Rafale Fighters: राफेल में ड्रोन उड़ाने वाले सस्ते रॉकेट लगा रहा फ्रांस, इस जेट पर भारत करता है बड़ा भरोसा – rafale fighters integrated with cheap drone killing laser guided 68mm rockets as france conducted live-fire tests
Rafale integrated with laser guided rockets: फ्रांस ने अपने सबसे मारक फाइटर जेट्स को लेकर परीक्षण किए हैं। इसमें लेजर गाइडेड रॉकेट लगाए गए हैं। ये परीक्षण कामयाब रहे हैं। भारत भी राफेल फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करता आया है।
राफेल फाइटर जेट
नई दिल्ली/पेरिस: भारत समेत पूरी दुनिया में राफेल फाइटर जेट की डिमांड काफी ज्यादा है। राफेल की सटीक मारक क्षमता इसकी सबसे बड़ी खूबी है। अब फ्रांस ने अपने राफेल फाइटर जेट से लेजर गाइडेड रॉकेट के लाइव-फायर टेस्ट किए हैं। ये ड्रोन का संहार करने वाले ये रॉकेट सस्ते हैं। अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के बाद यह आधुनिक हवाई युद्ध में एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है, क्योंकि वायु सेनाएं अब यह समझ रही हैं कि उन्हें महज महंगी मिसाइलों पर निर्भर रहने के बजाय, कई स्तरों वाले और किफायती इंटरसेप्ट विकल्पों की जरूरत है।
राफेल में 68 एमएम लेजर-गाइडेड रॉकेट
द वॉर जोन की एक स्टोरी के अनुसार, फ्रांसीसी सरकार की रक्षा खरीद और टेक्नोलॉजी एजेंसी, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ आर्मामेंट्स (DGA) ने राफेल पर 68 एमएम लेजर-गाइडेड रॉकेट के कामयाबी से लगाने का ऐलान किया। ये टेस्ट फरवरी में शुरू हुए थे। DGA ने बताया कि इंटीग्रेशन का काम फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल के ‘सेंटर डी’एक्सपर्टाइज़ एरियेंन मिलिटेयर’ (CEAM:फ्रांसीसी एयरोस्पेस रिसर्च और टेस्ट सेंटर) के साथ मिलकर किया गया, जिसमें डसॉल्ट एविएशन और थेल्स का सहयोग मिला। इस प्रोग्राम को ‘लुटे एंटी-ड्रोन सुर एवियन डी कॉम्बैट’ (LADAC, यानी कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए एंटी-ड्रोन क्षमता) के नाम से जाना जाता है।
दूसरे देशों को भी मिल सकता है ये रॉकेट
हालांकि LADAC को शुरू में एयर फोर्स और नेवी द्वारा उड़ाए जाने वाले फ्रांसीसी राफेल के लिए बनाया गया है, लेकिन इसे राफेल खरीदने वाले दूसरे देशों और शायद दूसरे कॉम्बैट जेट्स को भी दिया जा सकता है।
ड्रोन का मुकाबला करने के लिए तैयार किया जा रहा राफेल
पिछले अक्टूबर में फ्रेच एयर एंड स्पेस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल जेरोम बेलेंजर ने एक संसदीय सुनवाई में कहा था कि ईरान के शाहिद-136 और रूस की गेरान सीरीज जैसे लंबी दूरी के वन-वे अटैक ड्रोन का मुक़ाबला करने के लिए राफेल और/या मिराज 2000D RMV को लेजर-गाइडेड रॉकेट देने की जरूरत है।
ज्यादा कीमत वाली मिसाइल टिकाऊ नहीं
बेलेंजर ने कहा, ‘हवा में एंटी-ड्रोन ऑपरेशन के मामले में कुछ हजार डॉलर के ड्रोन को गिराने के लिए दस लाख यूरो से ज्यादा कीमत वाली MICA एयर-टू-एयर मिसाइल का इस्तेमाल करना टिकाऊ नहीं है।’ उन्होंने आगे कहा-‘हमें कम लागत वाली फायरिंग क्षमताएं विकसित करनी होंगी या अपने गन फायर-कंट्रोल सिस्टम में बदलाव करना होगा।’
भारत के जंगी बेड़े का हिस्सा है राफेल
भारत ने 15 जनवरी, 2026 को 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दी है। ये राफेल मल्टी रोल वाले फाइटर होंगे। रक्षा खरीद बोर्ड ने इसकी मंजूरी दी थी। इसे खरीदने में कुल लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये आएगी। इसमें उड़ान भरने को तैयार 18 राफेल सीधे फ्रांस से आएंगे। वहीं, बाकी के 96 राफेल भारत की घरेलू रक्षा इंडस्ट्री में ही बनाए जाएंगे। इस राफेल में करीब 60 फीसदी कलपुर्जे स्वदेशी होंगे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बढ़ा था भरोसा
भारतीय वायुसेना का भरोसा राफेल तब बढ़ा, जब इसने बीते साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपना जलवा दिखाया था। उस वक्त राफेल ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। भारतीय वायुसेना के बेड़े में मंजूर 42 स्क्वॉड्रन के मुकाबले अभी 29 स्क्वॉड्रन फाइटर जेट ही हैं। अभी भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल का बेड़ा है। वहीं, भारत की नौसेना ने 26 राफेल के लिए करार किया था।
लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।
दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।
दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।
नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।
दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें