सगे भाई ने घर बुलाया और मार दी गोली: चाईबासा में खूनी खेल, मुआवजे का विवाद या डायन-बिसाही का शक?


जागरण संवाददाता, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया थाना क्षेत्र के जयपुर गांव में सगे भाइयों के बीच हुए खूनी संघर्ष ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। 

 

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, घटना की मुख्य वजह भूअर्जन (जमीन अधिग्रहण) से मिली मुआवजा राशि के बंटवारे का विवाद है। हालांकि, मृतक के परिजनों ने डायन-बिसाही के शक को भी इस सनसनीखेज हत्याकांड का एक बड़ा कारण बताया है।

 

बिखर गया परिवार, बेबस पिता का छलका दर्द

पोस्टमार्टम हाउस में अपने बड़े बेटे के बेजान शरीर के पास खड़े बेबस पिता मुंडा लागुरी की आंखों से आंसुओं का सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा था। 

 

अपनी थरथराती आवाज में उन्होंने कहा क‍ि मेरे बूढ़े कंधों पर दुखों का दोहरा बोझ आ गया है। अब मुझे एक बेटे की अर्थी को कंधा देकर श्मशान पहुंचाना है, तो वहीं दूसरे बेटे को जेल की सलाखों के पीछे जाते हुए देखना भी बाकी है।

 

पिता मुंडा लागुरी ने बताया कि दोनों भाइयों के बीच केवल मुआवजे की रकम को लेकर अनबन नहीं थी। दरअसल, छोटा बेटा महेंद्र लागुरी काफी समय से अपने बड़े भाई शंकर लागुरी और भाभी सुशांति लागुरी पर डायन होने का संदेह करता था और इसी बात पर झगड़ता था। 

 

करीब एक माह पूर्व भी दोनों भाइयों के बीच जमकर मारपीट हुई थी, जिसके बाद शंकर अपनी जान बचाने के लिए पत्नी के साथ ससुराल में रहने चला गया था।

 

फोन कर साजिश के तहत घर बुलाया, फिर मारी गोली

मृतक की पत्नी सुशांति लागुरी ने बताया कि सोमवार को महेंद्र ने फोन कर उन दोनों को वापस घर बुलाया था। ससुर मुंडा लागुरी ने बैंक में ₹50,000 जमा कराने के लिए उन्हें पैसे सौंपे थे। 

 

लेकिन बैंक में भारी भीड़ होने के कारण वे पैसे जमा नहीं करा पाए और रकम लेकर वापस जयपुर गांव लौट आए। सुशांति का आरोप है कि जैसे ही वे दोनों घर की दहलीज पर पहुंचे, पहले से घात लगाकर बैठे महेंद्र ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर शंकर को मौत के घाट उतार दिया। 

 

अब मेरे तीन मासूम बच्चों का क्या होगा?

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी महेंद्र वहां रखे ₹50,000 नकद लेकर मौके से फरार हो गया। अपने सुहाग को हमेशा के लिए खोने के बाद सुशांति का रो-रोकर बुरा हाल है। 

 

उन्होंने सिसकते हुए कहा क‍ि मेरे तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं। अब उनकी परवरिश कौन करेगा? हमारा तो सब कुछ एक झटके में उजड़ गया।

 

कभी जिस आंगन में दोनों भाइयों की हंसी गूंजती थी, आज वहां सिर्फ मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। पूरा परिवार इस असहनीय दर्द के बीच अपने अंधकारमय भविष्य की चिंता में डूबा है।



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