आयोजनों का राजस्व केवल प्रायोजन पर निर्भर नहीं होना चाहिए। सफल वैश्विक मॉडल दिखाते हैं कि खेल अर्थव्यवस्था का राजस्व टिकट बिक्री, प्रीमियम सेवाओं, आवास, पर्यटन, खुदरा बिक्री और डिजिटल सामग्री से आता है। एक अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन खेल अर्थव्यवस्था के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को गति देता है।
पर्यटन, खुदरा और शहरी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए खेल आयोजनों का उपयोग करना सही दिशा है। एक अंतरराष्ट्रीय दर्शक केवल खेल नहीं देखता, वह विमानन, होटल और स्थानीय मनोरंजन सेवाओं का भी उपभोक्ता होता है।
हालांकि, खेल अर्थव्यवस्था का मतलब केवल बड़े आयोजनों की दौड़ नहीं है। सार्वजनिक बजट से बने स्टेडियमों को दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता होती है। अन्यथा, वे खेल अर्थव्यवस्था के लिए बोझ बन सकते हैं।
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प्रबंधन की गुणवत्ता ही सफलता की कुंजी है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल बजट के दबाव को कम कर सकता है। खेल अर्थव्यवस्था को केवल राज्य के बजट पर नहीं, बल्कि सामाजिक और विदेशी निवेश पर निर्भर होना चाहिए, जैसा कि खेल अधिकारियों ने भी जोर दिया है।