जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। मान्यता, बुनियादी ढांचा और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) नियमों के उल्लंघन पर सरकार ने जिले के 70 प्राइवेट स्कूलों का एमआइएस पोर्टल (स्कूल प्रबंधन सूचना प्रणाली) को बंद कर दिया है।
इन स्कूलों में फिलहाल दाखिला नहीं हो सकेंगे। इनमें कई स्कूल ऐसे हैं जो डमी या फिर कोचिंग सेंटर की तरह संचालित हो रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहे प्राइवेट स्कूलों पर भविष्य में कार्रवाई जारी रहेगी।
फरीदाबाद और बल्लभगढ़ ब्लाॅक में एक हजार से अधिक प्राइवेट स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें 30 प्रतिशत स्कूलों के पास स्थायी मान्यता नहीं है। फिर भी विद्यार्थियों को दाखिला दे देते हैं।
अधिकारियों की जांच में पता चला कि कुछ स्कूल विद्यार्थियों का आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिला करा देते हैं, लेकिन कक्षाएं बिना मान्यता वाली जगहों पर लगती हैं। इससे विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग जाता है।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कई विद्यार्थी ऐसे थे जो इन स्कूलों के जाल में फंस गए थे, जिससे उनकी बोर्ड परीक्षाएं प्रभावित हुई। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराते समय मान्यता से संबंधित दस्तावेज तथा सुविधाएं की जांच अवश्य करने के लिए कहा है।
यह है कार्रवाई का अहम कारण
शिक्षा निदेशालय की ओर से 70 प्राइवेट स्कूलों की लिस्ट जारी की गई है। इनमें कई बड़े स्कूल भी शामिल हैं, जिनकी ब्रांच नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों में संचालित हो रही हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अनुसार उक्त स्कूलों को मान्यता नहीं मिली है। स्कूल बुनियादी ढांचे और जमीन के मानक पूरे नहीं करते थे।
नियमों के अनुसार स्कूलों को आवासीय मकानों से नहीं चलाया जा सकता है। ज्यादातर स्कूलों में सिर्फ कुछ कमरे थे और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था।
वहीं कुछ स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने शिक्षा का अधिकार के तहत शिक्षा निदेशालय को 25 प्रतिशत सीटों की जानकारी नहीं दी थी। इसलिए फिलहाल स्कूलों के एमआईएस पोर्टल को बंद किया गया है।
स्कूलों को ब्लैक लिस्ट करके दाखिला की पावर छीन ली गई है। शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि इन स्कूलों में विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में दाखिला न हो सके। जिन विद्यार्थियों के दाखिले हो गए हैं, उनके बारे में शिक्षा निदेशालय की ओर से विचार किया जाएगा। स्कूलों को मान्यता से संबंधित दस्तावेज जमा कराने को लेकर फिलहाल कोई आदेश नहीं मिले हैं।
– बसंत कुमार ढिल्लो, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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