पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और आसिफ भारत में करते थे ड्रग्स की तस्करी, गृह मंत्रालय के अधिकारी के दावे से मचा ‘हड़कंप’


स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि ने पाकिस्तान के भारत दौरे को लेकर हैरान करने वाले दावे किए हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी, जब भारत का दौरा करते थे, तो वे ड्रग्स की तस्करी किया करते थे। उनके इस दावे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। उन्होंने कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेकर ऐसा दावा किया है।

मणि ने पाकिस्तान के दो पूर्व दिग्गज गेंदबाजों के नाम का जिक्र किया है। उन्होंने शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम लिया है। मणि के मुताबकि ये दोनों पाकिस्तान से भारत ड्रग्स लाते थे। उन्होंने ये दावा ऐसे समय में किया है, जब भारतीय टीम पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलती है। दोनों टीमों के बीच आखिरी बार कोई द्विपक्षीय सीरीज साल 2012-13 में खेली गई थी।

शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का लिया नाम

एएनआई के साथ पॉडकास्ट में बात करते हुए मणि ने हैरान करने वाला खुलासा किया है। वे 2006-2010 तक गृह मंत्रालय में थे। उन्होंने कहा, हमने पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ को लेकर एक मामले में रिपोर्ट की थी। उसे पाकिस्तानी हाई कमिश्नर ने वापस भेज दिया था। उन्होंने खुद कबूल किया था कि वे ड्रग्स ले जा रहे थे। उनका ये बैकग्राउंड है। जब भी पाकिस्तानी टीमें और डेलीगेशन भारत आए, तो उन्होंने यहां पर ड्रग्स की तस्करी की।

उन्होंने ये दावा किया कि भारत में ड्रग तस्करी करने की ऑफिशियल पॉलिसी होती थी। उन्होंने कहा, “भारत में ड्रग्स भेजना पाकिस्तान की ऑफिशियल पॉलिसी है। वे हाई-प्रोफाइल वाले लोग हैं। पाकिस्तानी टीम के दूसरे लोग भी इसी तरह के थे। उनके नाम कभी नहीं बताए गए लेकिन पूरी टीम में ऐसे लोग हैं। वे ऐसा करते थे।”

पाकिस्तान की कोच के मौत पर भी उठाए सवाल

पाकिस्तान के पूर्व कोच बॉब वूल्मर की 18 मार्च 2007 को विश्व कप के दौरान संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। वे अपने कमरे में बेहोश पाए गए थे। उनके निधन की चर्चा भी उस समय खूब हुई थी। उनका निधन आयरलैंड के खिलाफ पाकिस्तान को मिली हार के बाद हुई थी। मणि ने उनके निधन को भी ड्रग्स के कनेक्शन से जोड़ा है।

उन्होंने कहा, पाकिस्तान के कोच बॉब वूल्मर ने ड्रग्स तस्करी का विरोध किया था। इसके बाद वे संदिग्ध हालात में मारे गए। सभी कड़ियों को जोड़ना चाहिए। उस समय भारत में आतंकी हमलों की 30 प्रतिशत फंडिंग सिर्फ ड्रग्स से आ रही थी।”



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