IAS अफसर ने खड़े होकर बिना शर्त माफी मांगी, हाईकोर्ट असंतुष्ट होकर बोला-फिर से लिखकर लाएं – ias officer k biju apology rejects in kerala high court seeks fresh affidavit in cashew corp scam


केरल हाईकोर्ट ने एक मामले में IAS अधिकारी की बिना शर्त माफी खारिज कर दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में माफीनामा वाला हलफनामा फिर से लिखकर लाने को कहा है।

Kerala High Court
केरल हाईकोर्ट
तिरुवनंतपुरम। केरल हाईकोर्ट ने काजू कॉर्पोरेशन भ्रष्टाचार के कथित मामले में विवादित ‘अभियोजन मंजूरी आदेश’ को लेकर काजू विकास विभाग के प्रभारी सचिव IAS अधिकारी के बीजू की बिना शर्त माफी खारिज कर दी है। कोर्ट आईएएस अफसर की भाषा से संतुष्ट नहीं हुआ और उनकी अर्जी खारिज करते हुए मामले की सुनवाई 15 जुलाई तय कर दी है।

IAS अधिकारी के बीजू ने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, IAS अधिकारी के बीजू ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में खुद खड़े होकर बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने एक मंजूरी आदेश में कथित तौर पर ‘अदालत की अवमानना करने वाली टिप्पणी’ की थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। यह माफी जस्टिस ए बदरुद्दीन के सामने मांगी गई, जो कडाकम्पल्ली मनोज की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं।

सोचने-समझने के बाद मुझे सचमुच अफसोस है कि आदेश की भाषा ऐसी थी जिससे यह लग सकता था कि इस माननीय कोर्ट के अधिकार पर बुरा असर पड़ रहा है। मैं उस आदेश में लिखी हर उस बात को बिना किसी शर्त के वापस लेता हूं।

के बीजू, IAS

IAS के बीजू ने कोर्ट में अपने माफीनामे में क्या कहा

IAS अधिकारी के बीजू खुद कोर्ट में पेश हुए और बिना शर्त माफी मांगी। अपने हलफनामे में उन्होंने कहा-‘सोचने-समझने के बाद मुझे सचमुच अफसोस है कि आदेश की भाषा ऐसी थी जिससे यह लग सकता था कि इस माननीय कोर्ट के अधिकार पर बुरा असर पड़ रहा है। मैं उस आदेश में लिखी हर उस बात को बिना किसी शर्त के वापस लेता हूं, जिसका मतलब यह निकाला जा सकता था कि मैं कोर्ट की सही बात, अधिकार और न्यायिक समझ पर सवाल उठा रहा हूं। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब किसी मंजूर सरकारी आदेश में कोई गलती मिलती है या उसकी भाषा ठीक नहीं होती, तो कई मामलों में सरकार उसे रद्द कर देती है और नया आदेश जारी करती है। इस मामले में, एडवोकेट जनरल ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया और अब वह आदेश वापस ले लिया गया है।’

जब किसी मंजूर सरकारी आदेश में कोई गलती मिलती है या उसकी भाषा ठीक नहीं होती, तो कई मामलों में सरकार उसे रद्द कर देती है और नया आदेश जारी करती है। एडवोकेट जनरल ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया और अब वह आदेश वापस ले लिया गया है।

के बीजू, IAS

अफसरों को सरकार का हथियार नहीं बनना चाहिए: कोर्ट

कोर्ट में यह कार्यवाही तब शुरू हुई जब उद्योग विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद हनीश, राज्य काजू विकास निगम (KSCDC) के पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फिर से विचार करने के हाईकोर्ट के आदेश का बार-बार पालन करने में नाकाम रहे।
अदालत ने IAS के बीजू की अर्जी खारिज करते हुए यह चेतावनी भी दी कि सरकारी अधिकारियों को अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय सरकार का हथियार नहीं बनना चाहिए।

सरकारी अधिकारियों को अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय सरकार का हथियार नहीं बनना चाहिए।

केरल हाईकोर्ट

फिर से संशोधित हलफनामा लिखकर लाएं

  • हालांकि IAS के बीजू ने खेद जताया और बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया और उन्हें संशोधित हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
  • अदालत ने IAS के बीजू को एक ऐसा संशोधित हलफनामा आदेश जारी करने का निर्देश दिया जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया हो कि यह आदेश ‘विवेकपूर्वक विचार-विमर्श’ के बाद पारित किया गया था। मामले की आगे की सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

कोर्ट माफी से संतुष्ट नहीं हुआ

कोर्ट ने पेश की गई माफी से संतुष्ट न होते हुए IAS अधिकारी के बीजू से कहा है कि वे इसमें यह बात भी जोड़ें कि उन्होंने मामले की स्वतंत्र रूप से समीक्षा की थी और तथ्यों का आकलन करने के बाद आदेश दोबारा जारी किया था। अब इस मामले पर आगे विचार के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की गई है।

क्या है पूरा मामला, समझिए

  • केरल में KSCDC के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर A1 K. रथीश और पूर्व चेयरमैन A3 R. चंद्रशेखरन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अब 6 जुलाई के आदेश से दे दी गई है। इन पर आरोप है कि इन्होंने कॉर्पोरेशन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। हालांकि, 2 जुलाई को बीजू द्वारा जारी मंजूरी के पिछले आदेश में कहा गया था कि कोर्ट के आदेशों की वजह से मंजूरी देने के लिए मजबूर होना पड़ा और सरकार ने इस पर कोई सोच-विचार नहीं किया था।
  • बाद में एडवोकेट जनरल की सलाह पर ‘एनेक्शर A9’ वाला यह आदेश रद्द कर दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने आदेश की भाषा पर आपत्ति जताई थी और न्यायपालिका की ‘छवि खराब करने’ के लिए ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (केरल हाई कोर्ट) रूल्स’ के नियम 9 के तहत अधिकारी को अवमानना का नोटिस जारी किया था।

दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें