अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिका ने इस हफ्ते तीसरी बार ईरान पर हमला किया है. इसके बाद पश्चिम एशिया में हालात और गंभीर हो गए हैं. इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार और शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है. तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जबकि भारतीय शेयर बाजार में भी आज कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं.
भारत जैसे देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है. अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा चला और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई तो पेट्रोल-डीजल से लेकर कई जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं. मार्केट एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद करने का ऐलान
सीएनबीसी आवाज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अगले आदेश तक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) को बंद रखने का ऐलान किया है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी सप्लाई गुजरती है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि विदेशी जहाजों को इस रास्ते से गुजरने नहीं दिया जाएगा. दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बंदर अब्बास, बंदर ए दय्यर और हॉर्मुज के पास सीरिक इलाके समेत कई स्थानों पर कार्रवाई की है. अमेरिका के सेंटकॉम (CENTCOM) का दावा है कि वह ईरान की सैन्य क्षमता को लगातार कमजोर कर रहा है. वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है.
तेल की कीमतों में तेज उछाल
तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड करीब 4.30 फीसदी उछलकर 79.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं NYMEX पर WTI क्रूड लगभग 4.34 फीसदी बढ़कर 74.51 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है.
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है या तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं. इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है.
भारतीय बाजार में रह सकती है कमजोरी
ग्लोबल टेंशन का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है. गिफ्ट निफ्टी करीब 186 अंक गिरकर 24,055 के आसपास कारोबार कर रहा है. इससे संकेत मिल रहे हैं कि सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत कमजोर रह सकती है. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति साफ नहीं होती, तब तक निवेशकों का रुख सतर्क रह सकता है. ऐसे समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है.
एशियाई बाजारों में भी दिखा दबाव
सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिली. जापान का निक्केई करीब 1.23 फीसदी गिर गया. दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 3 फीसदी लुढ़क गया. वहीं हांगकांग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी मामूली गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे.
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. निवेशकों को डर है कि अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो दुनिया भर में महंगाई दोबारा बढ़ सकती है. ऐसे में ग्लोबल बाजारों में अगले कुछ दिनों तक उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है.