IAEA ने बताया है कि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद उसकी स्थिति की जानकारी में काफी कमी आई है। अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को तेहरान की परमाणु साइट तक पहुंच हासिल नहीं हुई है।

संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक और शांति-निर्माण मामलों की अंडर-सेक्रेटरी रोजमेरी डिकार्लो ने प्रस्ताव 2231 पर महासचिव की हालिया रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि इस हमले में सेंट्रीफ्यूज, भारी पानी और यूरेनियम अयस्क का उत्पादन और मौजूदा स्टॉक को नुकसान पहुंचने की संभावना है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में जानकारी नहीं
डिकार्लो ने सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए कहा कि IAEA ने बताया है कि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद उसकी स्थिति की जानकारी में काफी कमी आई है। उन्होंने बताया कि IAEA ने परमाणु अप्रसार संधि सुरक्षा उपाय समझौते के तहत कोई भी फील्ड-वेरिफिकेशन नहीं किया है। इस समझौते के तहत IAEA को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी की अनुमति मिली थी।
ईरान की परमाणु साइट तक पहुंच भी नहीं
उन्होंने बताया कि फरवरी एजेंसी को परमाणु कार्यक्रम पर ईरान से कोई अपडेट नहीं मिला है और वह देश में किसी भी साइट या जगह तक पहुंच हासिल करने में असमर्थ रही है। सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए डिकार्लो ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर मतभेदों के बावजूद कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है।
सेक्रेटरी-जनरल सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे ईरान के परमाणु मुद्दे का शांतिपूर्ण, व्यापक और स्थायी समाधान पाने के लिए रचनात्मक और अच्छी नीयत से बातचीत करें। यह समाधान रिज़ॉल्यूशन 2231 के उद्देश्यों और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को मज़बूत करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप होना चाहिए। आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करना ईरान के परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चौंकाने वाली जानकारी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह मुद्दा ऐसे समय उठा है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान फिर से अपनी परमाणु साइटों को फिर से बना रहा है। अमेरिकी ब्रॉडकास्टर CNN ने शुक्रवार को कुछ तस्वीरें जारी कीं।
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि तेहरान के दक्षिण-पूर्व में स्थित पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स के अंदर तालेघान 2 नाम की परमाणु हथियार रिसर्च सुविधा को फिर से बनाया जा रहा है। इसे अमेरिका के साथ जून में हुए शुरुआती समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है, जिसके तहत ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम में यथास्थिति बनाए रखनी है।
