जम्मू में बदले साइबर ठगों के हथकंडे, OTP से आगे बढ़ा खेल, अब स्टडी वीजा-सरकारी नौकरी का झांसा


जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू शहर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले जहां ठग केवल बैंक खाते और ओटीपी के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे, वहीं अब उन्होंने अपने तरीके बदल लिए हैं।

स्टडी वीजा, सरकारी नौकरी, निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच, यूपीआई भुगतान, फर्जी कस्टमर केयर, केवाईसी अपडेट और डिजिटल गिरफ्तारी जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों से लाखों रुपये की ठगी की जा रही है। जागरूकता अभियान चलने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं।

ल के दिनों में क्राइम ब्रांच जम्मू ने स्टडी वीजा दिलाने, सरकारी नौकरी का झांसा देने और निवेश के नाम पर ठगी के कई मामले दर्ज किए हैं। जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी पहले पीड़ित का विश्वास जीतते हैं और फिर अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं।

कई मामलों में लोगों को सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप के माध्यम से संपर्क कर फर्जी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप पर भी भेजा गया। साइबर ठग लगातार नई तकनीकों और मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे खुद को बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, विदेश शिक्षा सलाहकार या किसी प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को भ्रमित करते हैं।

बैंक खाते की जानकारी साझा न करें

कई बार नौकरी दिलाने या विदेश भेजने के नाम पर पहले पंजीकरण शुल्क और बाद में अलग-अलग मदों में पैसे जमा करवाए जाते हैं। रकम मिलने के बाद आरोपित मोबाइल बंद कर फरार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी लोगों की जल्द लाभ पाने की मानसिकता और डर दोनों का फायदा उठाते हैं।

खबरें और भी

कभी बैंक खाता बंद होने का डर दिखाया जाता है तो कभी बिजली कनेक्शन काटने या कानूनी कार्रवाई का भय पैदा किया जाता है। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी बड़ी आर्थिक हानि से बचा सकती है। साइबर पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, पासवर्ड या बैंक खाते की जानकारी साझा न करें।

किसी भी निवेश, नौकरी या वीजा संबंधी प्रस्ताव की पहले आधिकारिक स्तर पर जांच करें। यदि ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत करें। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध पर अंकुश लगाने में आम लोगों की जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है। यदि प्रत्येक व्यक्ति डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्कता बरते और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना दे, तो साइबर ठगों के मंसूबों को काफी हद तक विफल किया जा सकता है।

साइबर पुलिस की सलाह, ऐसे रहें सुरक्षित

  1. किसी के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी या पासवर्ड साझा न करें।
  2. सरकारी नौकरी, स्टडी वीजा या निवेश के नाम पर मांगी गई रकम जमा करने से पहले पूरी जांच करें।
  3. केवल आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप का ही उपयोग करें।
  4. अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध एप डाउनलोड करने से बचें।
  5. बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करने वालों की पहचान की पुष्टि करें।
  6. इंटरनेट मीडिया पर मिलने वाले आकर्षक निवेश प्रस्तावों से सावधान रहें।
  7. साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। लेनदेन का स्क्रीनशॉट, बैंक विवरण और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखें।

साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। लोग जितने जागरूक होंगे, उतना ही ऐसे अपराधों पर रोक लगेगी। किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा कर बैंक या यूपीआई संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है तो बिना देरी किए 1930 पर शिकायत करें। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर धनराशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना अधिक रहती है। -साइबर पुलिस, जम्मू



Leave a Comment