बार-बार पालन करने में नाकाम रहे।
अदालत ने IAS के बीजू की अर्जी खारिज करते हुए यह चेतावनी भी दी कि सरकारी अधिकारियों को अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय सरकार का हथियार नहीं बनना चाहिए।
सरकारी अधिकारियों को अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय सरकार का हथियार नहीं बनना चाहिए।
केरल हाईकोर्ट
फिर से संशोधित हलफनामा लिखकर लाएं
- हालांकि IAS के बीजू ने खेद जताया और बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया और उन्हें संशोधित हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
- अदालत ने IAS के बीजू को एक ऐसा संशोधित हलफनामा आदेश जारी करने का निर्देश दिया जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया हो कि यह आदेश ‘विवेकपूर्वक विचार-विमर्श’ के बाद पारित किया गया था। मामले की आगे की सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
कोर्ट माफी से संतुष्ट नहीं हुआ
कोर्ट ने पेश की गई माफी से संतुष्ट न होते हुए IAS अधिकारी के बीजू से कहा है कि वे इसमें यह बात भी जोड़ें कि उन्होंने मामले की स्वतंत्र रूप से समीक्षा की थी और तथ्यों का आकलन करने के बाद आदेश दोबारा जारी किया था। अब इस मामले पर आगे विचार के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की गई है।
क्या है पूरा मामला, समझिए
- केरल में KSCDC के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर A1 K. रथीश और पूर्व चेयरमैन A3 R. चंद्रशेखरन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अब 6 जुलाई के आदेश से दे दी गई है। इन पर आरोप है कि इन्होंने कॉर्पोरेशन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। हालांकि, 2 जुलाई को बीजू द्वारा जारी मंजूरी के पिछले आदेश में कहा गया था कि कोर्ट के आदेशों की वजह से मंजूरी देने के लिए मजबूर होना पड़ा और सरकार ने इस पर कोई सोच-विचार नहीं किया था।
- बाद में एडवोकेट जनरल की सलाह पर ‘एनेक्शर A9’ वाला यह आदेश रद्द कर दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने आदेश की भाषा पर आपत्ति जताई थी और न्यायपालिका की ‘छवि खराब करने’ के लिए ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (केरल हाई कोर्ट) रूल्स’ के नियम 9 के तहत अधिकारी को अवमानना का नोटिस जारी किया था।
